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यूपी विधानसभा मानसून सत्र 3 अगस्त से: विपक्ष ने माँगा विस्तार, स्पीकर महाना बोले — समय की कोई कमी नहीं

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यूपी विधानसभा मानसून सत्र 3 अगस्त से: विपक्ष ने माँगा विस्तार, स्पीकर महाना बोले — समय की कोई कमी नहीं

सारांश

यूपी विधानसभा का मानसून सत्र 3 अगस्त से शुरू होने से पहले ही विपक्ष और सत्तापक्ष आमने-सामने हैं। सपा ने कम से कम 10 दिन के सत्र की माँग की है और राम मंदिर चढ़ावा मामले को भी उठाने का ऐलान किया है — 2027 चुनाव से पहले यह सत्र सियासी रूप से निर्णायक साबित हो सकता है।

मुख्य बातें

उत्तर प्रदेश विधानसभा का मानसून सत्र 3 अगस्त 2026 से प्रारंभ होगा।
विपक्ष ने माँग की कि सत्र कम से कम 10 दिनों का हो; सपा विधायक रविदास मल्होत्रा ने यह माँग उठाई।
विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने आश्वस्त किया कि नियमों के तहत नोटिस देने पर किसी के समय में कटौती नहीं होगी।
नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय ने बिजली संकट, बेरोज़गारी, स्कूल बंदी और किसान मुद्दों को प्राथमिकता में रखा।
सपा ने राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की उच्च न्यायालय के न्यायाधीश से जाँच की माँग का ऐलान किया।
राज्य मंत्री कपिल देव अग्रवाल ने कहा — सरकार हर सवाल का जवाब देने को तैयार है।

उत्तर प्रदेश विधानसभा का मानसून सत्र 3 अगस्त 2026 से प्रारंभ होने जा रहा है, लेकिन सत्र की शुरुआत से पहले ही विपक्षी दलों ने इसकी अवधि बढ़ाने की माँग उठाकर सियासी माहौल गर्म कर दिया है। विपक्ष का तर्क है कि 25 करोड़ की आबादी वाले प्रदेश में बिजली संकट, बेरोज़गारी, स्कूलों के बंद होने और किसानों की समस्याओं जैसे गंभीर मुद्दों पर महज कुछ दिनों में सार्थक चर्चा संभव नहीं है। विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने भरोसा दिलाया कि नियमों के दायरे में सभी दलों को अपनी बात रखने का पर्याप्त समय मिलेगा।

सर्वदलीय बैठक में उठी अवधि विस्तार की माँग

सत्र से पहले हुई सर्वदलीय बैठक और कार्यमंत्रणा समिति की बैठक में विपक्ष ने एकजुट होकर सत्र की अल्प अवधि पर आपत्ति जताई। कांग्रेस विधानमंडल दल की नेता आराधना मिश्रा ने कहा, 'आज मानसून सत्र के पहले सर्वदलीय बैठक हुई, कार्यमंत्रणा की बैठक हुई और उस बैठक में हमारे नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस विधानमंडल दल की ओर से सबसे पहले तो हमने सरकार के सामने ये प्रस्ताव रखा कि ये बहुत ही कम समय अवधि की सदन में होने जा रही है। हम सब जानते हैं उत्तर प्रदेश में आज ऐसे कितने गंभीर मुद्दे हैं, जिसके ऊपर चर्चा होनी आवश्यक है।'

विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय ने कहा कि विपक्ष सदन में चर्चा चाहता है, परंतु सरकार उनके सुझावों पर सकारात्मक रुख नहीं अपनाती, जिससे कई बार व्यवधान की स्थिति बनती है। उन्होंने बिजली संकट, बेरोज़गारी, स्कूलों के बंद होने और किसानों के मुद्दों को प्राथमिकता सूची में रखा।

स्पीकर महाना का आश्वासन

विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने स्पष्ट किया, 'विपक्ष जिस भी विषय पर नियमों के तहत नोटिस देगा, उसे अपनी बात रखने का पूरा समय दिया जाएगा। किसी के समय में कटौती नहीं की जाएगी। विपक्ष का अपना एजेंडा, विचार और नीति है, उस पर उन्हें पूरी स्वतंत्रता से बोलने का अवसर मिलेगा।' उन्होंने यह भी कहा कि सरकार का दायित्व है कि वह विपक्ष द्वारा उठाए गए मुद्दों का जवाब दे, और विपक्ष को भी लोकतांत्रिक मूल्यों एवं सदन की मर्यादा का पालन करना चाहिए।

