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भारतीय सेना का MoU: सैनिकों के बच्चों को देहरादून मेडिकल संस्थान में मिलेगी ट्यूशन फीस में विशेष छूट

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भारतीय सेना का MoU: सैनिकों के बच्चों को देहरादून मेडिकल संस्थान में मिलेगी ट्यूशन फीस में विशेष छूट

सारांश

भारतीय सेना ने देहरादून के कंबाइंड (पीजी) इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस के साथ MoU किया है, जिससे सेवारत, सेवानिवृत्त और शहीद सैनिकों के बच्चों को ट्यूशन फीस में राहत मिलेगी। यह पहल सेना की उस व्यापक कल्याण नीति का हिस्सा है जो जवानों के परिवारों को शिक्षा और रोज़गार दोनों मोर्चों पर सहारा दे रही है।

मुख्य बातें

भारतीय सेना ने 2 सितंबर 2026 को देहरादून के कंबाइंड (पीजी) इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस एंड यूआईएचएमटी ग्रुप ऑफ कॉलेजेज के साथ MoU पर हस्ताक्षर किए।
समझौते के तहत सेवारत, सेवानिवृत्त और शहीद सैन्यकर्मियों के पात्र बच्चों को ट्यूशन फीस में विशेष छूट मिलेगी।
शहीद जवानों के परिवारों के लिए अतिरिक्त विशेष सहायता का प्रावधान किया गया है।
इससे पहले एयर इंडिया-सेना समझौते के तहत 58 उम्मीदवारों का चयन हुआ था, जिनमें 2 महिलाओं को अंतरराष्ट्रीय रोज़गार मिला।
उस पहल के पहले चरण में 16 उम्मीदवार प्रशिक्षण पूरा कर रोज़गार में शामिल हो चुके हैं।

भारतीय सेना ने 2 सितंबर 2026 को देहरादून स्थित कंबाइंड (पीजी) इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस एंड यूआईएचएमटी ग्रुप ऑफ कॉलेजेज के साथ एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसके तहत सेवारत, सेवानिवृत्त और शहीद सैन्यकर्मियों के पात्र बच्चों को उच्च शिक्षा में ट्यूशन फीस पर विशेष छूट मिलेगी। यह कदम सैनिक परिवारों के शैक्षणिक और आर्थिक बोझ को कम करने की दिशा में सेना की निरंतर प्रतिबद्धता का हिस्सा है।

समझौते का मुख्य घटनाक्रम

इस MoU के अंतर्गत देहरादून के उक्त संस्थान ने भारतीय सेना के सेवारत और सेवानिवृत्त सैन्यकर्मियों के पात्र बच्चों को ट्यूशन फीस में विशेष रियायत देने का प्रावधान किया है। इसके अतिरिक्त, देश की रक्षा में सर्वोच्च बलिदान देने वाले जवानों के परिवारों और बच्चों के लिए और अधिक सहायता सुनिश्चित की गई है।

गौरतलब है कि जब कोई सैनिक सीमा पर तैनात होता है, तो उसके परिवार की जिम्मेदारी — विशेषकर बच्चों की शिक्षा — एक बड़ी चिंता बनी रहती है। यह समझौता उसी चिंता को कम करने की दिशा में एक ठोस संस्थागत प्रयास है।

शहीद परिवारों के लिए विशेष प्रावधान

समझौते में शहीद जवानों के परिजनों के लिए अलग से विशेष सहायता का उल्लेख किया गया है। सेना का मानना है कि जिन परिवारों ने देश की रक्षा में अपना सब कुछ खो दिया, उनके बच्चों को बेहतर शैक्षणिक अवसर उपलब्ध कराना राष्ट्रीय कर्तव्य है। फीस में रियायत इन परिवारों को आर्थिक राहत के साथ-साथ उनके बच्चों के भविष्य को सुरक्षित करने में सहायक होगी।

सेना की व्यापक कल्याण पहलें

यह ऐसे समय में आया है जब भारतीय सेना सैनिक परिवारों के लिए रोज़गार और प्रशिक्षण के मोर्चे पर भी सक्रिय है। इससे पहले एयर इंडिया और सेना के बीच हुए एक समझौते के तहत देशभर से 58 उम्मीदवारों का चयन किया गया था, जिनमें वीर नारियाँ और उनके आश्रित शामिल थे। इनमें से दो महिलाओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोज़गार प्राप्त हुआ।

