सेंसेक्स 442 अंक टूटा, 77,708 पर बंद; मध्य पूर्व तनाव और महंगे कच्चे तेल से बाजार दबाव में
सारांश
मुख्य बातें
BSE सेंसेक्स सोमवार, 20 जुलाई को 442.93 अंक यानी 0.57 प्रतिशत की गिरावट के साथ 77,708.52 पर बंद हुआ, जबकि NSE निफ्टी 50 95.80 अंक यानी 0.39 प्रतिशत फिसलकर 24,238.50 पर आ गया। मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों के 85 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बने रहने ने निवेशकों की धारणा को कमज़ोर किया।
किन सेक्टरों पर सबसे ज़्यादा असर
बाजार में गिरावट का नेतृत्व वित्तीय शेयरों ने किया। निफ्टी प्राइवेट बैंक 2.27 प्रतिशत और निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज 1.22 प्रतिशत की गिरावट के साथ शीर्ष लूज़र रहे। इनके अलावा निफ्टी सर्विसेज, निफ्टी ऑटो, निफ्टी आईटी और निफ्टी रियल्टी भी लाल निशान में बंद हुए।
दूसरी ओर, निफ्टी पीएसयू बैंक, निफ्टी फार्मा, निफ्टी हेल्थकेयर, निफ्टी मीडिया, निफ्टी कमोडिटीज, निफ्टी एनर्जी, निफ्टी पीएसई, निफ्टी मेटल, निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और निफ्टी इन्फ्रा हरे निशान में बंद रहे, जो दर्शाता है कि गिरावट व्यापक नहीं, बल्कि चुनिंदा क्षेत्रों तक सीमित रही।
सेंसेक्स के गेनर और लूज़र
सेंसेक्स पैक में ट्रेंट, पावर ग्रिड, एनटीपीसी, भारती एयरटेल, SBI, अल्ट्राटेक सीमेंट, ICICI बैंक, HCL टेक, सनफार्मा, ITC, L&T, बजाज फाइनेंस, टेक महिंद्रा, अदाणी पोर्ट्स, टाइटन, टाटा स्टील, इटरनल, एशियन पेंट्स और बजाज फिनसर्व बढ़त में रहे।
वहीं, एक्सिस बैंक, HDFC बैंक, मारुति सुज़ुकी, कोटक महिंद्रा बैंक, इन्फोसिस, TCS, M&M, इंडिगो, BEL और HUL प्रमुख लूज़र रहे।
मिडकैप और स्मॉलकैप में खरीदारी
लार्जकैप की तुलना में मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में खरीदारी देखी गई। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 373.70 अंक यानी 0.60 प्रतिशत की बढ़त के साथ 62,801.75 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 100 30.15 अंक यानी 0.16 प्रतिशत की मज़बूती के साथ 19,326.45 पर रहा। यह संकेत देता है कि घरेलू निवेशक बड़े निजी बैंकों और आईटी दिग्गजों से हटकर छोटे शेयरों की ओर रुख कर रहे हैं।
तकनीकी विश्लेषण: अगले स्तर कहाँ
SBI सिक्योरिटीज के अनुसार, निफ्टी के लिए तत्काल प्रतिरोध स्तर 24,370–24,400 के जोन में है। यदि निफ्टी इस जोन के ऊपर टिकता है, तो यह अल्पावधि में 24,550 और उसके बाद 24,700 तक बढ़ सकता है। नीचे की ओर तत्काल सपोर्ट 24,130–24,100 के जोन में बताया गया है।
बाजार पर दबाव की वजह
विश्लेषकों के अनुसार, मध्य पूर्व में जारी तनाव के कारण कच्चा तेल लगातार 85 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बना हुआ है, जो भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए आयात बिल और चालू खाता घाटे पर दबाव बढ़ाता है। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता पहले से बनी हुई है। आने वाले सत्रों में मध्य पूर्व की स्थिति और कच्चे तेल की दिशा बाजार की चाल तय करने में अहम भूमिका निभाएगी।