नए आपराधिक कानूनों में असम का 92.16% अनुपालन स्कोर, राष्ट्रीय औसत 74.86% से कहीं आगे: सीएम सरमा
सारांश
मुख्य बातें
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने 3 सितंबर 2026 को घोषणा की कि असम नए आपराधिक कानूनों — 'न्याय संहिता' — को लागू करने में देश के शीर्ष प्रदर्शन करने वाले राज्यों में शामिल हो गया है। राज्य का अनुपालन स्कोर 92.16% दर्ज किया गया है, जबकि राष्ट्रीय औसत मात्र 74.86% है।
मुख्य उपलब्धियाँ
सीएम सरमा ने बताया कि असम ने नई आपराधिक न्याय प्रणाली से जुड़े कई अहम पैमानों पर 100% अनुपालन हासिल किया है। इनमें 'न्याय संहिता' को लागू करना और 'मॉडल नियमों' को अपनाना शामिल है।
इसके अतिरिक्त, राज्य ने इंटर-ऑपरेबल क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम (ICJS) डेटा शेयरिंग मैट्रिक्स में पूर्ण अनुपालन दर्ज किया है — यह प्रणाली विभिन्न जाँच एजेंसियों और न्यायिक संस्थाओं के बीच सूचनाओं के निर्बाध आदान-प्रदान को सुनिश्चित करती है।
नेशनल ऑटोमेटेड फिंगरप्रिंट आइडेंटिफिकेशन सिस्टम (NAFIS) और मेडिको-लीगल एग्जामिनेशन एवं पोस्ट-मॉर्टम रिपोर्टिंग सिस्टम में भी असम ने 100% अनुपालन दर्ज किया है।
नए कानूनों की पृष्ठभूमि
तीन नए आपराधिक कानून — भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम — 1 जुलाई 2024 से प्रभाव में आए। इन्होंने क्रमशः भारतीय दंड संहिता (IPC), दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) और पुराने भारतीय साक्ष्य अधिनियम की जगह ली। यह भारत के आपराधिक न्याय ढाँचे में एक ऐतिहासिक बदलाव माना जा रहा है।
सरकार की प्रतिक्रिया
सीएम सरमा ने कहा कि यह प्रगति तकनीक के अधिक उपयोग, एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय और नए कानूनी प्रावधानों के प्रति राज्य की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। उन्होंने कहा, "हर पीड़ित की बात सुनी जाती है, हर मामले को अंत तक आगे बढ़ाया जाता है, और हर नागरिक को समय पर न्याय मिलता है।"
आम जनता पर असर
गौरतलब है कि यह मूल्यांकन ऐसे समय में आया है जब देश के विभिन्न राज्य पुलिसिंग, जाँच, अभियोजन और न्यायिक प्रक्रियाओं को नए कानूनी ढाँचे के अनुरूप ढालने में संघर्ष कर रहे हैं। असम का उच्च अनुपालन स्कोर यह संकेत देता है कि राज्य में पीड़ितों को अपेक्षाकृत तेज़ और तकनीक-समर्थित न्याय मिलने की संभावना बढ़ी है।
आगे क्या
असम सरकार के अनुसार, नई प्रणाली के तहत मामलों को उनके तार्किक निष्कर्ष तक पहुँचाने की प्रक्रिया जारी रहेगी। यह प्रदर्शन अन्य राज्यों के लिए एक संदर्भ बिंदु बन सकता है, विशेष रूप से उन राज्यों के लिए जो राष्ट्रीय औसत से पीछे हैं।