सरकार की तैयारी और पलटवार

उत्तर प्रदेश सरकार में राज्य मंत्री कपिल देव अग्रवाल ने कहा कि सरकार मानसून सत्र के लिए पूरी तरह तैयार है और हर सवाल का जवाब देने में सक्षम है। उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि यदि विपक्ष हंगामा करता है, बहिष्कार करता है या बार-बार व्यवधान डालता है, तो इसका अर्थ है कि उसके पास चर्चा के लिए ठोस मुद्दे नहीं हैं।

सपा का एजेंडा: राम मंदिर चढ़ावा मामला भी निशाने पर

समाजवादी पार्टी के विधायक रविदास मल्होत्रा ने माँग की कि मानसून सत्र कम से कम 10 दिनों का होना चाहिए, क्योंकि 25 करोड़ की आबादी वाले प्रदेश की समस्याओं पर तीन दिन की चर्चा अपर्याप्त है। सपा ने यह भी संकेत दिया कि वह राम मंदिर चढ़ावा चोरी से जुड़े मामले को सदन में उठाएगी और उच्च न्यायालय के किसी वर्तमान या सेवानिवृत्त न्यायाधीश से जाँच कराने की माँग करेगी।

सपा विधायकों मोहम्मद फहीम और तूफानी सरोज ने बताया कि पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के नेतृत्व में एक बैठक होगी, जिसमें मानसून सत्र के दौरान उठाए जाने वाले प्रमुख मुद्दों की रणनीति तय की जाएगी। यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियाँ पृष्ठभूमि में तेज हो रही हैं, और हर सत्र राजनीतिक रूप से अधिक संवेदनशील होता जा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इस बार दाँव ऊँचे हैं क्योंकि 2027 के चुनाव नज़दीक हैं। असली सवाल यह है कि क्या सदन में चर्चा होगी या हंगामे की भेंट चढ़ेगी — और इसका उत्तर केवल विपक्ष नहीं, सत्तापक्ष के रवैये पर भी निर्भर करता है। सपा का राम मंदिर चढ़ावा मामले को सदन में उठाने का ऐलान संकेत देता है कि यह सत्र महज प्रशासनिक नहीं, बल्कि चुनावी कथा-निर्माण का मंच बनेगा। स्पीकर महाना का आश्वासन सराहनीय है, परंतु जब तक कार्यमंत्रणा समिति एजेंडे में पर्याप्त समय आवंटित नहीं करती, वादे और व्यवहार के बीच की खाई बनी रहेगी।
RashtraPress
2 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

यूपी विधानसभा का मानसून सत्र 2026 कब से शुरू हो रहा है?
उत्तर प्रदेश विधानसभा का मानसून सत्र 3 अगस्त 2026 से प्रारंभ होगा। सत्र की सटीक अवधि को लेकर विपक्ष और सत्तापक्ष के बीच मतभेद बने हुए हैं।
विपक्ष ने सत्र विस्तार की माँग क्यों की है?
विपक्ष का कहना है कि 25 करोड़ की आबादी वाले उत्तर प्रदेश में बिजली संकट, बेरोज़गारी, स्कूलों की बंदी और किसानों की समस्याओं जैसे गंभीर मुद्दों पर कुछ दिनों में पर्याप्त चर्चा संभव नहीं है। सपा विधायक रविदास मल्होत्रा ने माँग की कि सत्र कम से कम 10 दिनों का होना चाहिए।
स्पीकर सतीश महाना ने विपक्ष को क्या आश्वासन दिया?
विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने कहा कि नियमों के तहत नोटिस देने पर विपक्ष को अपनी बात रखने का पूरा समय मिलेगा और किसी के समय में कटौती नहीं की जाएगी। उन्होंने विपक्ष से लोकतांत्रिक मूल्यों और सदन की मर्यादा का पालन करने की भी अपेक्षा जताई।
सपा मानसून सत्र में कौन-से प्रमुख मुद्दे उठाएगी?
समाजवादी पार्टी बिजली संकट, बेरोज़गारी और किसान मुद्दों के साथ-साथ राम मंदिर चढ़ावा चोरी के मामले को भी सदन में उठाने की तैयारी में है। पार्टी इस मामले की जाँच उच्च न्यायालय के किसी वर्तमान या सेवानिवृत्त न्यायाधीश से कराने की माँग करेगी।
सरकार की ओर से मानसून सत्र पर क्या रुख है?
राज्य मंत्री कपिल देव अग्रवाल ने कहा कि सरकार मानसून सत्र के लिए पूरी तरह तैयार है और हर सवाल का जवाब देने को तैयार है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि विपक्ष हंगामा या बहिष्कार करता है तो इसका अर्थ है कि उसके पास ठोस मुद्दे नहीं हैं।
राष्ट्र प्रेस
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