7 अगस्त 2026
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झारखंड JPSC-JSSC पेपर लीक विरोध: 14वें दिन भी धरना जारी, भूख हड़ताल पर छात्र नेता की हालत नाजुक

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झारखंड JPSC-JSSC पेपर लीक विरोध: 14वें दिन भी धरना जारी, भूख हड़ताल पर छात्र नेता की हालत नाजुक

सारांश

झारखंड में JPSC-JSSC पेपर लीक के खिलाफ छात्रों का आंदोलन 14वें दिन भी रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में जारी है। भूख हड़ताल पर बैठे छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो की हालत नाजुक बताई जा रही है, जबकि सरकार की ओर से अभी तक कोई ठोस संपर्क नहीं हुआ है।

मुख्य बातें

झारखंड में JPSC और JSSC पेपर लीक के विरोध में छात्रों का आंदोलन 7 अगस्त 2026 को 14वें दिन में पहुँचा।
रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में सैकड़ों अभ्यर्थी अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हैं।
छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो की स्वास्थ्य स्थिति गंभीर; प्रदर्शनकारी प्रेम पाँच दिनों से भूख हड़ताल पर।
प्रमुख माँग: 14वीं जेपीएससी , एफआरओ और अन्य विवादित परीक्षाएँ तत्काल रद्द की जाएँ।
सरकार की ओर से अभी तक कोई सरकारी अधिकारी छात्र नेताओं से नहीं मिला; केवल बातचीत का अनौपचारिक भरोसा दिया गया।
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने आंदोलन का समर्थन किया।

झारखंड में जेपीएससी (JPSC) और जेएसएससी (JSSC) भर्ती परीक्षाओं में कथित धांधली और पेपर लीक के विरोध में छात्रों का आंदोलन 7 अगस्त 2026 को अपने 14वें दिन में प्रवेश कर गया। रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में सैकड़ों अभ्यर्थी अनिश्चितकालीन धरने पर डटे हैं, और कई प्रदर्शनकारी भूख हड़ताल पर बैठे हैं — जिनमें से एक छात्र नेता की स्वास्थ्य स्थिति गंभीर बताई जा रही है।

आंदोलन की पृष्ठभूमि

छात्रों का आरोप है कि झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं में धांधली एक आम चलन बन चुकी है। उनके अनुसार, संपन्न परिवारों के अभ्यर्थियों को परीक्षा से पहले ही प्रश्नपत्र उपलब्ध करा दिए जाते हैं, जबकि मेहनती और आर्थिक रूप से कमजोर छात्र सड़कों पर उतरने को मजबूर हैं। प्रदर्शनकारियों की प्रमुख माँग है कि 14वीं जेपीएससी, एफआरओ (FRO) और अन्य विवादित परीक्षाएँ तत्काल रद्द की जाएँ।

छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो के बयान

आंदोलन का नेतृत्व कर रहे झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा के प्रमुख छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने कहा कि सरकार की ओर से अभी तक कोई ठोस पहल नहीं हुई है। उन्होंने कहा, 'अभी तक न तो कोई समय, न तारीख और न ही कोई पक्की जानकारी मिली है। हमें सिर्फ बातचीत का भरोसा दिया जा रहा है जैसा कि हमें टीम से पता चल रहा है। अभी तक किसी सरकारी अधिकारी ने मुझसे संपर्क नहीं किया है।'

महतो ने यह भी कहा कि जाँच में देरी के पीछे राजनीतिक कारण हो सकते हैं। उनके शब्दों में, 'हमें लगता है कि अगर जाँच होती है तो उन लोगों से जुड़े कई बड़े चेहरों की असलियत भी सामने आएगी और उनकी छवि खराब होगी। इसी बात का डर है कि अगर कड़ाई से जाँच कराएंगे तो वो भी फंस जाएंगे।'

माँगों को दो श्रेणियों में बाँटते हुए महतो ने स्पष्ट किया, 'एक माँग कम समय में पूरी होने वाली है और दूसरी में ज़्यादा समय लगेगा। हमारी कम समय वाली माँगें पूरी होने के बाद ही हम अपनी भूख हड़ताल खत्म करेंगे। जिन परीक्षाओं पर विवाद है, उन्हें रद्द किया जाना चाहिए।'

राजनीतिक समर्थन और प्रतिक्रिया

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी द्वारा इस आंदोलन का समर्थन किए जाने पर देवेंद्र महतो ने कहा, 'सभी को यह समर्थन देना चाहिए क्योंकि यह परेशान छात्रों का विरोध प्रदर्शन है। आज सभी पार्टियों को — चाहे वह भारतीय जनता पार्टी (BJP) हो, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) हो, झारखंड मुक्ति मोर्चा हो या कोई और पार्टी — उनका समर्थन करना चाहिए। छात्र सभी के होते हैं। वे सभी के घरों से आते हैं।'

