भारत-इंडोनेशिया 12वीं आर्मी स्टाफ वार्ता संपन्न, संयुक्त प्रशिक्षण और रक्षा सहयोग पर बनी सहमति
सारांश
मुख्य बातें
भारत और इंडोनेशिया के बीच 12वीं आर्मी-टू-आर्मी स्टाफ वार्ता 11 अगस्त से 13 अगस्त 2026 तक नई दिल्ली में आयोजित हुई, जिसमें दोनों देशों की सेनाओं के बीच द्विपक्षीय रक्षा सहयोग को विस्तार देने, संयुक्त सैन्य अभ्यासों के दायरे को बढ़ाने और सैन्य विशेषज्ञता के आदान-प्रदान को गहरा करने पर व्यापक सहमति बनी। भारतीय सेना के अनुसार, यह वार्ता दोनों देशों के बीच लंबे समय से जारी रणनीतिक साझेदारी को और सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
वार्ता का स्वरूप और प्रतिनिधिमंडल
तीन दिवसीय इस वार्ता में भारतीय सेना के प्रतिनिधिमंडल ने इंडोनेशियाई सेना टीएनआई-एडी (TNI-AD) के प्रतिनिधिमंडल के साथ विभिन्न रक्षा और सैन्य मुद्दों पर विस्तृत विचार-विमर्श किया। इंडोनेशियाई प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व ब्रिगेडियर जनरल आरी प्रसत्य, वीएसीओएस इंटेलिजेंस ने किया। भारत में आयोजित इस वार्ता ने दोनों सेनाओं को परिचालन अनुभव और सैन्य क्षमताओं की साझेदारी के लिए एक औपचारिक मंच प्रदान किया।
मुख्य चर्चा बिंदु
बैठक में संयुक्त सैन्य प्रशिक्षण और सैन्य अभ्यासों के विस्तार को प्राथमिकता क्षेत्र के रूप में रेखांकित किया गया। दोनों पक्षों ने एक-दूसरे की कार्यप्रणाली और सैन्य क्षमताओं को बेहतर ढंग से समझने तथा दोनों सेनाओं के बीच समन्वय और परस्पर समझ को मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई। नियमित संवाद के माध्यम से परिचालन अनुभव साझा करने पर भी विशेष जोर दिया गया।
रणनीतिक महत्व
गौरतलब है कि भारत और इंडोनेशिया दोनों हिंद-प्रशांत क्षेत्र में प्रमुख समुद्री शक्तियाँ हैं और क्षेत्रीय सुरक्षा एवं स्थिरता के साझा हितों को लेकर दोनों के बीच सहयोग पिछले एक दशक में उल्लेखनीय रूप से बढ़ा है। यह 12वीं स्टाफ वार्ता इस बात का प्रमाण है कि दोनों देशों के बीच सेना-स्तरीय संवाद अब एक नियमित और संस्थागत स्वरूप ले चुका है। दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय रक्षा सहयोग के नए क्षेत्रों की पहचान करने और मौजूदा सहयोग को आगे बढ़ाने की संभावनाएँ भी तलाशीं।
आगे की राह
दोनों देशों की सेनाओं ने भारत-इंडोनेशिया के बीच मजबूत रणनीतिक साझेदारी के प्रति अपनी प्रतिबद्धता पुनः व्यक्त की। वार्ता का समापन इस संकल्प के साथ हुआ कि क्षेत्रीय सुरक्षा के साझा हितों के अनुरूप सहयोग को और व्यापक बनाया जाएगा तथा भविष्य में इस तरह की वार्ताओं की निरंतरता बनाए रखी जाएगी।