जेपीएससी-जेएसएससी अनियमितता: जयराम महतो का निर्जला अनशन, छात्र बोले — 'यह सरकार तानाशाह हो गई है'
सारांश
मुख्य बातें
झारखंड में जेपीएससी और जेएसएससी भर्ती परीक्षाओं में पेपर लीक और धांधली के आरोपों को लेकर चल रहे छात्र आंदोलन ने 9 अगस्त को और व्यापक रूप ले लिया, जब जेएलकेएम विधायक जयराम महतो ने रांची के पुराने विधानसभा परिसर में एक दिन का निर्जला अनशन रखा। यह उपवास उन छात्रों के समर्थन में था जो 16 दिनों से जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में भूख हड़ताल पर डटे हैं और जिनकी तबीयत अब बिगड़ने लगी है।
विधायक का अनशन और सरकार पर हमला
जयराम महतो ने बताया कि वे सुबह 6 बजे से अनशन पर बैठे थे। उन्होंने कहा, 'जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में विरोध को मजबूत करने के लिए, मैंने अपनी तरफ से एक दिन का निर्जला अनशन रखा है।' महतो ने राज्य सरकार पर सीधा निशाना साधते हुए कहा कि सत्ता में रहने के बावजूद सरकार तब तक बात करने नहीं आती जब तक विरोध और तेज न हो जाए और छात्र धरने व भूख हड़ताल पर न बैठें।
आंदोलनकारी छात्रों की आवाज़
आंदोलन में शामिल छात्र निशांत यादव ने राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा, 'यह सरकार अड़ियल है और तानाशाह भी हो गई है, इसलिए इसे कोई फर्क नहीं पड़ता। इसे जगाने के लिए, थोड़ा झकझोरने के लिए हमें कुछ करना होगा और हम कर रहे हैं। हम सफल भी होंगे।' निशांत ने खुद को भी पीड़ित बताया — उन्होंने कहा कि उन्होंने सीजीएल, जेपीएससी, पीजीटी और जेईटी की परीक्षाएं दी हैं और सभी में गड़बड़ी हुई है।
मुख्यमंत्री पर सीधा आरोप
निशांत ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के उस बयान का भी हवाला दिया जिसमें उन्होंने कथित तौर पर कहा था, 'मेरा दिल चीरकर देखो कि हम कितने सही हैं।' आंदोलनकारी छात्रों का कहना है कि इस तरह के बयानों से स्पष्ट होता है कि सरकार उनकी माँगों को गंभीरता से नहीं ले रही।
आंदोलन की पृष्ठभूमि
यह आंदोलन जेपीएससी और जेएसएससी भर्तियों में पेपर लीक, धांधली और अनियमितताओं के आरोपों के खिलाफ शुरू हुआ था। गौरतलब है कि झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ी के आरोप नए नहीं हैं — राज्य में पहले भी इस तरह के विवाद सामने आ चुके हैं। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य में रोज़गार की माँग को लेकर युवाओं में असंतोष बढ़ रहा है।
आगे क्या होगा
भूख हड़ताल पर बैठे कई छात्रों की तबीयत बिगड़ने की खबरें आ रही हैं। यदि राज्य सरकार जल्द संवाद की पहल नहीं करती, तो आंदोलन के और उग्र होने की आशंका है। विपक्षी दलों और अब विधायकों के समर्थन से यह आंदोलन राजनीतिक दबाव का रूप लेता जा रहा है।