उस पहल के पहले चरण में 16 उम्मीदवारों ने विमानन और हवाई अड्डा सेवाओं से जुड़ा प्रशिक्षण पूरा कर लिया और उन्हें रोज़गार में शामिल किया जा चुका है। इनमें वीर नारियाँ और उनके बच्चे दोनों शामिल हैं।

सेना की प्रतिक्रिया और संदेश

भारतीय सेना ने कहा है कि यह पहल अपने सैन्यकर्मियों और उनके निकटतम परिजनों के कल्याण के प्रति सेना की दीर्घकालिक प्रतिबद्धता को रेखांकित करती है। सेना का स्पष्ट संदेश है कि जब जवान देश की सेवा में जुटे हों, तो उनके बच्चों की शिक्षा और भविष्य की जिम्मेदारी संस्थाएँ और सेना मिलकर उठाएँगी।

आगे की राह

इस MoU के लागू होने के बाद पात्र सैनिक परिवार देहरादून के इस संस्थान में प्रवेश के समय फीस रियायत का लाभ उठा सकेंगे। भारतीय सेना द्वारा इस प्रकार के शैक्षणिक और व्यावसायिक समझौतों की श्रृंखला यह संकेत देती है कि सैनिक कल्याण नीति अब केवल सेवाकाल तक सीमित नहीं, बल्कि परिवार की दीर्घकालिक सुरक्षा तक विस्तारित हो रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि 'विशेष छूट' की मात्रा कितनी है और पात्रता की शर्तें कितनी व्यापक हैं — जिसका खुलासा अभी नहीं हुआ है। मेडिकल शिक्षा की फीस लाखों में होती है; प्रतीकात्मक रियायत से परिवारों को वास्तविक राहत नहीं मिलती। साथ ही, यह पहल देहरादून के एक संस्थान तक सीमित है, जबकि सैनिक परिवार पूरे देश में फैले हैं। सेना की कल्याण नीति तब सार्थक होगी जब ऐसे MoU राष्ट्रीय स्तर पर बहु-संस्थानिक और पारदर्शी ढाँचे के साथ आएँ।
RashtraPress
2 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारतीय सेना और देहरादून मेडिकल संस्थान के बीच MoU क्या है?
भारतीय सेना ने देहरादून के कंबाइंड (पीजी) इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस एंड यूआईएचएमटी ग्रुप ऑफ कॉलेजेज के साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं। इसके तहत सेवारत, सेवानिवृत्त और शहीद सैन्यकर्मियों के पात्र बच्चों को ट्यूशन फीस में विशेष छूट मिलेगी।
इस MoU से किन सैनिक परिवारों को फायदा होगा?
इस समझौते का लाभ भारतीय सेना के सेवारत जवानों, सेवानिवृत्त सैन्यकर्मियों और देश के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले शहीद जवानों के बच्चों को मिलेगा। शहीद परिवारों के लिए विशेष अतिरिक्त सहायता का भी प्रावधान किया गया है।
क्या भारतीय सेना ने इससे पहले भी ऐसी कल्याण पहलें की हैं?
हाँ, इससे पहले एयर इंडिया और सेना के बीच हुए समझौते के तहत देशभर से 58 उम्मीदवारों का चयन किया गया था, जिनमें वीर नारियाँ और उनके आश्रित शामिल थे। इनमें से दो महिलाओं को अंतरराष्ट्रीय रोज़गार प्राप्त हुआ और पहले चरण में 16 उम्मीदवार प्रशिक्षण पूरा कर रोज़गार में शामिल हो चुके हैं।
सैनिकों के बच्चे इस फीस छूट का लाभ कैसे उठा सकते हैं?
MoU के लागू होने के बाद पात्र सैनिक परिवार देहरादून के इस संस्थान में प्रवेश के समय फीस रियायत के लिए आवेदन कर सकेंगे। पात्रता की विस्तृत शर्तें संस्थान और सेना द्वारा निर्धारित की जाएँगी।
यह पहल सैनिक परिवारों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
जब सैनिक सीमा पर तैनात होता है, तो उसके परिवार की आर्थिक और शैक्षणिक जिम्मेदारी एक बड़ी चुनौती बन जाती है। फीस में विशेष छूट न केवल आर्थिक बोझ कम करती है, बल्कि बच्चों को उच्च शिक्षा के बेहतर अवसर भी सुनिश्चित करती है।
राष्ट्र प्रेस
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