1 अक्टूबर 2026
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भारतीय सेना की पहल: डोडा-किश्तवाड़ के 30 छात्रों ने पूरा किया 'राष्ट्रीय एकता' दौरा, राष्ट्रपति मुर्मू से हुई मुलाकात

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भारतीय सेना की पहल: डोडा-किश्तवाड़ के 30 छात्रों ने पूरा किया 'राष्ट्रीय एकता' दौरा, राष्ट्रपति मुर्मू से हुई मुलाकात

सारांश

भारतीय सेना की 26 राष्ट्रीय राइफल्स ने डोडा-किश्तवाड़ के 30 छात्रों को राष्ट्रीय एकता दौरे पर भेजा — कई बच्चों के लिए यह जम्मू-कश्मीर से बाहर पहली यात्रा थी। अमृतसर, चंडीगढ़ और दिल्ली की सैर के साथ राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात ने इसे अविस्मरणीय बना दिया।

मुख्य बातें

भारतीय सेना की 26 राष्ट्रीय राइफल्स ने 22 से 30 सितंबर 2026 के बीच डोडा और किश्तवाड़ के 30 छात्रों का 'राष्ट्रीय एकता' दौरा संपन्न कराया।
छात्रों ने अमृतसर , जालंधर , चंडीगढ़ और नई दिल्ली का दौरा किया तथा राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात की।
कई छात्रों के लिए यह पहली बार था जब वे अपने ज़िले या जम्मू-कश्मीर से बाहर गए।
9 सेक्टर राष्ट्रीय राइफल्स के कमांडर ब्रिगेडियर विक्रांत शिंदे ने दौरे का समापन किया और छात्रों को शिक्षा पर ध्यान देने के लिए प्रेरित किया।
यह दौरा छात्रों के लिए पूर्णतः निःशुल्क था और इसका उद्देश्य राष्ट्रीय एकता एवं युवा सशक्तिकरण को बढ़ावा देना था।

भारतीय सेना की 26 राष्ट्रीय राइफल्स ने जम्मू संभाग के डोडा और किश्तवाड़ ज़िलों के दूरदराज़ एवं पिछड़े क्षेत्रों से चुने गए 30 छात्रों के लिए एक सप्ताह तक चलने वाला 'राष्ट्रीय एकता' दौरा सफलतापूर्वक संपन्न कराया। यह दौरा 22 से 30 सितंबर 2026 के बीच आयोजित हुआ, जिसमें बच्चों ने अमृतसर, जालंधर, चंडीगढ़ और नई दिल्ली की यात्रा की। विशेष रूप से, छात्रों को राष्ट्रपति भवन का दौरा करने और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से व्यक्तिगत रूप से मिलने का दुर्लभ अवसर प्राप्त हुआ।

दौरे का उद्देश्य और पृष्ठभूमि

इस पहल का मूल लक्ष्य जम्मू-कश्मीर के सुदूर पहाड़ी इलाकों के उन युवाओं को भारत की विविध संस्कृति, तकनीकी प्रगति और राष्ट्रीय विकास से परिचित कराना था, जो भौगोलिक और आर्थिक बाधाओं के कारण इन अनुभवों से वंचित रह जाते हैं। साथ ही, इस दौरे का उद्देश्य राष्ट्रीय एकता की भावना को बढ़ावा देना और युवाओं को सशक्त करना भी था।

गौरतलब है कि डोडा और किश्तवाड़ जम्मू-कश्मीर के उन ज़िलों में शुमार हैं जहाँ शिक्षा, परिवहन और अवसंरचना की दृष्टि से विकास की रफ्तार अपेक्षाकृत धीमी रही है। कई छात्रों के लिए यह न केवल अपने ज़िले से बाहर निकलने का, बल्कि जम्मू-कश्मीर से बाहर पैर रखने का पहला अवसर था।

छात्रों के अनुभव

दौरे से लौटने के बाद छात्रा दीपिका ने बताया कि यह अनुभव अत्यंत सुखद और ज्ञानवर्धक रहा। उन्होंने कहा, 'बहुत कम ही बच्चों को यह अवसर मिलता है कि वे इस तरह के दौरों पर जाएं। मैंने खुद कभी अपने जिले से बाहर कदम नहीं रखे थे। इस दौरे के कारण मेरा अपने जिले से बाहर जाना हुआ।' उन्होंने भारतीय सेना के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके बारे में जितना भी कहा जाए, वो कम है।

