12 अगस्त 2026
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कच्चे तेल की कीमतें 89.87 डॉलर पर, सेंसेक्स 273 अंक टूटा; भू-राजनीतिक तनाव से बाजार दबाव में

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कच्चे तेल की कीमतें 89.87 डॉलर पर, सेंसेक्स 273 अंक टूटा; भू-राजनीतिक तनाव से बाजार दबाव में

सारांश

कच्चे तेल का 89 डॉलर पार करना और होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर ईरान का कड़ा रुख — दो मोर्चों पर दबाव में भारतीय बाजार। सेंसेक्स 273 अंक तक टूटा, पर एसबीआई रिसर्च का 8% GDP अनुमान निवेशकों को थामे हुए है।

मुख्य बातें

बीएसई सेंसेक्स इंट्राडे में 273 अंक (0.34%) गिरकर 77,881 के निचले स्तर पर पहुँचा।
एनएसई निफ्टी 50 81 अंक (0.33%) टूटकर 24,390 के दिन के निचले स्तर पर रहा।
ब्रेंट क्रूड 1% बढ़कर 89.87 डॉलर प्रति बैरल ; WTI क्रूड 1.14% चढ़कर 84.14 डॉलर पर।
निफ्टी मेटल 0.86% ऊपर — दिन का सर्वश्रेष्ठ सेक्टर; निफ्टी FMCG 0.64% फिसला।
एसबीआई रिसर्च ने FY2026-27 के लिए भारत की GDP वृद्धि दर 8% रहने का अनुमान लगाया, जबकि RBI का अनुमान 6.7% है।
होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान का कड़ा रुख और अमेरिकी सेना की कार्रवाई से तेल आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता बढ़ी।

बीएसई सेंसेक्स बुधवार, 12 अगस्त को इंट्राडे कारोबार में 273 अंक यानी 0.34 प्रतिशत गिरकर 77,881 के निचले स्तर तक पहुँचा, जबकि एनएसई निफ्टी 50 81 अंक यानी 0.33 प्रतिशत टूटकर 24,390 पर आ गया। ब्रेंट क्रूड के 89.87 डॉलर प्रति बैरल पर पहुँचने और पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव गहराने से निवेशकों की धारणा कमज़ोर पड़ी।

बाजार का उतार-चढ़ाव: मुख्य घटनाक्रम

सेंसेक्स अपने पिछले बंद स्तर 78,154.25 से 0.13 प्रतिशत की मामूली बढ़त के साथ 78,263.33 पर खुला। इसी तरह निफ्टी 50 अपने पिछले बंद 24,471.70 से मात्र 0.75 अंक ऊपर 24,472.45 पर सपाट खुला। हालाँकि, कारोबार आगे बढ़ने के साथ दोनों बेंचमार्क दबाव में आ गए — खबर लिखे जाने तक सेंसेक्स 131 अंक गिरकर 78,040 पर और निफ्टी 0.15 प्रतिशत फिसलकर 24,435 पर कारोबार कर रहा था।

सेक्टोरल प्रदर्शन: मेटल चमका, FMCG फिसला

निफ्टी मेटल इंडेक्स 0.86 प्रतिशत की बढ़त के साथ दिन का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाला सेक्टर रहा। निफ्टी पीएसयू बैंक 0.60 प्रतिशत और निफ्टी ऑटो 0.23 प्रतिशत की मज़बूती के साथ हरे निशान पर रहे।

दूसरी तरफ, रक्षात्मक और उपभोक्ता-आधारित क्षेत्रों में बिकवाली हावी रही। निफ्टी एफएमसीजी 0.64 प्रतिशत, निफ्टी रियल्टी 0.58 प्रतिशत, निफ्टी हेल्थकेयर 0.41 प्रतिशत और निफ्टी आईटी 0.38 प्रतिशत तक लुढ़के। निफ्टी50 में सबसे अधिक गिरावट वाले शेयरों में मैक्स हेल्थकेयर इंस्टीट्यूट, अपोलो हॉस्पिटल, बजाज फिनसर्व, टाटा कंज्यूमर, डॉ. रेड्डीज और टाइटन शामिल रहे।

व्यापक बाजार में निफ्टी मिडकैप 0.09 प्रतिशत गिरा, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 0.07 प्रतिशत की मामूली बढ़त पर रहा।

भू-राजनीतिक तनाव: तेल बाजार में अनिश्चितता

बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, ब्रेंट क्रूड का 89 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर जाना भारतीय बाजार के लिए सबसे बड़ी बाधा बना हुआ है। अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड भी 1.14 प्रतिशत चढ़कर 84.14 डॉलर प्रति बैरल पर पहुँच गया।

विश्लेषकों का कहना है, 'बाजार लगातार ऊपरी स्तरों को तोड़ने में असफल हो रहा है और सीमित दायरे में कारोबार कर रहा है। इसका सबसे बड़ा कारण ब्रेंट क्रूड की कीमतों में तेजी है, जो फिर से 89 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुँच गई है।' अमेरिकी सेना द्वारा पनामा-ध्वज वाले एक कंटेनर जहाज पर की गई कार्रवाई और होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर ईरान के कड़े रुख ने तेल आपूर्ति को लेकर आशंकाएँ और बढ़ा दी हैं।

