JPSC-JSSC अनियमितता: 21 दिन से धरने पर बैठे छात्र बोले — 'नौकरी बेच दी, अब जान भी ले लो'
सारांश
मुख्य बातें
झारखंड में जेपीएससी-जेएसएससी परीक्षाओं में अनियमितताओं के विरुद्ध छात्रों का आंदोलन 14 अगस्त 2026 को लगातार 21वें दिन भी जारी रहा। रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में डटे छात्र परीक्षा रद्द करने, सीबीआई जांच और भर्ती प्रक्रिया में आमूल सुधार की माँग पर अडिग हैं। अनशन पर बैठे एक छात्र ने कहा — 'नौकरी तो आप लोगों ने पहले ही बेच दी है, सब लूट लिए हैं, अब जान भी ले लीजिए।'
आंदोलन की पृष्ठभूमि और मौजूदा स्थिति
छात्रों का कहना है कि पिछले 21 दिनों से वे पूरी तरह शांतिपूर्ण तरीके से विरोध दर्ज करा रहे हैं, किंतु झारखंड सरकार उनकी माँगों को गंभीरता से नहीं ले रही। सरकार के साथ बातचीत का सिलसिला जारी है, परंतु छात्रों ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक माँगें पूरी नहीं होतीं, धरना समाप्त नहीं होगा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि शीघ्र समाधान नहीं निकला, तो देशभर से छात्र रांची में एकजुट होंगे।
भूख हड़ताल पर छात्रों की बिगड़ती सेहत
आंदोलन में शामिल एक छात्र ने बताया कि 14 अगस्त को उनकी भूख हड़ताल का 10वाँ दिन था। उन्होंने कहा, 'सेहत लगातार बिगड़ रही है। छठे दिन हालत बेहद खराब हो गई थी, मुझे तुरंत सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया। मेडिकल टीम ने जांच की और थोड़ा बेहतर महसूस होने पर मैं 10 अगस्त को विधानसभा के बाहर विरोध प्रदर्शन में शामिल हुआ — अस्पताल से बाकायदा छुट्टी मिले बिना।' यह स्थिति आंदोलन की तीव्रता और छात्रों की बेचैनी दोनों को उजागर करती है।
छात्र नेता रवींद्र कुमार पासवान का बयान
छात्र नेता रवींद्र कुमार पासवान ने कहा, 'आज 21वाँ दिन है और यह अनिश्चितकालीन विरोध प्रदर्शन है — यह तब तक जारी रहेगा जब तक माँगें पूरी न हों।' उन्होंने बताया कि 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर छात्र एक भव्य तिरंगा यात्रा निकालेंगे, जो सरकार को यह संदेश देगी कि आंदोलनकारियों में राष्ट्रप्रेम और देशभक्ति की भावना कूट-कूटकर भरी है।
मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की के बयान पर विवाद
झारखंड सरकार की मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की द्वारा छात्र प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों को 'छात्र नहीं' बताने पर पासवान ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, 'मंत्री जी ने दो ऐसे बयान दिए हैं जो एक युवा और शिक्षित मंत्री को शोभा नहीं देते। बिना जांचे-परखे ऐसे बयान देकर वे जानबूझकर या अनजाने में यह दिखा रही हैं कि वे अपने पद को गंभीरता से नहीं ले रहीं।' एक अन्य प्रदर्शनकारी ने इसे दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए नीट आंदोलन से जोड़ते हुए कहा कि वहाँ भी छात्रों के साथ उनके अभिभावक नहीं थे, फिर भी उन्हें छात्र माना गया।
आगे क्या होगा
यह आंदोलन ऐसे समय में और तीखा हो रहा है जब 15 अगस्त का स्वतंत्रता दिवस निकट है। छात्रों की तिरंगा यात्रा की योजना राज्य सरकार पर राजनीतिक और नैतिक दबाव दोनों बढ़ाएगी। गौरतलब है कि जेपीएससी-जेएसएससी परीक्षा विवाद झारखंड में युवाओं के रोजगार संकट का प्रतीक बन चुका है और यदि सरकार शीघ्र ठोस कदम नहीं उठाती, तो आंदोलन का दायरा राज्य की सीमाओं से बाहर निकल सकता है।