एक अन्य छात्रा जानवी ने इसे 'जम्मू-कश्मीर से बाहर उनकी पहली यात्रा' बताया। उन्होंने कहा, 'मुझे यह जानकर खुशी हुई थी कि मेरा इस दौरे के लिए चयन हुआ है। सभी छात्र-छात्राएं खुश थे, क्योंकि यह जिले से बाहर घूमने का अवसर था।' जानवी ने यह भी बताया कि छात्रों के लिए यह यात्रा पूरी तरह नि:शुल्क थी।

ब्रिगेडियर शिंदे का संदेश

9 सेक्टर राष्ट्रीय राइफल्स के कमांडर ब्रिगेडियर विक्रांत शिंदे ने छात्रों की वापसी पर उनसे संवाद किया और उनकी सक्रिय भागीदारी की सराहना की। उन्होंने छात्रों को अपनी पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित करने, परीक्षाओं की तैयारी मन लगाकर करने और देशभर में उपलब्ध अवसरों का भरपूर लाभ उठाने के लिए प्रेरित किया।

ब्रिगेडियर शिंदे ने यह भी रेखांकित किया कि देशभर में युवाओं के लिए अनेक संभावनाएं मौजूद हैं और कड़ी मेहनत तथा एकाग्रता ही सफलता की असली कुंजी है।

आम जनता और समाज पर असर

यह ऐसे समय में आया है जब जम्मू-कश्मीर में विकास और युवाओं को मुख्यधारा से जोड़ने के प्रयास तेज़ हुए हैं। भारतीय सेना की इस तरह की पहलें क्षेत्र के युवाओं में राष्ट्रीय भावना और आत्मविश्वास जगाने का काम करती हैं। सेना के अनुसार, इस प्रकार के दौरे नियमित रूप से आयोजित किए जाते हैं ताकि दुर्गम इलाकों के छात्र देश की प्रगति से जुड़ाव महसूस करें।

आगामी महीनों में ऐसे और दौरे आयोजित किए जाने की संभावना जताई जा रही है, जिनसे जम्मू-कश्मीर के और अधिक युवाओं को लाभ मिल सकेगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारतीय सेना का 'राष्ट्रीय एकता' दौरा क्या है?
यह भारतीय सेना द्वारा आयोजित एक विशेष शैक्षिक यात्रा कार्यक्रम है, जिसमें जम्मू-कश्मीर के दूरदराज़ इलाकों के छात्रों को देश के प्रमुख शहरों और राष्ट्रीय महत्व के स्थलों की यात्रा कराई जाती है। इसका उद्देश्य राष्ट्रीय एकता की भावना को बढ़ावा देना और युवाओं को सशक्त करना है।
इस दौरे में डोडा-किश्तवाड़ के छात्र कहाँ-कहाँ गए?
30 छात्रों ने 22 से 30 सितंबर 2026 के बीच अमृतसर, जालंधर, चंडीगढ़ और नई दिल्ली का दौरा किया। दिल्ली में उन्हें राष्ट्रपति भवन देखने और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मिलने का भी अवसर मिला।
इस दौरे का आयोजन किसने किया?
इस दौरे का आयोजन भारतीय सेना की 26 राष्ट्रीय राइफल्स ने किया। दौरे के समापन पर 9 सेक्टर राष्ट्रीय राइफल्स के कमांडर ब्रिगेडियर विक्रांत शिंदे ने छात्रों से संवाद किया और उनकी सराहना की।
इस दौरे से डोडा-किश्तवाड़ के छात्रों को क्या फायदा हुआ?
कई छात्रों के लिए यह अपने ज़िले या जम्मू-कश्मीर से बाहर पहली यात्रा थी। छात्रों ने देश की विविध संस्कृति, तकनीकी प्रगति और राष्ट्रीय संस्थानों को प्रत्यक्ष रूप से जाना। यह दौरा उनके लिए पूरी तरह निःशुल्क था।
क्या भविष्य में भी ऐसे दौरे आयोजित होंगे?
सेना के अनुसार, इस प्रकार के दौरे नियमित रूप से आयोजित किए जाते हैं ताकि जम्मू-कश्मीर के दुर्गम इलाकों के और अधिक युवा देश की प्रगति से जुड़ सकें। आगामी महीनों में ऐसे और कार्यक्रमों की संभावना जताई जा रही है।
राष्ट्र प्रेस
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