भारत-इथियोपिया रक्षा सहयोग: प्रशिक्षण, उद्योग और UN शांति अभियानों पर नई दिल्ली में अहम बैठक
सारांश
मुख्य बातें
भारत और इथियोपिया ने 2 सितंबर को नई दिल्ली में द्विपक्षीय रक्षा सहयोग को नई ऊँचाई देने के लिए एक महत्वपूर्ण बैठक की, जिसमें रक्षा प्रशिक्षण, रक्षा उद्योग में साझेदारी और संयुक्त राष्ट्र शांति स्थापना अभियानों जैसे उभरते क्षेत्रों पर केंद्रित विचार-विमर्श हुआ। यह बैठक दोनों देशों के बीच बढ़ते रणनीतिक जुड़ाव की एक और कड़ी है।
बैठक का विवरण और प्रतिभागी
यह बैठक नई दिल्ली स्थित इथियोपिया दूतावास के प्रभारी (चार्ज डी'अफेयर्स) नेबियू टेडला और रक्षा मंत्रालय में संयुक्त सचिव अमिताभ प्रसाद के बीच आयोजित हुई। रक्षा मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी देते हुए बताया कि दोनों पक्षों ने भारत-इथियोपिया रक्षा संबंधों को सुदृढ़ करने के लिए नए अवसरों की पहचान की।
चर्चा के प्रमुख क्षेत्र
बैठक में तीन मुख्य क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया गया — रक्षा प्रशिक्षण, रक्षा उद्योग सहयोग और संयुक्त राष्ट्र शांति स्थापना अभियानों में संयुक्त भागीदारी। विशेषज्ञों के अनुसार, ये क्षेत्र भारत की 'अफ्रीका आउटरीच' नीति के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि भारत स्वयं संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों में शीर्ष सैन्य योगदानकर्ता देशों में शामिल रहा है।
द्विपक्षीय संबंधों की पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि पिछले वर्ष दिसंबर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दो दिवसीय इथियोपिया दौरे पर गए थे। इस दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री अबी अहमद अली से द्विपक्षीय वार्ता की, इथियोपिया की संसद के संयुक्त सत्र को संबोधित किया और अडवा संग्रहालय का दौरा किया। उल्लेखनीय है कि इस यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी को इथियोपिया के सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'ग्रेट ऑनर निशान ऑफ इथियोपिया' से भी सम्मानित किया गया था।
नेताओं के बीच हालिया संवाद
इससे पहले जून में प्रधानमंत्री मोदी ने इथियोपिया के प्रधानमंत्री अबी अहमद अली और उनकी प्रॉस्पेरिटी पार्टी को संसदीय चुनावों में निर्णायक जीत पर बधाई दी थी। मोदी ने एक्स पर लिखा था कि भारत इथियोपिया के साथ अपने 'ऐतिहासिक, बहुआयामी और गहरे संबंधों को बेहद महत्व देता है' तथा दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने की इच्छा जताई थी।
इसके जवाब में प्रधानमंत्री अबी अहमद अली ने मोदी को 'विश्वसनीय मित्र और बड़े भाई' बताते हुए कहा था कि दोनों देशों के संबंध 'इतिहास, साझेदारी और साझा आकांक्षाओं' पर आधारित हैं।
आगे की राह
यह बैठक ऐसे समय में आई है जब भारत अफ्रीकी देशों के साथ अपनी रक्षा कूटनीति को व्यापक आधार दे रहा है। रक्षा उद्योग सहयोग के क्षेत्र में भारत की बढ़ती निर्यात क्षमता — विशेषकर हल्के लड़ाकू विमान, बख्तरबंद वाहन और छोटे हथियारों के क्षेत्र में — इथियोपिया जैसे देशों के लिए आकर्षक विकल्प बन सकती है। आने वाले महीनों में दोनों देशों के बीच औपचारिक रक्षा समझौतों की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।