भूख हड़ताली छात्रों की हालत

प्रदर्शनकारी छात्र प्रेम ने बताया कि वे पाँच दिनों से भूख हड़ताल पर हैं। उन्होंने कहा, 'दूसरी बात हमारे छात्र नेता देवेंद्र बाबू की हालत बहुत खराब हो गई है और उनकी स्थिति बहुत नाजुक है। जब तक हमारी माँगें पूरी नहीं हो जातीं, हम अपनी भूख हड़ताल जारी रखेंगे।'

प्रेम ने आगे कहा, 'हमारा राज्य बहुत मुश्किलों का सामना कर रहा है और खतरे में है। यहाँ के बच्चों की नौकरियाँ बेच दी जा रही हैं। होटल के बंद कमरों में डील हो रही है। ऐसे में गरीब के बच्चे कहाँ जाएंगे, जिनके पास इतना पैसा नहीं है। इससे अमीर और अमीर हो रहे हैं और गरीब, गरीब बनकर रह गया है। यह आज़ाद भारत के लिए सबसे खराब समय है।'

आगे क्या होगा

यह ऐसे समय में आया है जब झारखंड में सरकारी भर्ती प्रक्रिया पहले से ही विवादों में घिरी रही है। गौरतलब है कि राज्य में पेपर लीक की यह कोई पहली घटना नहीं है — आलोचकों का कहना है कि प्रणालीगत सुधार के बिना महज़ परीक्षाएँ रद्द करना स्थायी समाधान नहीं होगा। आंदोलन के नेताओं ने स्पष्ट किया है कि जब तक सरकार की ओर से समयबद्ध और लिखित आश्वासन नहीं मिलता, धरना जारी रहेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

राज्य की भर्ती व्यवस्था में राजनीतिक संरक्षण की गहरी जड़ों की ओर इशारा करता है। सरकार का चौदह दिनों तक कोई ठोस संपर्क न करना — जबकि भूख हड़ताली छात्रों की हालत बिगड़ रही है — प्रशासनिक संवेदनहीनता का स्पष्ट संकेत है। असली सवाल यह है कि क्या परीक्षाएँ रद्द करना काफी है, या इस बार भर्ती प्रक्रिया में संरचनात्मक पारदर्शिता सुनिश्चित करने की राजनीतिक इच्छाशक्ति भी दिखेगी।
RashtraPress
7 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

झारखंड में JPSC-JSSC पेपर लीक विरोध क्या है?
यह झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की भर्ती परीक्षाओं में कथित धांधली और पेपर लीक के खिलाफ छात्रों का आंदोलन है। 7 अगस्त 2026 को यह आंदोलन अपने 14वें दिन में था, जब रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में सैकड़ों अभ्यर्थी अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे थे।
छात्रों की प्रमुख माँगें क्या हैं?
छात्रों की मुख्य माँग है कि 14वीं जेपीएससी, एफआरओ (FRO) और अन्य विवादित परीक्षाएँ तत्काल रद्द की जाएँ। इसके अलावा वे चाहते हैं कि समयबद्ध माँगों को पूरा करने की लिखित और स्पष्ट समयसीमा सरकार द्वारा घोषित की जाए।
भूख हड़ताल पर बैठे छात्रों की स्थिति कैसी है?
छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो की स्वास्थ्य स्थिति गंभीर बताई जा रही है। प्रदर्शनकारी छात्र प्रेम के अनुसार वे स्वयं पाँच दिनों से भूख हड़ताल पर हैं और जब तक माँगें पूरी नहीं होतीं, हड़ताल जारी रहेगी।
सरकार ने अब तक क्या कदम उठाए हैं?
छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो के अनुसार, आंदोलन के 14 दिन बाद भी किसी सरकारी अधिकारी ने उनसे सीधा संपर्क नहीं किया है। उन्हें केवल अनौपचारिक रूप से बातचीत का भरोसा दिया जा रहा है, लेकिन कोई तिथि या ठोस आश्वासन नहीं मिला है।
इस आंदोलन को राजनीतिक समर्थन किससे मिला है?
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने JPSC-JSSC अभ्यर्थियों के प्रदर्शन का समर्थन किया है। छात्र नेता देवेंद्र महतो ने कहा कि BJP, कांग्रेस, झारखंड मुक्ति मोर्चा सहित सभी दलों को इस आंदोलन का समर्थन करना चाहिए क्योंकि यह किसी एक वर्ग का नहीं, बल्कि सभी घरों के बच्चों का संघर्ष है।
राष्ट्र प्रेस
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