दक्षिण कच्छ की खाड़ी में 193 डॉल्फिन दर्ज, गीर फाउंडेशन के 16 माह के अध्ययन में बड़ा खुलासा
सारांश
मुख्य बातें
गुजरात के दक्षिण कच्छ की खाड़ी में डॉल्फिन सर्वाधिक देखे जाने वाले समुद्री स्तनधारी जीव के रूप में सामने आई हैं। गुजरात इकोलॉजिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (गीर) फाउंडेशन द्वारा अक्टूबर 2023 से फरवरी 2025 के बीच किए गए विस्तृत सर्वेक्षण में शोधकर्ताओं ने 64 अवसरों पर कुल 193 डॉल्फिन दर्ज कीं, जो समस्त दर्ज समुद्री स्तनधारियों का 36.2 प्रतिशत है। यह अध्ययन गुजरात वन विभाग के निर्देशन में आयोजित किया गया और इसके निष्कर्ष क्षेत्रीय समुद्री संरक्षण नीति के लिए महत्वपूर्ण आधाररेखा प्रदान करते हैं।
अध्ययन का दायरा और पद्धति
'स्टेटस सर्वे ऑफ डुगोंग एंड अदर मरीन मैमल्स, एंड इकोलॉजिकल असेसमेंट ऑफ सीग्रास हैबिटेट्स अराउंड नरारा एंड एडजसेंट आइलैंड, गल्फ ऑफ कच्छ' शीर्षक से किए गए इस सर्वेक्षण में मरीन नेशनल पार्क, मरीन सेंचुरी और आसपास के तटीय क्षेत्रों को शामिल किया गया। नाव के माध्यम से संचालित इस सर्वेक्षण में रीफ की सीमाएं, ज्वार-भाटा की नहरें, द्वीपों के किनारे और उथले तटीय क्षेत्र सम्मिलित थे। कुल 177 बार समुद्री जीवों के समूह देखे गए, जिनमें 342 समुद्री स्तनधारी दर्ज हुए।
मुख्य निष्कर्ष: कहाँ और कितनी डॉल्फिन
वन एवं पर्यावरण विभाग के प्रधान सचिव विनोद राव के अनुसार, नरारा रीफ डॉल्फिन की उपस्थिति का सबसे प्रमुख क्षेत्र रहा, जहाँ 14 बार कुल 39 डॉल्फिन देखी गईं। देड़का-मुंडेका द्वीप समूह में 12 बार 41 डॉल्फिन, पिरोटन द्वीप पर 32 डॉल्फिन, धाणी द्वीप पर 9 बार 28 डॉल्फिन और सिक्का के तटीय क्षेत्रों में 8 बार 26 डॉल्फिन दर्ज की गईं। अन्य सर्वेक्षण स्थलों पर 10 बार 27 डॉल्फिन देखी गईं।
डॉल्फिन के व्यवहार और आवास की विशेषताएँ
गीर फाउंडेशन के निदेशक बी.पी. पति ने बताया कि डॉल्फिन मुख्यतः रीफ की सीमाओं, द्वीपों के किनारों, ज्वार-भाटा की नहरों और खुले समुद्री जल में देखी गईं। खाड़ी की तेज ज्वारीय धाराएँ पोषक तत्वों और मछलियों को एकत्रित करती हैं, जिससे डॉल्फिन के लिए शिकार करना सुगम हो जाता है। सर्वेक्षण में 1-2 से लेकर 16 डॉल्फिन तक के समूह दर्ज हुए, और उन्हें समूह में तैरते, ज्वारीय धाराओं के साथ दिशा बदलते तथा विशेष तरीके से शिकार करते देखा गया।
अध्ययन का सबसे उल्लेखनीय निष्कर्ष यह रहा कि डॉल्फिन पूरे वर्ष दक्षिण कच्छ की खाड़ी में दिखाई दीं। पति के अनुसार, इससे संकेत मिलता है कि डॉल्फिन की आबादी का एक हिस्सा इस क्षेत्र में स्थायी या अर्ध-स्थायी रूप से निवास करता है, न कि केवल किसी विशेष मौसम में यहाँ आता है।
सरकार की प्रतिक्रिया और संरक्षण प्रतिबद्धता
वन एवं पर्यावरण मंत्री अर्जुन मोढवाडिया ने कहा कि मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में राज्य सरकार प्राकृतिक विरासत और समुद्री जैव-विविधता के संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध है। वन एवं पर्यावरण राज्य मंत्री प्रवीण माली ने गीर फाउंडेशन की टीम और वन विभाग के संरक्षण प्रयासों की सराहना की।
प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) जयपाल सिंह ने कहा कि दक्षिण कच्छ की खाड़ी रीफ, सीग्रास मैदानों और ज्वार-भाटा की नहरों से मिलकर बना एक गतिशील समुद्री आवास है, जो अनेक समुद्री प्रजातियों के लिए अनुकूल वातावरण प्रदान करता है।
आगे की राह: संरक्षण की आधाररेखा
गीर फाउंडेशन के उप निदेशक अमितकुमार नायक ने कहा कि विभिन्न मौसमों में विभिन्न स्थानों पर लगातार डॉल्फिन की उपस्थिति दर्ज होना भविष्य के संरक्षण प्रयासों के लिए महत्वपूर्ण आधाररेखा साबित होगी। यह डेटा कच्छ की खाड़ी को डॉल्फिन के सुरक्षित आवास के रूप में संरक्षित रखने की दिशा में नीति-निर्माण को वैज्ञानिक आधार देगा।