जमुई छेड़छाड़ कांड पर पप्पू यादव का विस्फोट: 'CM को इस्तीफा देना चाहिए, बेटियाँ सुरक्षित नहीं'
सारांश
मुख्य बातें
पूर्णिया सांसद पप्पू यादव ने बिहार के जमुई जिले में 19 सितंबर 2026 को एक छात्रा के साथ हुई सामूहिक छेड़छाड़ की घटना पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पर सीधा निशाना साधा। उन्होंने बिहार में महिलाओं की सुरक्षा की बदतर स्थिति और प्रशासनिक विफलता को लेकर सरकार को कटघरे में खड़ा किया। विपक्षी दलों ने एकजुट होकर इस घटना को राज्य में कानून-व्यवस्था की पूर्ण नाकामी का प्रमाण बताया।
पप्पू यादव का तीखा हमला
पप्पू यादव ने कहा, 'आरोपी छात्रा से छेड़छाड़ करते रहे और लोग मूकदर्शक बने रहे। बेटियों के लिए समाज लड़ना ही नहीं चाहता।' उन्होंने आगे जोड़ा कि राजनीति में सत्ता और वोट के लिए जो मुद्दा काम आए, उसी की बात होती है और दो दिन बाद यह मामला भी भुला दिया जाएगा।
यादव ने प्रशासन पर सीधा आरोप लगाते हुए कहा कि अधिकारी विपक्ष को दबाने, जमीन माफिया, बालू माफिया और शराब माफिया के साथ मिलकर पैसे कमाने और पोस्टिंग के लिए टारगेट पूरे करने में व्यस्त हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री पर तंज कसते हुए कहा कि 'लंबी-लंबी बातें करने की बजाय सम्राट चौधरी को अब इस्तीफा दे देना चाहिए।' गौरतलब है कि इस घटना में 10 लोगों पर एक छात्रा के साथ छेड़खानी का आरोप है।
कांग्रेस नेताओं की प्रतिक्रिया
कांग्रेस नेता राकेश सिन्हा ने घटना को 'भयावह' करार देते हुए कहा कि केवल निंदा करने से इसकी गंभीरता को नहीं समझा जा सकता। उन्होंने बिहार के मंत्री श्रवण कुमार के उस बयान पर कड़ी आपत्ति जताई, जिसमें इस घटना को 'छोटी घटना' कहा गया था। सिन्हा ने माँग की कि ऐसे बयान देने वाले मंत्रियों को तत्काल बर्खास्त किया जाए।
कांग्रेस सांसद मनोज कुमार ने कहा कि जमुई की इस घटना ने 'इंसानियत को शर्मसार' कर दिया है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि जो नेता खुद को समाजसेवक कहते हैं, वे ऐसी घटनाओं को 'छोटी-मोटी' बता रहे हैं। मनोज कुमार ने कहा, 'वह लड़की भी हमारी बच्ची थी — बिहार की, भारत की, देश की बेटी थी। बिहार में शासन और प्रशासन पूरी तरह नाकाम रहे हैं।'
मंत्री के बयान पर विवाद
यह ऐसे समय में आया है जब बिहार के एक वरिष्ठ मंत्री श्रवण कुमार द्वारा जमुई की इस घटना को 'छोटी घटना' बताने के बाद राजनीतिक तूफान खड़ा हो गया है। विपक्ष का कहना है कि इस तरह का बयान न केवल पीड़िता का अपमान है, बल्कि सरकार की संवेदनहीनता को भी उजागर करता है।
आलोचकों का कहना है कि बिहार में महिलाओं के विरुद्ध अपराध के मामलों में प्रशासनिक ढिलाई एक लंबे समय से चली आ रही समस्या है, और हर बार राजनीतिक बयानबाजी के बाद ऐसे मामले ठंडे बस्ते में चले जाते हैं।
आगे क्या होगा
विपक्षी दलों ने इस मामले में त्वरित न्यायिक कार्रवाई और पीड़िता की सुरक्षा सुनिश्चित करने की माँग की है। पप्पू यादव ने संकेत दिया है कि यदि सरकार ने उचित कदम नहीं उठाए तो वे इस मुद्दे को संसद और सड़क दोनों पर उठाएँगे। घटना की जाँच के संबंध में अभी तक प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।