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असम की अदालतों में 5.75 लाख मामले लंबित, 40 न्यायिक पद रिक्त: विधानसभा में खुलासा

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असम की अदालतों में 5.75 लाख मामले लंबित, 40 न्यायिक पद रिक्त: विधानसभा में खुलासा

सारांश

असम की अदालतों में 5,75,541 मामले लंबित हैं और 40 न्यायिक पद खाली हैं — यह आँकड़े राज्य विधानसभा में सरकार ने खुद पेश किए। 7,904 विचाराधीन कैदियों के साथ न्यायिक विलंब अब केवल संख्या नहीं, एक मानवीय संकट बन चुका है।

मुख्य बातें

31 मई 2026 तक असम की अदालतों में कुल 5,75,541 मामले लंबित — जिनमें 1,14,296 दीवानी और 4,61,245 आपराधिक मामले शामिल।
स्वीकृत 486 न्यायिक पदों में से 40 पद रिक्त ; सरकार ने भर्ती प्रक्रिया जारी होने की जानकारी दी।
अपर्याप्त बुनियादी ढाँचे के कारण कुछ अदालतें अभी तक पूरी तरह चालू नहीं हो पाई हैं।
13 जुलाई 2026 तक 7,904 विचाराधीन कैदी , जिनमें 1,049 लंबे समय से मुकदमे का सामना कर रहे हैं।
लोक अदालतों ने पाँच वर्षों में 5,71,226 मामलों का निपटारा कर न्यायिक बोझ कम करने में योगदान दिया।
राज्य में 40 त्वरित न्यायालय और 6 विशेष न्यायालय कार्यरत; कोई वाणिज्यिक न्यायालय नहीं।

असम के कानून और न्याय मंत्री सुशांत बोरगोहेन ने 22 जुलाई 2026 को मानसून सत्र के दौरान असम विधानसभा में बताया कि राज्य की अदालतों में 31 मई 2026 तक कुल 5,75,541 मामले लंबित हैं, जबकि स्वीकृत 486 न्यायिक पदों में से 40 पद अभी भी रिक्त हैं। यह खुलासा वरिष्ठ कांग्रेस विधायक जाकिर हुसैन सिकदर के एक प्रश्न के उत्तर में किया गया।

लंबित मामलों का विवरण

विधानसभा में प्रस्तुत आधिकारिक आँकड़ों के अनुसार, कुल 5,75,541 लंबित मामलों में 1,14,296 दीवानी मामले और 4,61,245 आपराधिक मामले शामिल हैं। आपराधिक मामलों की संख्या दीवानी मामलों की तुलना में लगभग चार गुना अधिक है, जो न्यायिक प्रणाली पर दबाव की गंभीरता को दर्शाती है।

गौरतलब है कि राज्य में 40 त्वरित न्यायालय और 6 विशेष न्यायालय कार्यरत हैं, लेकिन असम में अभी तक कोई वाणिज्यिक न्यायालय स्थापित नहीं हुआ है।

पाँच वर्षों में निपटारे का रुझान

राज्य सरकार द्वारा साझा किए गए आँकड़े बताते हैं कि अधीनस्थ न्यायालयों में मामलों के निपटारे की गति में उतार-चढ़ाव आया है। 2021 में 35,536 दीवानी और 1,46,810 आपराधिक मामलों का निपटारा हुआ। 2022 में यह संख्या बढ़कर 45,184 दीवानी और 2,26,175 आपराधिक मामले हो गई।

2023 में 45,555 दीवानी और 3,27,728 आपराधिक मामलों का निपटारा किया गया — जो पाँच वर्षों में आपराधिक मामलों के निपटारे का उच्चतम आँकड़ा रहा। 2024 में 50,483 दीवानी और 2,33,399 आपराधिक, तथा 2025 में 53,348 दीवानी और 1,95,636 आपराधिक मामलों का निपटारा हुआ।

रिक्त पद और बुनियादी ढाँचे की चुनौती

मंत्री बोरगोहेन ने स्वीकार किया कि अपर्याप्त बुनियादी ढाँचे के कारण कुछ अदालतें अभी तक पूरी तरह चालू नहीं हो पाई हैं, जिससे कुछ क्षेत्रों में न्यायिक कामकाज प्रभावित हुआ है। उन्होंने सदन को आश्वस्त किया कि 40 रिक्त न्यायिक पदों को भरने की प्रक्रिया जारी है।

यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में न्यायिक रिक्तियाँ और लंबित मामले राष्ट्रीय चिंता का विषय बने हुए हैं। आलोचकों का कहना है कि रिक्तियाँ भरने की 'प्रक्रिया जारी है' जैसे आश्वासन पर्याप्त नहीं हैं — ठोस समयसीमा और जवाबदेही तंत्र की आवश्यकता है।

