क्या गौरव गोगोई ने असम के मुख्यमंत्री पर लोकतांत्रिक अधिकारों को नष्ट करने का आरोप लगाया?
सारांश
Key Takeaways
- गौरव गोगोई का भाजपा पर आरोप
- लोकतांत्रिक अधिकारों का उल्लंघन
- राज्य विधानसभा चुनावों की तैयारी
- मतदाता सूचियों में हेरफेर का आरोप
- जनता का विश्वास
गुवाहाटी, 11 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी (एपीसीसी) के अध्यक्ष गौरव गोगोई ने रविवार को मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा पर गंभीर राजनीतिक आरोप लगाए। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाली सरकार पर धोखा, अन्याय और लोकतांत्रिक अधिकारों को जानबूझकर कमजोर करने का आरोप लगाया।
कांग्रेस ने राज्य विधानसभा चुनावों से पहले एक उच्च स्तरीय जनप्रेरणा कार्यक्रम का आयोजन किया। यहां मानबेंद्र शर्मा कॉम्प्लेक्स में एक सभा को संबोधित करते हुए गोगोई ने कहा कि असम की जनता के बीच मुख्यमंत्री की विश्वसनीयता पूरी तरह समाप्त हो चुकी है।
उन्होंने कहा कि असम में डर और गलत सूचना के माध्यम से शासन नहीं किया जा सकता। जब जनता एकजुट होती है, तो कोई भी सरकार उन्हें डरा नहीं सकती। असम की जनता ही असली शासक है।
इस कार्यक्रम में विभिन्न प्रतिद्वंद्वी दलों के कई प्रमुख नेताओं ने कांग्रेस में शामिल होकर आगामी विधानसभा चुनावों के लिए पार्टी की गहन तैयारियों का संकेत दिया।
गोगोई ने आरोप लगाया कि भाजपा मतदाता सूचियों में हेरफेर कर रही है और आदिवासियों, ओबीसी, एससी और अल्पसंख्यकों सहित सभी समुदायों के मतदाताओं को दबाने का प्रयास कर रही है।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस प्रत्येक मतदान केंद्र पर मतदान के अधिकार की रक्षा सुनिश्चित करेगी और मतदाता सूचियों में बाहरी लोगों के नाम शामिल होने से रोकेगी।
जुबीन गर्ग मामले को लेकर मुख्यमंत्री शर्मा पर निशाना साधते हुए गोगोई ने कहा कि एक कमजोर आरोप पत्र दायर किया गया है। उन्होंने राज्य सरकार पर राजनीतिक निकटता का लाभ उठाकर प्रभावशाली व्यक्तियों को संरक्षण देने का आरोप लगाया।
गोगोई ने इसे न्याय व्यवस्था में हस्तक्षेप का स्पष्ट मामला बताया।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस का लक्ष्य क्षेत्रीय विभाजनों को समाप्त करना और अल्पसंख्यक, भूमि और सामुदायिक मुद्दों के स्थायी समाधान सुनिश्चित करना है।
इस बीच, एपीसीसी महिला कांग्रेस अध्यक्ष मीरा बोरठाकुर ने कहा कि पार्टी को जनता का बढ़ता विश्वास प्राप्त हो रहा है।