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भारतीय सेना का गुरु नानक ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस से एमओयू, सैनिकों के बच्चों को मिलेगी ट्यूशन फीस में छूट

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भारतीय सेना का गुरु नानक ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस से एमओयू, सैनिकों के बच्चों को मिलेगी ट्यूशन फीस में छूट

सारांश

भारतीय सेना ने कर्नाटक के गुरु नानक ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस के साथ एमओयू पर हस्ताक्षर किए, जिससे सैनिकों के बच्चों को ट्यूशन फीस में छूट मिलेगी — शहीदों और दिव्यांग बच्चों के लिए विशेष सहायता भी शामिल। साथ ही सेना प्रमुख ने तीन दिग्गजों को योद्धा सेवा सम्मान से नवाज़ा।

मुख्य बातें

भारतीय सेना ने गुरु नानक ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस, बीदर (कर्नाटक) के साथ एमओयू पर हस्ताक्षर किए।
सेवारत और सेवानिवृत्त सेना कर्मियों के पात्र बच्चों को विशेष ट्यूशन फीस रियायत मिलेगी।
सर्वोच्च बलिदान देने वाले कर्मियों के बच्चों और दिव्यांग बच्चों के लिए बढ़ी हुई सहायता का प्रावधान।
सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने नई दिल्ली में तीन दिग्गजों को योद्धा सेवा सम्मान प्रदान किया।
लेफ्टिनेंट कर्नल बीएमएस बैंस (सेवानिवृत्त) ने 70,000 से अधिक दिग्गजों और 52,000 से अधिक पूर्व-ईसीएचएस सेवानिवृत्त लोगों की सहायता की।

भारतीय सेना ने गुरु नानक ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस, बीदर (कर्नाटक) के साथ एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसके तहत सेवारत और सेवानिवृत्त सेना कर्मियों के पात्र बच्चों को ट्यूशन फीस में विशेष रियायत दी जाएगी। यह कदम सेना के अपने जवानों और उनके परिवारों की शैक्षिक आकांक्षाओं के प्रति प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है।

एमओयू में क्या शामिल है

इस समझौते के अंतर्गत गुरु नानक ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस सेवारत और सेवानिवृत्त सेना कर्मियों के पात्र बच्चों को विशेष शिक्षण शुल्क रियायतें प्रदान करेगा। इसमें विशेष प्रावधान भी शामिल हैं — सर्वोच्च बलिदान देने वाले कर्मियों के बच्चों और दिव्यांग बच्चों के लिए बढ़ी हुई सहायता सुनिश्चित की गई है। सेना ने एक्स पर अपनी आधिकारिक पोस्ट में कहा कि यह पहल जवानों के बच्चों के लिए 'उज्जवल भविष्य की आकांक्षाओं का समर्थन' करने के उद्देश्य से उठाया गया कदम है।

सेना की कल्याण प्रतिबद्धता का हिस्सा

यह पहल भारतीय सेना की उस व्यापक नीति का हिस्सा है जिसके तहत कर्मियों और उनके परिवारों के कल्याण, विशेषकर शिक्षा के क्षेत्र में, निरंतर प्रयास किए जाते हैं। गौरतलब है कि सेना इससे पहले भी देशभर के विभिन्न शिक्षण संस्थानों के साथ इसी तरह के समझौते करती रही है। कर्नाटक में यह एमओयू दक्षिण भारत में सेना के कल्याण नेटवर्क को और मज़बूत करता है।

योद्धा सेवा सम्मान: तीन दिग्गजों को किया गया सम्मानित

इसी क्रम में, सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने नई दिल्ली में आयोजित सेवानिवृत्त अधिकारी सेमिनार के दौरान तीन प्रतिष्ठित दिग्गजों को योद्धा सेवा सम्मान से नवाज़ा।

लेफ्टिनेंट कर्नल बीएमएस बैंस (सेवानिवृत्त) को होशियारपुर और आसपास के क्षेत्रों में 70,000 से अधिक दिग्गजों और उनके परिवारों को पेंशन व कानूनी मुद्दों पर सहायता देने तथा 52,000 से अधिक पूर्व-ईसीएचएस सेवानिवृत्त लोगों के लिए ईसीएचएस पहुँच सुलभ कराने के लिए सम्मानित किया गया। उन्होंने दिव्यांग बच्चों के समर्थन में भी उल्लेखनीय योगदान दिया।

