9 अगस्त 2026
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जेपीएससी-जेएसएससी अनियमितता: जयराम महतो का निर्जला अनशन, छात्र बोले — 'यह सरकार तानाशाह हो गई है'

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जेपीएससी-जेएसएससी अनियमितता: जयराम महतो का निर्जला अनशन, छात्र बोले — 'यह सरकार तानाशाह हो गई है'

सारांश

झारखंड में जेपीएससी-जेएसएससी भर्ती घोटाले के खिलाफ 16 दिनों से जारी छात्र भूख हड़ताल को अब विधायक स्तर का समर्थन मिल गया है। जेएलकेएम विधायक जयराम महतो के निर्जला अनशन और छात्रों के 'तानाशाह सरकार' वाले बयान ने इस आंदोलन को नई राजनीतिक धार दे दी है।

मुख्य बातें

जेएलकेएम विधायक जयराम महतो ने 9 अगस्त को रांची के पुराने विधानसभा परिसर में एक दिन का निर्जला अनशन रखा।
छात्र 16 दिनों से जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में जेपीएससी और जेएसएससी भर्ती अनियमितताओं के खिलाफ भूख हड़ताल पर हैं।
आंदोलनकारी छात्र निशांत यादव ने राज्य सरकार को 'अड़ियल और तानाशाह' बताया।
निशांत ने सीजीएल, जेपीएससी, पीजीटी और जेईटी सहित कई परीक्षाओं में गड़बड़ी का आरोप लगाया।
भूख हड़ताल पर बैठे कई छात्रों की तबीयत बिगड़ने की खबरें सामने आई हैं।

झारखंड में जेपीएससी और जेएसएससी भर्ती परीक्षाओं में पेपर लीक और धांधली के आरोपों को लेकर चल रहे छात्र आंदोलन ने 9 अगस्त को और व्यापक रूप ले लिया, जब जेएलकेएम विधायक जयराम महतो ने रांची के पुराने विधानसभा परिसर में एक दिन का निर्जला अनशन रखा। यह उपवास उन छात्रों के समर्थन में था जो 16 दिनों से जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में भूख हड़ताल पर डटे हैं और जिनकी तबीयत अब बिगड़ने लगी है।

विधायक का अनशन और सरकार पर हमला

जयराम महतो ने बताया कि वे सुबह 6 बजे से अनशन पर बैठे थे। उन्होंने कहा, 'जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में विरोध को मजबूत करने के लिए, मैंने अपनी तरफ से एक दिन का निर्जला अनशन रखा है।' महतो ने राज्य सरकार पर सीधा निशाना साधते हुए कहा कि सत्ता में रहने के बावजूद सरकार तब तक बात करने नहीं आती जब तक विरोध और तेज न हो जाए और छात्र धरने व भूख हड़ताल पर न बैठें।

आंदोलनकारी छात्रों की आवाज़

आंदोलन में शामिल छात्र निशांत यादव ने राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा, 'यह सरकार अड़ियल है और तानाशाह भी हो गई है, इसलिए इसे कोई फर्क नहीं पड़ता। इसे जगाने के लिए, थोड़ा झकझोरने के लिए हमें कुछ करना होगा और हम कर रहे हैं। हम सफल भी होंगे।' निशांत ने खुद को भी पीड़ित बताया — उन्होंने कहा कि उन्होंने सीजीएल, जेपीएससी, पीजीटी और जेईटी की परीक्षाएं दी हैं और सभी में गड़बड़ी हुई है।

मुख्यमंत्री पर सीधा आरोप

निशांत ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के उस बयान का भी हवाला दिया जिसमें उन्होंने कथित तौर पर कहा था, 'मेरा दिल चीरकर देखो कि हम कितने सही हैं।' आंदोलनकारी छात्रों का कहना है कि इस तरह के बयानों से स्पष्ट होता है कि सरकार उनकी माँगों को गंभीरता से नहीं ले रही।

आंदोलन की पृष्ठभूमि

यह आंदोलन जेपीएससी और जेएसएससी भर्तियों में पेपर लीक, धांधली और अनियमितताओं के आरोपों के खिलाफ शुरू हुआ था। गौरतलब है कि झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ी के आरोप नए नहीं हैं — राज्य में पहले भी इस तरह के विवाद सामने आ चुके हैं। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य में रोज़गार की माँग को लेकर युवाओं में असंतोष बढ़ रहा है।

आगे क्या होगा

भूख हड़ताल पर बैठे कई छात्रों की तबीयत बिगड़ने की खबरें आ रही हैं। यदि राज्य सरकार जल्द संवाद की पहल नहीं करती, तो आंदोलन के और उग्र होने की आशंका है। विपक्षी दलों और अब विधायकों के समर्थन से यह आंदोलन राजनीतिक दबाव का रूप लेता जा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन 16 दिनों की भूख हड़ताल और अब एक विधायक का अनशन यह बताता है कि राज्य सरकार की 'प्रतीक्षा करो और देखो' की रणनीति उलटी पड़ रही है। हेमंत सोरेन सरकार के लिए यह दोहरी चुनौती है — एक तरफ छात्रों का बढ़ता आक्रोश, दूसरी तरफ विपक्ष को मिलता राजनीतिक मौका। जब तक सरकार ठोस जाँच और पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया का आश्वासन नहीं देती, यह आंदोलन और बड़े राजनीतिक संकट में बदल सकता है।
RashtraPress
9 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

झारखंड छात्र आंदोलन किस मुद्दे पर है?
यह आंदोलन जेपीएससी और जेएसएससी भर्ती परीक्षाओं में पेपर लीक, धांधली और अनियमितताओं के आरोपों के खिलाफ है। छात्र 16 दिनों से रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में भूख हड़ताल पर बैठे हैं।
जयराम महतो ने अनशन क्यों रखा?
जेएलकेएम विधायक जयराम महतो ने भूख हड़ताल पर बैठे छात्रों के समर्थन में 9 अगस्त को पुराने विधानसभा परिसर में एक दिन का निर्जला अनशन रखा। उन्होंने सुबह 6 बजे से अनशन शुरू किया और राज्य सरकार पर छात्रों की अनदेखी का आरोप लगाया।
छात्र निशांत यादव ने क्या आरोप लगाए?
आंदोलनकारी छात्र निशांत यादव ने राज्य सरकार को 'अड़ियल और तानाशाह' बताया। उन्होंने कहा कि उन्होंने खुद सीजीएल, जेपीएससी, पीजीटी और जेईटी परीक्षाएं दी हैं और सभी में गड़बड़ी हुई है।
भूख हड़ताल पर बैठे छात्रों की स्थिति क्या है?
16 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे कई छात्रों की तबीयत बिगड़ने लगी है। अभी तक राज्य सरकार की ओर से कोई ठोस वार्ता की पहल नहीं हुई है।
हेमंत सोरेन सरकार का इस आंदोलन पर क्या रुख है?
आंदोलनकारी छात्रों के अनुसार मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कथित तौर पर कहा था कि 'मेरा दिल चीरकर देखो कि हम कितने सही हैं।' सरकार की ओर से अब तक कोई औपचारिक वार्ता या जाँच की घोषणा नहीं की गई है।
राष्ट्र प्रेस
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