प्रशांत किशोर का बिहार सरकार पर हमला: 'जन सुराज सिर्फ चुनाव नहीं, बिहार को जगाने का आंदोलन है'
सारांश
मुख्य बातें
जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर ने 15 अक्टूबर 2026 को सहरसा में बिहार की कानून-व्यवस्था को लेकर सम्राट चौधरी सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरा में एक अधिकारी को गोली मारे जाने, नालंदा में सिपाही की मौत और राघोपुर में नाव हादसे में एक दर्जन से अधिक बच्चों की मृत्यु का हवाला देते हुए प्रशासनिक विफलता पर गंभीर सवाल खड़े किए। किशोर ने आरोप लगाया कि राज्य का पुलिस-प्रशासन अपराध नियंत्रण की बजाय शराबबंदी और बालू माफिया से पैसा कमाने में व्यस्त है।
कानून-व्यवस्था पर गंभीर आरोप
प्रशांत किशोर ने कहा कि जब अपराधी सदन के सदस्य बनेंगे और सरकार की बागडोर संभालेंगे, तो बेहतर समाज और रोज़गार की कल्पना करना बेमानी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य में बेहतर समाज का निर्माण और युवाओं के लिए रोज़गार के अवसर तभी संभव हैं, जब कानून-व्यवस्था सुदृढ़ हो और प्रशासन अपनी ज़िम्मेदारी ईमानदारी से निभाए।
किशोर ने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस-प्रशासन की प्राथमिकता अपराध पर अंकुश लगाना नहीं, बल्कि अन्य माध्यमों से आर्थिक लाभ उठाना बन गई है। उनके अनुसार यह स्थिति बिहार के आम नागरिकों के लिए गहरी चिंता का विषय है।
राघोपुर नाव हादसा: व्यवस्था पर सवाल
राघोपुर में नाव पलटने से एक दर्जन से अधिक बच्चों की मौत पर किशोर ने गहरा दुख जताया। उन्होंने कहा कि इस तरह की दुर्घटना के समय राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) और राज्य आपदा मोचन बल (SDRF) की मौके पर अनुपस्थिति अत्यंत चिंताजनक है।
किशोर ने इस घटना को महज एक हादसा नहीं, बल्कि व्यवस्थागत विफलता का प्रतीक बताया और आपदा प्रबंधन के लिए आवश्यक तैयारियों की तत्काल ज़रूरत पर बल दिया। यह ऐसे समय में आया है जब बिहार में मानसूनी हादसों का सिलसिला थमा नहीं है।
विधान परिषद चुनाव: जवाबदेही का अवसर
प्रशांत किशोर ने विधान परिषद चुनाव का उल्लेख करते हुए कहा कि यह अवसर सरकार पर अंकुश लगाने और जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही सुनिश्चित करने का है। उन्होंने कहा कि वोट न मिलना कोई अपराध नहीं, लेकिन समाज को बाँटना, चोरी करना और बेईमानी करना निश्चित रूप से अपराध है।
किशोर ने दावा किया कि जन सुराज का लक्ष्य केवल विधायक या सांसद बनाना अथवा चुनाव जीतना नहीं है, बल्कि लोगों को यह समझाना है कि जाति, धर्म, पार्टी और नेता के प्रति अंध-निष्ठा से ऊपर उठकर अपने भविष्य को प्राथमिकता देना ही असली बदलाव का रास्ता है।
शिक्षा और रोज़गार को मतदान का आधार बनाने की अपील
किशोर ने मतदाताओं से अपील की कि वे बच्चों की शिक्षा और रोज़गार को अपने मताधिकार का मुख्य आधार बनाएँ। उन्होंने स्वीकार किया कि शुरुआती दौर में संगठन को अपेक्षित सफलता नहीं मिली, फिर भी जन सुराज अपने मूल विचारों के साथ अडिग है।
गौरतलब है कि जन सुराज बिहार की पारंपरिक राजनीतिक धाराओं से अलग एक नागरिक-केंद्रित मंच के रूप में खुद को प्रस्तुत कर रहा है। किशोर ने कहा कि संगठन का असली उद्देश्य बिहार के लोगों को उनके अधिकारों, भविष्य और विकास के प्रति जागरूक करना है — और यह यात्रा जारी रहेगी।