राजस्थान विधानसभा मानसून सत्र 20 अगस्त से: अवधि पर भाजपा-कांग्रेस में तकरार, कांग्रेस ने माँगे 20-25 दिन
सारांश
मुख्य बातें
राजस्थान विधानसभा का मानसून सत्र 20 अगस्त 2026 से शुरू होने जा रहा है, लेकिन सत्र की शुरुआत से पहले ही जयपुर में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) और विपक्षी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) सदन की अवधि और जनहित के मुद्दों पर सीधे आमने-सामने आ गई हैं। कांग्रेस जहाँ 20 से 25 दिन तक सदन चलाने की माँग पर अड़ी है, वहीं सरकार के संकेत हैं कि सत्र 25 अगस्त तक ही सीमित रह सकता है।
सर्वदलीय बैठक में उभरे मतभेद
विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी की अध्यक्षता में 19 अगस्त को हुई सर्वदलीय बैठक में सत्र की अवधि और उठाए जाने वाले मुद्दों पर दोनों पक्षों के बीच स्पष्ट मतभेद सामने आए। बैठक में सदन के संभावित कामकाज पर चर्चा हुई, परंतु अवधि को लेकर कोई सहमति नहीं बन सकी। सत्र की अंतिम अवधि का निर्णय विधानसभा अध्यक्ष और सरकार मिलकर करेंगे।
नेता प्रतिपक्ष की माँगें और आरोप
नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने माँग की कि सदन को 20 से 25 दिनों तक चलाया जाए, ताकि छात्रों, युवाओं, महिलाओं, कर्मचारियों, मज़दूरों, दलितों और स्कूलों की स्थिति से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हो सके। जूली ने आरोप लगाया कि BJP सरकार आम जनता से जुड़े सवालों से बचना चाहती है और मंत्री विपक्ष के सवालों का जवाब देने में असमर्थ हैं, इसीलिए लंबा सत्र नहीं चाहती।
जूली ने यह भी आशंका जताई कि सरकार समान नागरिक संहिता (UCC) से जुड़ा विधेयक सदन में लाकर बाद में विपक्ष पर इसे रोकने का आरोप लगा सकती है और सत्र जल्द समाप्त कर सकती है। उन्होंने आगामी चुनावों का हवाला देकर सत्र की अवधि घटाने की किसी भी कोशिश का विरोध किया।
सरकार का पलटवार
सरकार के मुख्य सचेतक जोगेश्वर गर्ग ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि सरकार हर मुद्दे पर चर्चा के लिए पूरी तरह तैयार है। गर्ग ने संकेत दिया कि सत्र 25 अगस्त तक चल सकता है और आगामी चुनावों तथा ऐसे सत्रों की सामान्य अवधि का हवाला देते हुए कहा कि सदन की कार्यवाही बहुत लंबी चलने की संभावना नहीं है। उन्होंने कांग्रेस पर पलटवार करते हुए कहा कि विपक्ष को सरकार पर आरोप लगाने से पहले अपने कार्यकाल का रिकॉर्ड देखना चाहिए।
सत्र में संभावित विवादास्पद मुद्दे
राम मंदिर चंदे में कथित गबन का मुद्दा भी विधानसभा में हंगामे का कारण बन सकता है। विपक्ष ने इस मामले पर सदन में चर्चा की माँग की है, जिस पर गर्ग ने कहा कि सरकार इस विषय पर भी चर्चा के लिए तैयार है। इसके अलावा UCC प्रस्ताव, बेरोज़गारी, महिला सुरक्षा और दलित उत्पीड़न जैसे मुद्दे भी सत्र में राजनीतिक टकराव को बढ़ा सकते हैं।
आगे क्या होगा
यह ऐसे समय में आया है जब राजस्थान में आगामी चुनावी माहौल के बीच दोनों पक्ष जनता के सामने अपनी-अपनी छवि मज़बूत करने में जुटे हैं। गौरतलब है कि सत्र की अवधि ही सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच पहली बड़ी राजनीतिक लड़ाई का मुद्दा बन चुकी है। 20 अगस्त से शुरू होने वाला मानसून सत्र हंगामेदार रहने के पूरे आसार हैं, और सत्र की दिशा तय करेगी कि राजस्थान की राजनीति में अगले कुछ महीने किस ओर जाती है।