असम की अदालतों में 5.75 लाख मामले लंबित, 40 न्यायिक पद रिक्त: विधानसभा में खुलासा
सारांश
मुख्य बातें
असम के कानून और न्याय मंत्री सुशांत बोरगोहेन ने 22 जुलाई 2026 को मानसून सत्र के दौरान असम विधानसभा में बताया कि राज्य की अदालतों में 31 मई 2026 तक कुल 5,75,541 मामले लंबित हैं, जबकि स्वीकृत 486 न्यायिक पदों में से 40 पद अभी भी रिक्त हैं। यह खुलासा वरिष्ठ कांग्रेस विधायक जाकिर हुसैन सिकदर के एक प्रश्न के उत्तर में किया गया।
लंबित मामलों का विवरण
विधानसभा में प्रस्तुत आधिकारिक आँकड़ों के अनुसार, कुल 5,75,541 लंबित मामलों में 1,14,296 दीवानी मामले और 4,61,245 आपराधिक मामले शामिल हैं। आपराधिक मामलों की संख्या दीवानी मामलों की तुलना में लगभग चार गुना अधिक है, जो न्यायिक प्रणाली पर दबाव की गंभीरता को दर्शाती है।
गौरतलब है कि राज्य में 40 त्वरित न्यायालय और 6 विशेष न्यायालय कार्यरत हैं, लेकिन असम में अभी तक कोई वाणिज्यिक न्यायालय स्थापित नहीं हुआ है।
पाँच वर्षों में निपटारे का रुझान
राज्य सरकार द्वारा साझा किए गए आँकड़े बताते हैं कि अधीनस्थ न्यायालयों में मामलों के निपटारे की गति में उतार-चढ़ाव आया है। 2021 में 35,536 दीवानी और 1,46,810 आपराधिक मामलों का निपटारा हुआ। 2022 में यह संख्या बढ़कर 45,184 दीवानी और 2,26,175 आपराधिक मामले हो गई।
2023 में 45,555 दीवानी और 3,27,728 आपराधिक मामलों का निपटारा किया गया — जो पाँच वर्षों में आपराधिक मामलों के निपटारे का उच्चतम आँकड़ा रहा। 2024 में 50,483 दीवानी और 2,33,399 आपराधिक, तथा 2025 में 53,348 दीवानी और 1,95,636 आपराधिक मामलों का निपटारा हुआ।
रिक्त पद और बुनियादी ढाँचे की चुनौती
मंत्री बोरगोहेन ने स्वीकार किया कि अपर्याप्त बुनियादी ढाँचे के कारण कुछ अदालतें अभी तक पूरी तरह चालू नहीं हो पाई हैं, जिससे कुछ क्षेत्रों में न्यायिक कामकाज प्रभावित हुआ है। उन्होंने सदन को आश्वस्त किया कि 40 रिक्त न्यायिक पदों को भरने की प्रक्रिया जारी है।
यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में न्यायिक रिक्तियाँ और लंबित मामले राष्ट्रीय चिंता का विषय बने हुए हैं। आलोचकों का कहना है कि रिक्तियाँ भरने की 'प्रक्रिया जारी है' जैसे आश्वासन पर्याप्त नहीं हैं — ठोस समयसीमा और जवाबदेही तंत्र की आवश्यकता है।
विचाराधीन कैदी और महिला-बाल सुरक्षा उपाय
विधानसभा को बताया गया कि 13 जुलाई 2026 तक असम में 7,904 विचाराधीन कैदी थे, जिनमें 1,049 ऐसे कैदी शामिल हैं जिन पर लंबे समय से मुकदमा चल रहा है। यह आँकड़ा न्यायिक विलंब के मानवीय पहलू को उजागर करता है।
मंत्री ने महिलाओं और बच्चों से जुड़े मामलों के त्वरित निपटारे के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी दी, जिनमें 181 महिला हेल्पलाइन, सखी वन स्टॉप सेंटर, पॉक्सो न्यायालय, चाइल्ड फ्रेंडली पुलिस सेंटर, शिशु मित्र हेल्पलाइन और ई-कोर्ट परियोजना शामिल हैं।
लोक अदालतों की भूमिका
मंत्री बोरगोहेन ने बताया कि लोक अदालतों ने पिछले पाँच वर्षों में 5,71,226 मामलों का निपटारा किया है, जिससे नियमित न्यायालयों पर बोझ कम करने में मदद मिली है। यह आँकड़ा वैकल्पिक विवाद समाधान तंत्र की बढ़ती भूमिका को रेखांकित करता है। रिक्त पदों के शीघ्र भराव और बुनियादी ढाँचे के विस्तार के बिना लंबित मामलों में उल्लेखनीय कमी लाना कठिन होगा।