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प्रशांत किशोर का बिहार की जनता पर कड़ा प्रहार: 'लाल-हरे गमछे पर वोट दिया, अब भुगतो'

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प्रशांत किशोर का बिहार की जनता पर कड़ा प्रहार: 'लाल-हरे गमछे पर वोट दिया, अब भुगतो'

सारांश

प्रशांत किशोर ने गोपालगंज में बिहार की जनता को आईना दिखाया — लाल-हरे गमछे और जाति-धर्म पर वोट देने का नतीजा है टूटते पुल, पलायन और बेरोज़गारी। नेताओं के साथ-साथ मतदाताओं को भी सीधे कटघरे में खड़ा किया।

मुख्य बातें

प्रशांत किशोर ने 5 जून को गोपालगंज में बिहार की जनता और नेताओं दोनों पर तीखा हमला बोला।
उन्होंने कहा कि मुज़फ़्फ़रपुर हादसे के बाद स्वास्थ्य मंत्री दिल्ली चले गए; चुनाव बाद 55 से अधिक बिहारी युवकों की मज़दूरी के दौरान मौत पर कोई बयान नहीं आया।
किशोर ने कहा — नीतीश कुमार, उपेंद्र कुशवाहा, लालू यादव और जीतन राम मांझी के परिवार सत्ता में हैं, लेकिन दोष जनता का है जो जानते हुए भी वोट देती है।
उन्होंने दावा किया कि बिहार में शिक्षा नहीं सुधरेगी, फ़ैक्ट्री नहीं खुलेगी और पलायन बंद नहीं होगा ।
जन सुराज तीन वर्षों से यही संदेश दे रहा है कि नेता का चेहरा नहीं, मुद्दे देखकर वोट दें।

जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर ने 5 जून को गोपालगंज में एक सभा के दौरान बिहार की जनता और सत्ता में बैठे नेताओं दोनों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि बिहार के लोगों ने विकास, शिक्षा और रोज़गार जैसे बुनियादी मुद्दों की बजाय जाति, धर्म और प्रतीकों के आधार पर वोट दिया — और आज उसी फ़ैसले का खामियाजा भुगतना पड़ रहा है।

मुज़फ़्फ़रपुर हादसे पर सीधा निशाना

किशोर ने मुज़फ़्फ़रपुर की हालिया घटना का उल्लेख करते हुए कहा कि हादसे के बाद स्वास्थ्य मंत्री दिल्ली रवाना हो गए और बाद में लौटे। उन्होंने कहा, 'बिहार ने उसी मुज़फ़्फ़रपुर में एक बहुत बड़ा कांड देखा है, जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार थे। क्या नीतीश कुमार ने उस पर कोई बयान दिया था?' उन्होंने यह भी कहा कि चुनाव के बाद 55 से अधिक बिहारी युवक दूसरे राज्यों में मज़दूरी के दौरान दुर्घटनाग्रस्त होकर जान गँवा चुके हैं, लेकिन किसी नेता ने इस पर कोई बयान नहीं दिया।

सरकार की प्राथमिकताओं पर सवाल

किशोर ने कहा कि राज्य में सैकड़ों पुल टूट रहे हैं, लेकिन सरकार का बयान जनता के मुद्दों पर नहीं, बल्कि 'लाल गमछे और हरे गमछे' पर है। उनके अनुसार, 'सरकार का बयान तो जाति-धर्म पर है।' उन्होंने मतदाताओं को भी सीधे जिम्मेदार ठहराते हुए कहा, '₹10,000 में अपने बच्चों का भविष्य बेचा है, तो भुगतना ही पड़ेगा।'

परिवारवाद पर तीखा प्रहार

किशोर ने कहा कि नीतीश कुमार पूरे जीवन परिवारवाद के ख़िलाफ़ भाषण देते रहे, लेकिन आज उनका बेटा स्वास्थ्य मंत्री है। इसी तरह उपेंद्र कुशवाहा का बेटा पंचायत राज मंत्री है, लालू यादव का आधा परिवार सरकार में है और जीतन राम मांझी का पूरा परिवार सत्ता में है। उन्होंने कहा कि इसके लिए नेता नहीं, बल्कि वह जनता दोषी है जो यह सब जानते हुए भी उन्हें वोट देती है।

