13 जुलाई 2026
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सेंसेक्स 649 अंक टूटा, 76,920 पर खुला; मध्य पूर्व तनाव और कच्चे तेल की उछाल से बाज़ार दबाव में

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सेंसेक्स 649 अंक टूटा, 76,920 पर खुला; मध्य पूर्व तनाव और कच्चे तेल की उछाल से बाज़ार दबाव में

सारांश

मध्य पूर्व में अमेरिका-ईरान सैन्य टकराव और ब्रेंट क्रूड में 4% से अधिक की उछाल ने सोमवार को भारतीय बाज़ारों को हिला दिया — सेंसेक्स 649 अंक टूटकर 77,000 के नीचे आ गया। मेटल, फाइनेंशियल और ऑटो सेक्टर सबसे अधिक दबाव में रहे, जबकि आईटी और फार्मा ने राहत दी।

मुख्य बातें

सेंसेक्स सोमवार 13 जुलाई को 649 अंक (0.84%) गिरकर 76,920 पर खुला; निफ्टी 184 अंक (0.76%) कमज़ोर होकर 24,022 पर था।
निफ्टी मिडकैप 100 280 अंक गिरकर 62,756 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 66 अंक गिरकर 19,349 पर था।
निफ्टी मेटल , फाइनेंशियल सर्विसेज़ और कंजम्प्शन सबसे अधिक दबाव में; आईटी और फार्मा हरे निशान में।
ब्रेंट क्रूड 4% से अधिक उछलकर 79 डॉलर प्रति बैरल ; डब्ल्यूटीआई 74 डॉलर के करीब।
अमेरिकी सेना की ईरान पर कार्रवाई के बाद ईरान ने कुवैत , बहरीन और जॉर्डन में अमेरिकी ठिकानों को कथित तौर पर निशाना बनाया।
टोक्यो , शंघाई , हांगकांग , बैंकॉक , सियोल लाल निशान में; अमेरिकी डाओ और नैस्डैक शुक्रवार को 0.29% बढ़त के साथ बंद।

बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) सेंसेक्स सोमवार, 13 जुलाई को कारोबार की शुरुआत में 649 अंक यानी 0.84 प्रतिशत की गिरावट के साथ 76,920 पर आ गया, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) निफ्टी 184 अंक यानी 0.76 प्रतिशत कमज़ोर होकर 24,022 पर था। मध्य पूर्व में अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते सैन्य टकराव और ब्रेंट क्रूड में 4 प्रतिशत से अधिक की तेज़ उछाल ने निवेशकों की धारणा को कमज़ोर किया।

बाज़ार में व्यापक बिकवाली

सुबह 9:18 बजे IST तक बाज़ार में व्यापक स्तर पर बिकवाली का दबाव था। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 280 अंक यानी 0.44 प्रतिशत गिरकर 62,756 पर और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 66 अंक यानी 0.37 प्रतिशत की कमज़ोरी के साथ 19,349 पर था।

सेक्टोरल स्तर पर सबसे अधिक दबाव निफ्टी मेटल, निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज़ और निफ्टी कंजम्प्शन पर था। इसके अलावा निफ्टी ऑटो, निफ्टी इंडिया डिफेंस, निफ्टी प्राइवेट बैंक, निफ्टी पीएसयू बैंक, निफ्टी कमोडिटीज़, निफ्टी इन्फ्रा, निफ्टी सर्विसेज़, निफ्टी कंज़्यूमर ड्यूरेबल्स, निफ्टी ऑयल एंड गैस और निफ्टी एफएमसीजी भी लाल निशान में कारोबार कर रहे थे।

किन शेयरों में तेज़ी, किनमें गिरावट

सेंसेक्स पैक में टीसीएस, एचसीएल टेक, पावर ग्रिड और एनटीपीसी हरे निशान में थे। वहीं टाटा स्टील, इंडिगो, मारुति सुज़ुकी, एशियन पेंट्स, बजाज फिनसर्व, बजाज फाइनेंस, एचडीएफसी बैंक, एलएंडटी, इटरनल, अल्ट्राटेक सीमेंट, बीईएल, टाइटन, एमएंडएम, भारती एयरटेल, एसबीआई, सन फार्मा, आईसीआईसीआई बैंक, इन्फोसिस और आईटीसी दबाव में थे। निफ्टी आईटी और निफ्टी फार्मा ही ऐसे सेक्टर रहे जो हरे निशान में टिके रहे।

मध्य पूर्व संकट: बाज़ार गिरावट की असली वजह

कमर्शियल जहाज़ों पर हमलों के जवाब में अमेरिकी सेना की ओर से ईरान पर ताज़ा सैन्य कार्रवाई के बाद क्षेत्र में स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। इन हमलों के बाद ईरान भी आक्रामक रुख अपनाए हुए है और कथित तौर पर कुवैत, बहरीन और जॉर्डन में मौजूद अमेरिकी ठिकानों को निशाना बना रहा है।

