चुनाव आयोग पर विपक्ष के आरोपों पर भाजपा नेता राम कदम का पलटवार: 'सबूत दो, तब बोलो'
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र से भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेता राम कदम ने 26 सितंबर 2026 को मुंबई में विपक्ष द्वारा चुनाव आयोग (ECI) और विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) पर लगाए जा रहे आरोपों को निराधार बताते हुए कड़ा जवाब दिया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि संवैधानिक संस्था पर सवाल उठाने से पहले ठोस प्रमाण प्रस्तुत करना अनिवार्य है।
चुनाव आयोग पर विपक्ष के आरोप और भाजपा का जवाब
राम कदम ने कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं को यह समझना चाहिए कि चुनाव आयोग एक संवैधानिक संस्था है, न कि कोई राजनीतिक संगठन। उन्होंने कहा, 'लोकतंत्र में सवाल पूछने और चिंताएं जाहिर करने का अधिकार सभी को है, लेकिन ऐसा करते समय सबूत और प्रमाण भी देने चाहिए।' उनके अनुसार, बिना दस्तावेज़ के आरोप लगाना बेबुनियाद है और इससे संवैधानिक संस्था की विश्वसनीयता पर अनावश्यक संदेह पैदा होता है।
SIR प्रक्रिया पर राज ठाकरे के बयान का जवाब
महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) प्रमुख राज ठाकरे द्वारा SIR को लेकर दिए गए बयान पर कदम ने कहा कि फर्जी मतदाताओं के नाम हटाने की प्रक्रिया पर आपत्ति करने का कोई औचित्य नहीं है। उन्होंने तर्क दिया कि यदि किसी व्यक्ति का नाम मतदाता सूची में एक से अधिक बार दर्ज है, या किसी मृत व्यक्ति का नाम सूची में शामिल है, तो उसे हटाना लोकतांत्रिक प्रक्रिया की शुद्धता के लिए जरूरी है। गौरतलब है कि SIR प्रक्रिया को लेकर महाराष्ट्र में कई विपक्षी दलों ने हाल के हफ्तों में आवाज़ उठाई है।
महाराष्ट्र में सूखे की स्थिति और सरकार की पहल
राम कदम ने महाराष्ट्र में किसानों की बिगड़ती स्थिति पर भी चर्चा की। उन्होंने बताया कि राज्य की कुल 358 तहसीलों में से लगभग 265 तहसीलों में सूखे जैसी स्थिति है और राज्य का करीब 75 प्रतिशत हिस्सा इससे प्रभावित है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कई प्रभावित इलाकों का दौरा कर किसानों से सीधी बात की और अधिकारियों को नुकसान का सर्वे करने के निर्देश दिए। कदम के अनुसार किसानों को भरोसा है कि सरकार उनके साथ मजबूती से खड़ी है।
IIT बॉम्बे छात्र मृत्यु मामला: राजनीतिकरण पर चिंता
IIT बॉम्बे में एक छात्र की मृत्यु के मामले पर हो रहे आरोप-प्रत्यारोप पर कदम ने कहा कि इस दुखद घड़ी में सभी राजनीतिक दलों को परिवार के साथ खड़ा होना चाहिए और मामले को राजनीतिक रंग देने से बचना चाहिए। उन्होंने कहा कि घटना की जांच संबंधित एजेंसी द्वारा की जा रही है और जांच पूरी होने के बाद ही परिस्थितियाँ स्पष्ट हो सकेंगी। उन्होंने जोड़ा कि परिवार को न्याय दिलाना सरकार की प्राथमिकता है, लेकिन कुछ दल इसे राजनीतिक रंग देने की कोशिश कर रहे हैं।
आगे क्या
SIR प्रक्रिया और चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर महाराष्ट्र में राजनीतिक बहस जारी रहने के संकेत हैं। विपक्ष के आरोपों और सत्ता पक्ष के जवाबों के बीच यह विवाद आने वाले दिनों में और तीखा हो सकता है, खासकर तब जब SIR की अंतिम रिपोर्ट सामने आएगी।