वैश्विक बाजारों का मिला-जुला संकेत

एशियाई बाजारों में मिश्रित रुख रहा। जापान का निक्केई मामूली बढ़त पर रहा, जबकि हांगकांग का हैंगसेंग 1 प्रतिशत गिर गया। दक्षिण कोरिया का कोस्पी 4 प्रतिशत से अधिक उछाल के साथ वैश्विक बाजारों में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वालों में शामिल रहा।

मंगलवार को अमेरिकी बाजारों में भी कमज़ोरी देखी गई थी — नैस्डैक 0.6 प्रतिशत और एसएंडपी 500 0.32 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुए, जिसका असर एशियाई बाजारों की धारणा पर भी पड़ा।

सकारात्मक संकेत: GDP वृद्धि की उम्मीद

बाजार के लिए एक राहत की बात यह है कि एसबीआई रिसर्च की ताज़ा रिपोर्ट में वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत की जीडीपी वृद्धि दर 8 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया है। हालाँकि भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) का अनुमान 6.7 प्रतिशत है। बाजार जानकारों का मानना है कि यदि अर्थव्यवस्था वास्तव में 8 प्रतिशत की दर से बढ़ती है, तो कंपनियों की आय में अपेक्षा से अधिक सुधार देखने को मिल सकता है।

आने वाले सत्रों में बाजार की दिशा मुख्य रूप से कच्चे तेल की कीमतों, पश्चिम एशिया की भू-राजनीतिक स्थितियों, विदेशी संस्थागत निवेशकों की गतिविधियों और घरेलू आर्थिक आँकड़ों पर निर्भर करेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

भारतीय बाजार की प्रतिक्रिया लगभग एक जैसी रहती है। असली सवाल यह है कि क्या एसबीआई रिसर्च का 8% GDP अनुमान बाजार को उस स्तर तक थाम सकता है जहाँ तेल की महँगाई कंपनियों के मार्जिन को कुतरना शुरू करे। होर्मुज तनाव कोई नई घटना नहीं — लेकिन हर बार जब यह भड़कता है, तो भारत जैसे तेल-आयातक देश की भेद्यता उजागर हो जाती है। मेटल सेक्टर की चमक और FMCG की फिसलन यह भी बताती है कि बाजार अभी भी वैश्विक कमोडिटी चक्र से ज़्यादा प्रभावित है, न कि घरेलू खपत से।
RashtraPress
12 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

12 अगस्त को सेंसेक्स और निफ्टी में गिरावट का मुख्य कारण क्या रहा?
ब्रेंट क्रूड का 89.87 डॉलर प्रति बैरल पर पहुँचना और पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव — विशेषकर होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर ईरान का कड़ा रुख — मुख्य कारण रहे। इससे निवेशकों की धारणा कमज़ोर हुई और दोनों प्रमुख बेंचमार्क दबाव में आ गए।
आज के कारोबार में कौन-से सेक्टर सबसे ज़्यादा प्रभावित हुए?
निफ्टी FMCG (0.64%), निफ्टी रियल्टी (0.58%), निफ्टी हेल्थकेयर (0.41%) और निफ्टी आईटी (0.38%) में सबसे अधिक गिरावट देखी गई। वहीं निफ्टी मेटल इंडेक्स 0.86% की बढ़त के साथ दिन का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाला सेक्टर रहा।
ब्रेंट क्रूड की ऊँची कीमतें भारतीय शेयर बाजार को कैसे प्रभावित करती हैं?
भारत अपनी ज़रूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है, इसलिए तेल महँगा होने पर आयात बिल बढ़ता है, कंपनियों के मार्जिन पर दबाव आता है और मुद्रास्फीति की आशंका बढ़ती है। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, 89 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर का स्तर भारतीय बाजार के लिए एक प्रमुख बाधा बन जाता है।
एसबीआई रिसर्च का 8% GDP अनुमान बाजार के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
एसबीआई रिसर्च ने FY2026-27 के लिए भारत की GDP वृद्धि दर 8% रहने का अनुमान लगाया है, जो RBI के 6.7% के अनुमान से काफी अधिक है। यदि यह अनुमान सही साबित होता है, तो कंपनियों की आय में अपेक्षा से अधिक सुधार हो सकता है, जो बाजार के लिए मज़बूत सकारात्मक कारक होगा।
आने वाले दिनों में भारतीय बाजार की दिशा किन कारकों पर निर्भर करेगी?
विशेषज्ञों के अनुसार, कच्चे तेल की कीमतें, पश्चिम एशिया की भू-राजनीतिक स्थितियाँ, विदेशी संस्थागत निवेशकों की गतिविधियाँ और घरेलू आर्थिक आँकड़े — ये चार प्रमुख कारक बाजार की दिशा तय करेंगे। फिलहाल मज़बूत GDP वृद्धि की उम्मीदें बाजार को समर्थन दे रही हैं।
राष्ट्र प्रेस
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