इस भू-राजनीतिक उथल-पुथल का सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ा। बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड 4 प्रतिशत से अधिक उछलकर 79 डॉलर प्रति बैरल और डब्ल्यूटीआई क्रूड 4 प्रतिशत की बढ़त के साथ 74 डॉलर प्रति बैरल के करीब था। भारत अपनी कच्चे तेल की ज़रूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए तेल की कीमतों में यह उछाल घरेलू महंगाई और चालू खाता घाटे के लिए चिंताजनक संकेत है।

एशियाई बाज़ारों का हाल

मध्य पूर्व तनाव की छाया एशिया के अधिकांश बाज़ारों पर भी पड़ी। टोक्यो, शंघाई, हांगकांग, बैंकॉक और सियोल के बाज़ार लाल निशान में कारोबार कर रहे थे, जबकि जकार्ता का बाज़ार हरे निशान में था। इसके विपरीत, पिछले शुक्रवार को अमेरिकी बाज़ार मज़बूती के साथ बंद हुए थे — डाओ जोन्स 0.29 प्रतिशत और नैस्डैक 0.29 प्रतिशत की बढ़त के साथ हरे निशान में बंद हुए। यह विरोधाभास दर्शाता है कि वैश्विक जोखिम का असर अमेरिकी तकनीकी शेयरों की तुलना में उभरते बाज़ारों पर अधिक तीव्रता से पड़ रहा है।

आगे क्या देखें

विश्लेषकों के अनुसार, मध्य पूर्व में संघर्ष की स्थिति और कच्चे तेल की कीमतों की दिशा आने वाले सत्रों में बाज़ार की चाल तय करेगी। यदि भू-राजनीतिक तनाव और गहरा होता है तो निफ्टी के लिए 24,000 का स्तर अहम सपोर्ट बना रहेगा। निवेशकों की नज़र इस सप्ताह आने वाले घरेलू और वैश्विक आर्थिक आँकड़ों पर भी रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

000 के नीचे फिसलना महज़ एक तकनीकी गिरावट नहीं है — यह उस भू-राजनीतिक जोखिम का संकेत है जिसे भारतीय बाज़ार अक्सर कम आँकते हैं। कच्चे तेल में 4% की एकदिवसीय उछाल भारत जैसे बड़े आयातक देश के लिए दोहरी मार है: महंगाई का दबाव और चालू खाता घाटे का विस्तार। गौरतलब है कि आईटी और फार्मा का हरे निशान में रहना दर्शाता है कि निवेशक घरेलू माँग-निर्भर सेक्टरों से दूरी बना रहे हैं। यदि मध्य पूर्व संकट लंबा खिंचा, तो RBI के लिए मुद्रास्फीति और विकास के बीच संतुलन बनाना और भी कठिन हो सकता है।
RashtraPress
13 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

13 जुलाई को सेंसेक्स इतना क्यों गिरा?
मध्य पूर्व में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य टकराव और ब्रेंट क्रूड में 4% से अधिक की उछाल के कारण निवेशकों में घबराहट फैली, जिससे सेंसेक्स 649 अंक गिरकर 76,920 पर आ गया। वैश्विक जोखिम से बचने की प्रवृत्ति ने एशियाई बाज़ारों को भी प्रभावित किया।
मध्य पूर्व तनाव का भारतीय शेयर बाज़ार पर क्या असर पड़ता है?
मध्य पूर्व संकट से कच्चे तेल की कीमतें बढ़ती हैं, जो भारत की आयात लागत और महंगाई को सीधे प्रभावित करती हैं। इससे कंपनियों के मुनाफे पर दबाव पड़ता है और निवेशक जोखिम भरे बाज़ारों से पैसा निकालने लगते हैं।
आज किन सेक्टरों में सबसे अधिक गिरावट रही?
निफ्टी मेटल, निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज़ और निफ्टी कंजम्प्शन में सबसे अधिक गिरावट रही। इसके अलावा ऑटो, डिफेंस, प्राइवेट बैंक, पीएसयू बैंक और ऑयल एंड गैस भी दबाव में थे। केवल निफ्टी आईटी और निफ्टी फार्मा हरे निशान में रहे।
ईरान और अमेरिका के बीच क्या हो रहा है?
कमर्शियल जहाज़ों पर हमलों के जवाब में अमेरिकी सेना ने ईरान पर सैन्य कार्रवाई की है। इसके बाद ईरान ने कथित तौर पर कुवैत, बहरीन और जॉर्डन में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया है, जिससे क्षेत्र में तनाव और गहरा हो गया है।
क्या आज एशिया के अन्य बाज़ार भी गिरे?
हाँ, टोक्यो, शंघाई, हांगकांग, बैंकॉक और सियोल के बाज़ार लाल निशान में थे। केवल जकार्ता का बाज़ार हरे निशान में कारोबार कर रहा था। इसके विपरीत, पिछले शुक्रवार को अमेरिकी डाओ जोन्स और नैस्डैक दोनों 0.29% की बढ़त के साथ बंद हुए थे।
राष्ट्र प्रेस
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