सेंसेक्स 417 अंक टूटा, 76,152 पर बंद; IT-FMCG में बिकवाली, स्मॉलकैप में तेजी
सारांश
मुख्य बातें
BSE सेंसेक्स गुरुवार, 3 सितंबर को 417.49 अंक यानी 0.55 प्रतिशत की गिरावट के साथ 76,152.86 पर बंद हुआ, जबकि NSE निफ्टी 50 41 अंक या 0.17 प्रतिशत लुढ़ककर 23,873.45 पर आ गया। भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी के दबाव ने बाजार की रिकवरी की रफ्तार को थाम दिया।
लार्जकैप में दबाव, मिड-स्मॉलकैप में उत्साह
गिरावट मुख्य रूप से लार्जकैप शेयरों तक सीमित रही। इसके विपरीत, निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 233.60 अंक यानी 0.37 प्रतिशत की बढ़त के साथ 63,235.20 पर और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 238.50 अंक यानी 1.20 प्रतिशत की तेजी के साथ 20,050.75 पर बंद हुआ। विशेषज्ञों के अनुसार स्मॉलकैप में यह खरीदारी भारत की दीर्घकालिक विकास संभावनाओं में निवेशकों के भरोसे को दर्शाती है।
सेक्टोरल प्रदर्शन: रियल्टी-बैंकिंग आगे, IT-FMCG पिछड़े
सेक्टर-वार देखें तो निफ्टी रियल्टी 2.58 प्रतिशत की सबसे बड़ी बढ़त के साथ शीर्ष पर रहा। इसके अलावा निफ्टी मीडिया 1.74 प्रतिशत, निफ्टी इंडिया डिफेंस 0.51 प्रतिशत, निफ्टी प्राइवेट बैंक 0.51 प्रतिशत, निफ्टी पीएसयू बैंक 0.48 प्रतिशत, निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज 0.43 प्रतिशत, निफ्टी एनर्जी 0.30 प्रतिशत और निफ्टी सर्विसेज 0.16 प्रतिशत की बढ़त के साथ बंद हुए।
दूसरी ओर, निफ्टी IT 0.85 प्रतिशत, निफ्टी FMCG 0.62 प्रतिशत, निफ्टी ऑटो 0.52 प्रतिशत, निफ्टी कंजम्पशन 0.50 प्रतिशत और निफ्टी हेल्थकेयर 0.46 प्रतिशत की कमजोरी के साथ बंद हुए।
प्रमुख गेनर और लूजर
सेंसेक्स के शीर्ष लाभ में Axis Bank, Adani Ports, Asian Paints, HDFC Bank, Bharti Airtel, BEL और Tata Steel रहे। वहीं Titan, Trent, ITC, M&M, Bajaj Finserv, HCL Tech, Tech Mahindra, TCS, UltraTech Cement, Bajaj Finance, Kotak Mahindra Bank और Maruti Suzuki नुकसान में रहे।
विशेषज्ञों का विश्लेषण
बाजार जानकारों के अनुसार, वैश्विक स्तर पर सकारात्मक संकेत और विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की नई खरीदारी के बावजूद भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी ने बाजार की रिकवरी को सीमित रखा। कच्चे तेल की ऊँची कीमतें घरेलू बाजार के लिए एक बड़ी चुनौती बनी हुई हैं।
यह ऐसे समय में आया है जब भारत की मजबूत आर्थिक वृद्धि और हाल ही में सॉवरेन रेटिंग में सुधार जैसे सकारात्मक कारक मौजूद हैं। गौरतलब है कि बाजार की आगे की दिशा मुख्यतः वैश्विक मैक्रो परिस्थितियों और भू-राजनीतिक जोखिमों के घटनाक्रम पर निर्भर करेगी।