राम मंदिर चढ़ावा विवाद: सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई अगले हफ्ते, सपा सांसद अवधेश प्रसाद ने ट्रस्ट भंग करने की माँग की
सारांश
मुख्य बातें
सर्वोच्च न्यायालय में राम मंदिर चढ़ावा मामले में दाखिल याचिका पर अगले सप्ताह सुनवाई होने की संभावना है। शीर्ष अदालत ने इस प्रकरण में एसआईटी की जाँच रिपोर्ट भी तलब की है और श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को नोटिस जारी किया है। अयोध्या से समाजवादी पार्टी के सांसद अवधेश प्रसाद ने इस घटनाक्रम पर तीखी प्रतिक्रिया दी है और ट्रस्ट को तत्काल भंग किए जाने की माँग की है।
सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप
सपा सांसद अवधेश प्रसाद ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय का इस मामले में संज्ञान लेना एक सराहनीय कदम है। उन्होंने कहा, 'सुप्रीम कोर्ट का गरिमामय इतिहास रहा है। देश में तमाम ऐसे क्षण आए जब संविधान पर संकट उत्पन्न हुआ, लेकिन शीर्ष अदालत ने हमेशा निष्पक्षता बनाए रखी।' प्रसाद ने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट की पहल से ही देश में भाईचारे का माहौल बना है और उन्हें न्यायालय पर पूरा भरोसा है।
भाजपा और संविधान पर आरोप
प्रसाद ने आरोप लगाया कि भारत की 'अनेकता में एकता' की परंपरा को भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने तोड़ने की कोशिश की और संविधान पर कई बार हमला करने के प्रयास हुए। उनके अनुसार, सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप ने ही इस एकता के सूत्र को बनाए रखा है। गौरतलब है कि राम मंदिर चढ़ावा चोरी का विवाद करोड़ों श्रद्धालुओं की भावनाओं से जुड़ा मामला है, जिसे प्रसाद ने 'बड़ा मुद्दा' करार दिया।
ट्रस्ट पर कड़ा रुख
सपा सांसद ने 22 जुलाई को होने वाली ट्रस्ट की बैठक को अप्रासंगिक बताते हुए कहा कि 'ट्रस्ट को भंग कर दिया जाना चाहिए और इसमें शामिल लोगों को मंदिर के बाहर खड़ा किया जाना चाहिए।' उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि ट्रस्ट के सदस्यों को राम मंदिर के संदर्भ में कुछ भी कहने का नैतिक अधिकार नहीं है, क्योंकि उन्हीं पर अँगुलियाँ उठ रही हैं।
सीईओ नियुक्ति और एसआईटी जाँच पर रुख
राम मंदिर निर्माण के लिए संयुक्त कार्यकारी अधिकारी (CEO) पद हेतु आवेदन आने पर प्रसाद ने कहा कि चूँकि पूरा मामला सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में है, इसलिए किसी भी प्रकार की अग्रिम कार्रवाई न तो उचित है और न ही वैधानिक। साथ ही उन्होंने एसआईटी की जाँच से असंतोष जताते हुए कहा कि यह असंख्य लोगों की भावनाओं से जुड़ा मामला है और उनकी भावनाओं का सम्मान होना चाहिए।
आगे क्या होगा
सर्वोच्च न्यायालय में अगले सप्ताह होने वाली सुनवाई में एसआईटी रिपोर्ट और ट्रस्ट के जवाब पर विचार होने की उम्मीद है। यह मामला न केवल कानूनी, बल्कि धार्मिक और राजनीतिक दृष्टि से भी अत्यंत संवेदनशील है। न्यायालय का अगला कदम इस पूरे विवाद की दिशा तय करेगा।