नायब सूबेदार खगेन चंद्र दास (सेवानिवृत्त) को तामुलपुर के दूरदराज़ इलाकों में 250 से अधिक अलग-थलग दिग्गजों तक व्यक्तिगत रूप से पहुँचकर उन्हें कल्याण एजेंसियों से जोड़ने के लिए सराहा गया।

हवलदार अनुप कुमार महतो (सेवानिवृत्त) को पश्चिम बंगाल और झारखंड में वंचित युवाओं को सशक्त बनाने के उनके समर्पण के लिए यह सम्मान प्रदान किया गया।

आगे की राह

इस एमओयू से कर्नाटक में सेना कर्मियों के परिवारों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक सुगम पहुँच मिलेगी। आलोचकों का कहना है कि ऐसे समझौतों की नियमित समीक्षा ज़रूरी है ताकि वास्तविक लाभार्थियों तक छूट पहुँचे। सेना द्वारा इस तरह की साझेदारियों का विस्तार देश के अन्य राज्यों में भी अपेक्षित है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या इस तरह के संस्थागत समझौते ज़मीनी स्तर पर उन परिवारों तक पहुँचते हैं जिन्हें सबसे ज़्यादा ज़रूरत है — विशेषकर दूरदराज़ के इलाकों में तैनात जवानों के परिजन। एकल संस्थान के साथ एमओयू एक सकारात्मक शुरुआत है, पर इसका दायरा सीमित है; राष्ट्रीय स्तर पर एक केंद्रीकृत शैक्षिक सहायता पोर्टल की अनुपस्थिति में ऐसे समझौते खंडित और अपर्याप्त रहते हैं। योद्धा सेवा सम्मान जैसी पहलें दिग्गजों के अनौपचारिक नेटवर्क की ताक़त को उजागर करती हैं — सरकार को इन्हें संस्थागत समर्थन देने पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।
RashtraPress
22 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारतीय सेना और गुरु नानक ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस के बीच एमओयू क्या है?
यह एक समझौता ज्ञापन है जिसके तहत कर्नाटक के बीदर स्थित गुरु नानक ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस, सेवारत और सेवानिवृत्त भारतीय सेना कर्मियों के पात्र बच्चों को विशेष ट्यूशन फीस रियायत देगा। शहीद कर्मियों के बच्चों और दिव्यांग बच्चों के लिए बढ़ी हुई सहायता का भी प्रावधान है।
इस एमओयू से किसे फायदा होगा?
इस एमओयू का लाभ सेवारत और सेवानिवृत्त भारतीय सेना कर्मियों के पात्र बच्चों को मिलेगा। सर्वोच्च बलिदान देने वाले जवानों के बच्चों और दिव्यांग बच्चों को विशेष रूप से बढ़ी हुई सहायता दी जाएगी।
योद्धा सेवा सम्मान क्या है और इस बार किसे मिला?
योद्धा सेवा सम्मान भारतीय सेना द्वारा उन सेवानिवृत्त सैनिकों को दिया जाने वाला सम्मान है जो समाज और दिग्गजों की भलाई में उल्लेखनीय योगदान देते हैं। इस बार सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने नई दिल्ली में लेफ्टिनेंट कर्नल बीएमएस बैंस (सेवानिवृत्त), नायब सूबेदार खगेन चंद्र दास (सेवानिवृत्त) और हवलदार अनुप कुमार महतो (सेवानिवृत्त) को यह सम्मान प्रदान किया।
लेफ्टिनेंट कर्नल बीएमएस बैंस को यह सम्मान क्यों मिला?
लेफ्टिनेंट कर्नल बीएमएस बैंस (सेवानिवृत्त) ने होशियारपुर और आसपास के क्षेत्रों में 70,000 से अधिक दिग्गजों और उनके परिवारों को पेंशन व कानूनी मुद्दों पर सहायता दी, तथा 52,000 से अधिक पूर्व-ईसीएचएस सेवानिवृत्त लोगों के लिए ईसीएचएस पहुँच सुलभ कराई। दिव्यांग बच्चों के कल्याण में भी उनका योगदान उल्लेखनीय रहा।
क्या सेना इस तरह के एमओयू अन्य राज्यों में भी करती है?
हाँ, भारतीय सेना देशभर के विभिन्न शिक्षण संस्थानों के साथ इसी तरह के कल्याण समझौते करती रही है। कर्नाटक में गुरु नानक ग्रुप के साथ यह एमओयू दक्षिण भारत में सेना के शैक्षिक कल्याण नेटवर्क को और विस्तार देता है।
राष्ट्र प्रेस
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