बिहार की शिक्षा और पलायन पर कड़ी चेतावनी

किशोर ने दावे के साथ कहा, 'बिहार में शिक्षा व्यवस्था नहीं सुधरेगी, फ़ैक्ट्री नहीं खुलेगी, रोज़गार नहीं मिलेगा और पलायन बंद नहीं होगा।' उन्होंने कहा कि जब तक बिहार के लोग त्वरित लाभ का लोभ नहीं छोड़ेंगे, तब तक नेता उनके और उनके बच्चों के शोषण करते रहेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि पूरे देश में बिहार के मुख्यमंत्री को लेकर उपहास हो रहा है — 'इस व्यक्ति को राष्ट्रपिता का नाम तक नहीं पता।'

जन सुराज की चेतावनी

किशोर ने कहा कि पिछले तीन वर्षों से जन सुराज लगातार यही संदेश दे रहा था कि नेता का चेहरा देखकर वोट देने से नेता का बेटा नेता बनेगा और जनता के बच्चे मज़दूर। उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसे नेताओं को दोबारा चुनने का असर उनकी ज़िंदगी पर नहीं, बल्कि बिहार के बच्चों की ज़िंदगी पर पड़ेगा। आने वाले चुनावों में जन सुराज इसी मुद्दे को केंद्र में रखकर अभियान चलाने की तैयारी में है।

संपादकीय दृष्टिकोण

और परिवारवाद की आलोचना तथ्यों पर टिकी है। लेकिन मतदाताओं को 'लोभी' कहना और ₹10,000 में वोट बेचने का आरोप लगाना उस ग़रीबी की संरचनात्मक जड़ों को नज़रअंदाज़ करता है जो इस 'लोभ' को मजबूर करती है। बिहार में बदलाव की राजनीति तब तक अधूरी रहेगी जब तक वह आरोप से आगे बढ़कर ज़मीनी संगठन और नीतिगत विकल्प नहीं बन जाती।
RashtraPress
21 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रशांत किशोर ने गोपालगंज में क्या कहा?
प्रशांत किशोर ने कहा कि बिहार की जनता ने जाति, धर्म और प्रतीकों के आधार पर वोट दिया, न कि शिक्षा, रोज़गार और विकास के मुद्दों पर — और इसी का नतीजा आज पलायन, बदहाल शिक्षा और टूटते पुलों के रूप में भुगतना पड़ रहा है।
किशोर ने किन नेताओं पर परिवारवाद का आरोप लगाया?
उन्होंने नीतीश कुमार, उपेंद्र कुशवाहा, लालू यादव और जीतन राम मांझी का नाम लेते हुए कहा कि इन सभी के परिवार के सदस्य सत्ता में हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि इसके लिए नेता नहीं, बल्कि वह जनता ज़िम्मेदार है जो यह जानते हुए भी उन्हें वोट देती है।
मुज़फ़्फ़रपुर हादसे पर किशोर ने क्या कहा?
किशोर ने कहा कि हादसे के बाद स्वास्थ्य मंत्री दिल्ली रवाना हो गए और बाद में लौटे। उन्होंने इसे बिहार की उस राजनीतिक संस्कृति का प्रतीक बताया जहाँ सरकार जनता के मुद्दों की बजाय जाति-धर्म पर बयान देती है।
जन सुराज बिहार में क्या बदलाव चाहता है?
जन सुराज का कहना है कि बिहार के लोगों को नेता का चेहरा नहीं, बल्कि शिक्षा, रोज़गार और विकास के मुद्दों पर वोट देना चाहिए। किशोर के अनुसार तीन वर्षों से यही संदेश दिया जा रहा है ताकि परिवारवाद और जाति-आधारित राजनीति का चक्र टूटे।
क्या प्रशांत किशोर ने बिहार के भविष्य को लेकर कोई दावा किया?
हाँ, किशोर ने कहा कि जब तक मतदाता त्वरित लाभ का लोभ नहीं छोड़ेंगे, तब तक बिहार में शिक्षा नहीं सुधरेगी, फ़ैक्ट्री नहीं खुलेगी और पलायन बंद नहीं होगा। यह उनका सीधा और कड़ा आकलन था, जो उन्होंने कैमरे पर दावे के साथ कहा।
राष्ट्र प्रेस
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