विचाराधीन कैदी और महिला-बाल सुरक्षा उपाय

विधानसभा को बताया गया कि 13 जुलाई 2026 तक असम में 7,904 विचाराधीन कैदी थे, जिनमें 1,049 ऐसे कैदी शामिल हैं जिन पर लंबे समय से मुकदमा चल रहा है। यह आँकड़ा न्यायिक विलंब के मानवीय पहलू को उजागर करता है।

मंत्री ने महिलाओं और बच्चों से जुड़े मामलों के त्वरित निपटारे के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी दी, जिनमें 181 महिला हेल्पलाइन, सखी वन स्टॉप सेंटर, पॉक्सो न्यायालय, चाइल्ड फ्रेंडली पुलिस सेंटर, शिशु मित्र हेल्पलाइन और ई-कोर्ट परियोजना शामिल हैं।

लोक अदालतों की भूमिका

मंत्री बोरगोहेन ने बताया कि लोक अदालतों ने पिछले पाँच वर्षों में 5,71,226 मामलों का निपटारा किया है, जिससे नियमित न्यायालयों पर बोझ कम करने में मदद मिली है। यह आँकड़ा वैकल्पिक विवाद समाधान तंत्र की बढ़ती भूमिका को रेखांकित करता है। रिक्त पदों के शीघ्र भराव और बुनियादी ढाँचे के विस्तार के बिना लंबित मामलों में उल्लेखनीय कमी लाना कठिन होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

वे न्यायिक संकट की गहराई को उजागर करते हैं — लेकिन 'प्रक्रिया जारी है' जैसे जवाब समस्या की गंभीरता के अनुरूप नहीं हैं। पाँच वर्षों में निपटारे की गति बढ़ी है, फिर भी लंबित मामलों का अंबार कम नहीं हुआ — यह संकेत है कि नए मामले दर्ज होने की रफ्तार निपटारे से कहीं अधिक है। 7,904 विचाराधीन कैदियों में से 1,049 का लंबे समय से मुकदमा चलना 'न्याय में देरी, न्याय से वंचित' की उस पुरानी कहावत को जीवंत करता है जिसे नीति-निर्माता अक्सर उद्धृत करते हैं लेकिन हल करने से चूक जाते हैं। बिना समयबद्ध भर्ती और बुनियादी ढाँचे के विस्तार के, ये आँकड़े अगले मानसून सत्र में भी उतने ही निराशाजनक हो सकते हैं।
RashtraPress
6 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

असम की अदालतों में कितने मामले लंबित हैं?
आधिकारिक आँकड़ों के अनुसार, 31 मई 2026 तक असम की अदालतों में कुल 5,75,541 मामले लंबित थे। इनमें 1,14,296 दीवानी और 4,61,245 आपराधिक मामले शामिल हैं।
असम में कितने न्यायिक पद रिक्त हैं और इन्हें कब भरा जाएगा?
असम में न्यायिक अधिकारियों की स्वीकृत संख्या 486 है, जिनमें से 40 पद रिक्त हैं। कानून मंत्री सुशांत बोरगोहेन ने विधानसभा को बताया कि रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया जारी है, हालाँकि कोई निश्चित समयसीमा नहीं बताई गई।
असम में विचाराधीन कैदियों की स्थिति क्या है?
13 जुलाई 2026 तक असम में 7,904 विचाराधीन कैदी थे। इनमें से 1,049 कैदी ऐसे हैं जिन पर लंबे समय से मुकदमा चल रहा है, जो न्यायिक विलंब के मानवीय प्रभाव को दर्शाता है।
असम में लोक अदालतों ने कितने मामले निपटाए हैं?
लोक अदालतों ने पिछले पाँच वर्षों में 5,71,226 मामलों का निपटारा किया है। यह वैकल्पिक विवाद समाधान तंत्र न्यायालयों पर बोझ कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
असम में महिलाओं और बच्चों के मामलों के लिए क्या विशेष व्यवस्था है?
राज्य सरकार ने महिलाओं और बच्चों से जुड़े मामलों के त्वरित निपटारे के लिए 181 महिला हेल्पलाइन, सखी वन स्टॉप सेंटर, पॉक्सो न्यायालय, चाइल्ड फ्रेंडली पुलिस सेंटर, शिशु मित्र हेल्पलाइन और ई-कोर्ट परियोजना जैसे उपाय किए हैं।
राष्ट्र प्रेस
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