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अखिल गोगोई पर 32 बनाम 21 मामलों का विवाद: असम विधानसभा सचिवालय ने गृह विभाग से 13 जुलाई तक ब्योरा माँगा

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अखिल गोगोई पर 32 बनाम 21 मामलों का विवाद: असम विधानसभा सचिवालय ने गृह विभाग से 13 जुलाई तक ब्योरा माँगा

सारांश

असम विधानसभा में शपथपत्र विवाद गहराया — सचिवालय ने अखिल गोगोई के खिलाफ 32 आपराधिक मामलों का प्रमाणित रिकॉर्ड माँगा, जबकि गोगोई ने चुनावी शपथपत्र में केवल 21 दर्शाए थे। 13 जुलाई के बाद विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष निर्णायक कार्रवाई संभव।

मुख्य बातें

असम विधानसभा सचिवालय ने गृह विभाग से अखिल गोगोई के खिलाफ लंबित सभी आपराधिक मामलों का ब्योरा 13 जुलाई तक माँगा।
संसदीय कार्य मंत्री पीयूष हजारिका के अनुसार सरकारी रिकॉर्ड में गोगोई पर 32 मामले दर्ज हैं, जबकि शपथपत्र में केवल 21 का उल्लेख था।
रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद मामला विधानसभा अध्यक्ष बिस्वजीत दैमारी के समक्ष रखा जाएगा।
अब तक न गोगोई और न गृह विभाग ने सचिवालय के पत्र पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया दी है।
यह विवाद असम विधानसभा के चल रहे बजट सत्र को नया राजनीतिक आयाम दे रहा है।

असम विधानसभा सचिवालय ने निर्दलीय विधायक और रायजोर दल के प्रमुख अखिल गोगोई के खिलाफ लंबित सभी आपराधिक मामलों का प्रमाणित विवरण राज्य के गृह विभाग से माँगा है। अधिकारियों के अनुसार, सचिवालय ने गृह विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव को पत्र लिखकर यह जानकारी 13 जुलाई तक उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। यह कदम विधानसभा में आपराधिक मामलों के खुलासे को लेकर उठे तीखे विवाद के बाद उठाया गया है।

विवाद की पृष्ठभूमि

यह घटनाक्रम असम विधानसभा के चल रहे बजट सत्र के दौरान अखिल गोगोई और संसदीय कार्य मंत्री पीयूष हजारिका के बीच हुई तीखी बहस के एक दिन बाद सामने आया है। बहस का केंद्र यह था कि गोगोई ने चुनाव आयोग के समक्ष दाखिल अपने चुनावी शपथपत्र में अपने खिलाफ दर्ज सभी आपराधिक मामलों का उल्लेख किया या नहीं।

मुख्य विवाद: 32 बनाम 21 मामले

मंत्री पीयूष हजारिका ने सदन में आरोप लगाया कि सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार गोगोई के खिलाफ कुल 32 आपराधिक मामले दर्ज हैं, जबकि उन्होंने चुनावी शपथपत्र में केवल 21 मामलों का ही उल्लेख किया। हजारिका के अनुसार, यह चूक जानबूझकर की गई और इससे चुनाव आयोग तथा मतदाताओं को गलत जानकारी मिली। दोनों नेताओं ने एक-दूसरे पर सदन एवं जनता को गुमराह करने का आरोप लगाया।

सचिवालय की प्रक्रियागत कार्रवाई

एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने बताया कि गृह विभाग से जानकारी प्राप्त होने के बाद इसे असम विधानसभा अध्यक्ष बिस्वजीत दैमारी के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा, ताकि आगे की प्रक्रियागत कार्रवाई पर विचार किया जा सके। विधानसभा सचिवालय के इस कदम को किसी भी निर्णय से पहले प्रमाणित सरकारी रिकॉर्ड सुनिश्चित करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।

कानूनी पहलू

उम्मीदवारों के लिए आपराधिक मामलों के खुलासे से संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत, चुनावी शपथपत्र में जानबूझकर गलत जानकारी देना गंभीर कानूनी परिणामों को आमंत्रित कर सकता है। गौरतलब है कि यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब असम विधानसभा के बजट सत्र में पहले से कई विवादास्पद मुद्दों पर तीखी बहस हो रही है।

आगे क्या होगा

अब तक न तो अखिल गोगोई और न ही गृह विभाग ने सचिवालय के पत्र पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया दी है। 13 जुलाई को रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष इस मामले पर आगे की सुनवाई और संभावित कार्रवाई की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन विधानसभा सचिवालय का सीधे गृह विभाग से रिकॉर्ड माँगना एक असामान्य और महत्वपूर्ण प्रक्रियागत कदम है। असली परीक्षा यह होगी कि क्या विधानसभा अध्यक्ष इस रिपोर्ट के आधार पर कोई ठोस कार्रवाई करते हैं, या यह मामला राजनीतिक बयानबाजी तक सिमट कर रह जाता है।
RashtraPress
10 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

असम विधानसभा सचिवालय ने अखिल गोगोई के बारे में क्या माँगा है?
सचिवालय ने गृह विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव को पत्र लिखकर अखिल गोगोई के खिलाफ लंबित सभी आपराधिक मामलों का प्रमाणित विवरण 13 जुलाई तक माँगा है। यह जानकारी विधानसभा अध्यक्ष बिस्वजीत दैमारी के समक्ष रखी जाएगी।
अखिल गोगोई के शपथपत्र पर विवाद क्यों है?
संसदीय कार्य मंत्री पीयूष हजारिका का आरोप है कि सरकारी रिकॉर्ड में गोगोई पर 32 आपराधिक मामले दर्ज हैं, जबकि उन्होंने चुनावी शपथपत्र में केवल 21 मामलों का उल्लेख किया। इसे चुनाव आयोग के समक्ष गलत जानकारी देना बताया जा रहा है।
इस मामले में आगे क्या होगा?
13 जुलाई को गृह विभाग से रिपोर्ट मिलने के बाद इसे विधानसभा अध्यक्ष बिस्वजीत दैमारी के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। इसके बाद विधानसभा में आगे की बहस और संभावित प्रक्रियागत कार्रवाई की संभावना है।
रायजोर दल के नेता अखिल गोगोई कौन हैं?
अखिल गोगोई असम के निर्दलीय विधायक और रायजोर दल के प्रमुख हैं। वे किसान अधिकार आंदोलन से जुड़े रहे हैं और असम की राजनीति में एक प्रमुख विपक्षी आवाज़ माने जाते हैं।
चुनावी शपथपत्र में आपराधिक मामले न बताने पर क्या कानूनी परिणाम हो सकते हैं?
कानूनी प्रावधानों के अनुसार, चुनावी शपथपत्र में जानबूझकर गलत जानकारी देना जन प्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत गंभीर परिणामों को आमंत्रित कर सकता है, जिसमें निर्वाचन रद्द करने की कार्रवाई भी शामिल हो सकती है। हालाँकि, अंतिम निर्णय प्रमाणित रिकॉर्ड और कानूनी समीक्षा पर निर्भर करेगा।
राष्ट्र प्रेस
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