2 सितंबर 2026
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अमेरिका-ईरान युद्ध से वैश्विक बाजारों में भूचाल, सेंसेक्स 473 अंक टूटा; निफ्टी 23,858 पर फिसला

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अमेरिका-ईरान युद्ध से वैश्विक बाजारों में भूचाल, सेंसेक्स 473 अंक टूटा; निफ्टी 23,858 पर फिसला

सारांश

अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य टकराव ने वैश्विक बाजारों को हिला दिया। भारत में सेंसेक्स 473 अंक टूटा, निफ्टी 24,000 के नीचे फिसला। ब्रेंट क्रूड 95 डॉलर पार — भारत जैसे तेल आयातक देशों के लिए यह दोहरी मार है।

मुख्य बातें

सेंसेक्स 2 सितंबर को 472.96 अंक (0.61%) गिरकर 76,471.32 पर खुला।
निफ्टी 197.80 अंक (0.82%) लुढ़ककर 23,858.00 पर — 24,000 के स्तर से नीचे।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने IRGC के ठिकानों पर हमले किए; ईरान ने जॉर्डन और इराक में जवाबी हमला किया।
ब्रेंट क्रूड 4% से अधिक उछलकर 95 डॉलर प्रति बैरल ; WTI क्रूड 90 डॉलर पार।
निफ्टी मिडकैप 100 725.80 अंक (1.15%) और निफ्टी स्मॉलकैप 100 199.85 अंक (1.00%) गिरा।
डाओ जोन्स 0.79% और नैस्डैक 1.03% की गिरावट के साथ बंद हुए।

भारतीय शेयर बाजार में 2 सितंबर को मंगलवार की सुबह भारी बिकवाली देखी गई, जब अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य संघर्ष के फिर से भड़कने की खबरों ने वैश्विक निवेशकों को हिला दिया। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) सेंसेक्स 472.96 अंक यानी 0.61 प्रतिशत की गिरावट के साथ 76,471.32 पर खुला, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) निफ्टी 197.80 अंक यानी 0.82 प्रतिशत लुढ़ककर 23,858.00 पर आ गया — जो 24,000 के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे है।

मुख्य घटनाक्रम

बाजार में बिकवाली व्यापक आधार पर रही। निफ्टी ऑटो, निफ्टी आईटी, निफ्टी रियल्टी, निफ्टी कंजप्शन, निफ्टी इंडिया डिफेंस और निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज सर्वाधिक दबाव में रहे। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 725.80 अंक यानी 1.15 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 62,608.70 पर था, वहीं निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 199.85 अंक यानी 1.00 प्रतिशत गिरकर 19,686.40 पर आया।

सेंसेक्स पैक में केवल सन फार्मा और अदाणी पोर्ट्स हरे निशान में थे। इन्फोसिस, एचसीएल टेक, टीसीएस, इंडिगो, एमएंडएम, एचडीएफसी बैंक, एनटीपीसी, टेक महिंद्रा, बीईएल, एशियन पेंट्स, इटरनल, आईटीसी, टाटा स्टील, मारुति सुजुकी, बजाज फिनसर्व और टाइटन लाल निशान में कारोबार कर रहे थे।

अमेरिका-ईरान संघर्ष: वैश्विक अस्थिरता की असली वजह

विदेशी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी सेना के सेंट्रल कमांड ने मंगलवार को इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के कई ठिकानों पर हमले किए। इनमें एयर डिफेंस साइट्स, रडार सिस्टम, समुद्री संपत्तियाँ, माइन बिछाने की क्षमताएँ और कम्युनिकेशन साइट्स शामिल थीं। जवाबी कार्रवाई में ईरान ने जॉर्डन और इराक में स्थित अमेरिकी ठिकानों पर हमला किया।

यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम एशिया में पहले से तनाव चरम पर था। गौरतलब है कि इस क्षेत्र में किसी भी सैन्य उथल-पुथल का सीधा असर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ता है, जिससे भारत जैसे कच्चे तेल के बड़े आयातक देश विशेष रूप से संवेदनशील होते हैं।

