यूपी विधानसभा मानसून सत्र 3 अगस्त से: विपक्ष ने माँगा विस्तार, स्पीकर महाना बोले — समय की कोई कमी नहीं
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश विधानसभा का मानसून सत्र 3 अगस्त 2026 से प्रारंभ होने जा रहा है, लेकिन सत्र की शुरुआत से पहले ही विपक्षी दलों ने इसकी अवधि बढ़ाने की माँग उठाकर सियासी माहौल गर्म कर दिया है। विपक्ष का तर्क है कि 25 करोड़ की आबादी वाले प्रदेश में बिजली संकट, बेरोज़गारी, स्कूलों के बंद होने और किसानों की समस्याओं जैसे गंभीर मुद्दों पर महज कुछ दिनों में सार्थक चर्चा संभव नहीं है। विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने भरोसा दिलाया कि नियमों के दायरे में सभी दलों को अपनी बात रखने का पर्याप्त समय मिलेगा।
सर्वदलीय बैठक में उठी अवधि विस्तार की माँग
सत्र से पहले हुई सर्वदलीय बैठक और कार्यमंत्रणा समिति की बैठक में विपक्ष ने एकजुट होकर सत्र की अल्प अवधि पर आपत्ति जताई। कांग्रेस विधानमंडल दल की नेता आराधना मिश्रा ने कहा, 'आज मानसून सत्र के पहले सर्वदलीय बैठक हुई, कार्यमंत्रणा की बैठक हुई और उस बैठक में हमारे नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस विधानमंडल दल की ओर से सबसे पहले तो हमने सरकार के सामने ये प्रस्ताव रखा कि ये बहुत ही कम समय अवधि की सदन में होने जा रही है। हम सब जानते हैं उत्तर प्रदेश में आज ऐसे कितने गंभीर मुद्दे हैं, जिसके ऊपर चर्चा होनी आवश्यक है।'
विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय ने कहा कि विपक्ष सदन में चर्चा चाहता है, परंतु सरकार उनके सुझावों पर सकारात्मक रुख नहीं अपनाती, जिससे कई बार व्यवधान की स्थिति बनती है। उन्होंने बिजली संकट, बेरोज़गारी, स्कूलों के बंद होने और किसानों के मुद्दों को प्राथमिकता सूची में रखा।
स्पीकर महाना का आश्वासन
विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने स्पष्ट किया, 'विपक्ष जिस भी विषय पर नियमों के तहत नोटिस देगा, उसे अपनी बात रखने का पूरा समय दिया जाएगा। किसी के समय में कटौती नहीं की जाएगी। विपक्ष का अपना एजेंडा, विचार और नीति है, उस पर उन्हें पूरी स्वतंत्रता से बोलने का अवसर मिलेगा।' उन्होंने यह भी कहा कि सरकार का दायित्व है कि वह विपक्ष द्वारा उठाए गए मुद्दों का जवाब दे, और विपक्ष को भी लोकतांत्रिक मूल्यों एवं सदन की मर्यादा का पालन करना चाहिए।
सरकार की तैयारी और पलटवार
उत्तर प्रदेश सरकार में राज्य मंत्री कपिल देव अग्रवाल ने कहा कि सरकार मानसून सत्र के लिए पूरी तरह तैयार है और हर सवाल का जवाब देने में सक्षम है। उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि यदि विपक्ष हंगामा करता है, बहिष्कार करता है या बार-बार व्यवधान डालता है, तो इसका अर्थ है कि उसके पास चर्चा के लिए ठोस मुद्दे नहीं हैं।
सपा का एजेंडा: राम मंदिर चढ़ावा मामला भी निशाने पर
समाजवादी पार्टी के विधायक रविदास मल्होत्रा ने माँग की कि मानसून सत्र कम से कम 10 दिनों का होना चाहिए, क्योंकि 25 करोड़ की आबादी वाले प्रदेश की समस्याओं पर तीन दिन की चर्चा अपर्याप्त है। सपा ने यह भी संकेत दिया कि वह राम मंदिर चढ़ावा चोरी से जुड़े मामले को सदन में उठाएगी और उच्च न्यायालय के किसी वर्तमान या सेवानिवृत्त न्यायाधीश से जाँच कराने की माँग करेगी।
सपा विधायकों मोहम्मद फहीम और तूफानी सरोज ने बताया कि पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के नेतृत्व में एक बैठक होगी, जिसमें मानसून सत्र के दौरान उठाए जाने वाले प्रमुख मुद्दों की रणनीति तय की जाएगी। यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियाँ पृष्ठभूमि में तेज हो रही हैं, और हर सत्र राजनीतिक रूप से अधिक संवेदनशील होता जा रहा है।