कच्चे तेल में उछाल, भारत पर असर

संघर्ष की खबरों के बाद कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया। बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड 4 प्रतिशत से अधिक बढ़कर 95 डॉलर प्रति बैरल पर पहुँच गया, जबकि डब्ल्यूटीआई क्रूड 90 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गया। भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का करीब 85 प्रतिशत आयात करता है, इसलिए इस उछाल से महँगाई और चालू खाते के घाटे पर दबाव बढ़ने की आशंका है।

एशियाई और अमेरिकी बाजारों पर असर

एशिया के अधिकांश बाजार भी दबाव में रहे। टोक्यो, शंघाई, हांगकांग, सोल और बैंकॉक के बाजार लाल निशान में कारोबार कर रहे थे। इससे पहले अमेरिकी बाजार भी मंगलवार को गिरावट के साथ बंद हुए थे — डाओ जोन्स 0.79 प्रतिशत और नैस्डैक 1.03 प्रतिशत की कमजोरी के साथ बंद हुआ।

क्या होगा आगे

बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, जब तक पश्चिम एशिया में स्थिति स्पष्ट नहीं होती, भारतीय बाजारों में अस्थिरता बनी रह सकती है। कच्चे तेल की ऊँची कीमतें और विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की संभावित बिकवाली निकट भविष्य में बाजार पर दबाव बनाए रख सकती है। निवेशकों की नजर अब अमेरिकी विदेश नीति की अगली चाल और ओपेक+ की प्रतिक्रिया पर होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

ठीक उस वक्त जब दरें पहले से ऊँची हैं। मुख्यधारा की कवरेज बाजार के अंकों पर केंद्रित है, लेकिन असली खतरा चालू खाते के घाटे और रुपये पर दबाव में है — जो आम उपभोक्ता की जेब तक पहुँचेगा। भारत की 'रणनीतिक स्वायत्तता' की विदेश नीति की भी परीक्षा होगी, क्योंकि तेहरान और वाशिंगटन दोनों से संबंध संतुलित रखना अब पहले से कठिन होगा।
RashtraPress
2 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अमेरिका-ईरान युद्ध का भारतीय शेयर बाजार पर क्या असर पड़ा?
अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य संघर्ष की खबरों से 2 सितंबर को सेंसेक्स 472.96 अंक गिरकर 76,471.32 और निफ्टी 197.80 अंक लुढ़ककर 23,858.00 पर आ गया। निफ्टी आईटी, ऑटो, रियल्टी और फाइनेंशियल सर्विसेज सेक्टर सबसे ज्यादा प्रभावित रहे।
अमेरिका और ईरान के बीच क्या हुआ?
विदेशी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी सेना के सेंट्रल कमांड ने मंगलवार को इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के एयर डिफेंस, रडार, समुद्री और कम्युनिकेशन ठिकानों पर हमले किए। जवाब में ईरान ने जॉर्डन और इराक में अमेरिकी ठिकानों पर हमला किया।
कच्चे तेल की कीमतों पर क्या असर पड़ा?
संघर्ष की खबरों के बाद बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड 4 प्रतिशत से अधिक उछलकर 95 डॉलर प्रति बैरल पर पहुँच गया और WTI क्रूड 90 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गया। भारत अपनी जरूरत का करीब 85 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है, इसलिए इससे महँगाई बढ़ने की आशंका है।
वैश्विक बाजारों पर इस संघर्ष का क्या असर रहा?
टोक्यो, शंघाई, हांगकांग, सोल और बैंकॉक के बाजार लाल निशान में थे। अमेरिकी बाजारों में भी गिरावट रही — डाओ जोन्स 0.79 प्रतिशत और नैस्डैक 1.03 प्रतिशत की कमजोरी के साथ बंद हुए।
भारतीय बाजार आगे कैसे रह सकते हैं?
जब तक पश्चिम एशिया में स्थिति स्पष्ट नहीं होती, भारतीय बाजारों में अस्थिरता बनी रह सकती है। कच्चे तेल की ऊँची कीमतें और विदेशी संस्थागत निवेशकों की संभावित बिकवाली निकट भविष्य में दबाव बनाए रख सकती है।
राष्ट्र प्रेस
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