17 अगस्त 2026
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असम CM हिमंत बिस्वा सरमा का निर्देश: जनकेंद्रित पुलिस व्यवस्था मजबूत करें, दोषसिद्धि दर सुधारें

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असम CM हिमंत बिस्वा सरमा का निर्देश: जनकेंद्रित पुलिस व्यवस्था मजबूत करें, दोषसिद्धि दर सुधारें

सारांश

असम CM हिमंत बिस्वा सरमा ने DGP के साथ समीक्षा बैठक में पुलिस को जनकेंद्रित और आधुनिक बनाने का निर्देश दिया — यह तब आया जब राज्य में 2016 से दर्ज 10 लाख मामलों में से केवल 54% में ही चार्जशीट दाखिल हो पाई है।

मुख्य बातें

मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने 17 अगस्त 2026 को गुवाहाटी में कानून-व्यवस्था की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की।
डीजीपी हरमीत सिंह और गृह विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को आधुनिक, संवेदनशील और जनकेंद्रित पुलिस व्यवस्था मजबूत करने का निर्देश दिया गया।
राज्य सरकार ने विधानसभा में माना कि 2016 से दर्ज लगभग 10 लाख मामलों में केवल 54% में ही चार्जशीट दाखिल हुई है।
बैठक में बाल विवाह , बहुविवाह रोकथाम, डायल-112 सेवा और थाना क्षेत्र पुनर्गठन पर चर्चा हुई।
मुख्य सचिव रवि कोटा ने असम राइफल्स के IGP मेजर जनरल इंदरजीत सिंह भिंडर से सुरक्षा और सीमा प्रबंधन पर अलग बैठक की।

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने सोमवार, 17 अगस्त 2026 को गुवाहाटी में राज्य की कानून व्यवस्था की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की और पुलिस अधिकारियों को आधुनिक, संवेदनशील एवं जनकेंद्रित पुलिस व्यवस्था को और सुदृढ़ करने का स्पष्ट निर्देश दिया। उन्होंने अपराध रोकथाम और प्रभावी जांच को सर्वोच्च प्राथमिकता देने पर बल दिया, ताकि अपराधियों को समय पर सजा मिल सके और दोषसिद्धि दर में उल्लेखनीय सुधार आए।

बैठक में कौन-कौन शामिल रहे

मुख्यमंत्री सरमा ने पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) हरमीत सिंह तथा पुलिस एवं गृह विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ यह समीक्षा बैठक की। बैठक में राज्य की समग्र कानून-व्यवस्था की स्थिति और पुलिस प्रशासन से जुड़े अहम मुद्दों पर विस्तार से विचार-विमर्श हुआ।

मुख्य एजेंडा और चर्चा के विषय

बैठक में जिन प्रमुख विषयों पर चर्चा हुई, उनमें शामिल हैं — बाल विवाह और बहुविवाह की रोकथाम, अपराध नियंत्रण की रणनीतियाँ, होमगार्ड और ग्राम रक्षा दलों से जुड़े सुधार, डायल-112 आपातकालीन सेवा की स्थिति, पुलिस बटालियन से संबंधित परियोजनाएँ, पुलिस आवास और पुलिस थानों के अधिकार क्षेत्र का पुनर्गठन।

मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि आपराधिक मामलों को तार्किक निष्कर्ष तक पहुँचाया जाना चाहिए और समयबद्ध जांच सुनिश्चित की जाए, ताकि न्याय प्रक्रिया में देरी न हो।

चार्जशीट दर की चिंताजनक तस्वीर

यह समीक्षा ऐसे समय में हुई है जब असम में आपराधिक मामलों की जांच की गति को लेकर गंभीर सवाल उठाए जा रहे हैं। राज्य सरकार ने 6 जुलाई को विधानसभा में स्वीकार किया था कि वर्ष 2016 से अब तक दर्ज लगभग 10 लाख मामलों में से केवल करीब 54 प्रतिशत मामलों में ही आरोपपत्र (चार्जशीट) दाखिल किए गए हैं। गौरतलब है कि 2016 में ही भारतीय जनता पार्टी (BJP) पहली बार असम में सत्ता में आई थी।

यह ऐसे समय में आया है जब राज्य में बढ़ते अपराधों के बीच पुलिस की जवाबदेही पर विपक्ष भी सवाल उठाता रहा है। मुख्यमंत्री सरमा पहले भी कई अवसरों पर पुलिस सुधार और नागरिकों को बेहतर सुरक्षा सेवाएँ उपलब्ध कराने की आवश्यकता पर बात कर चुके हैं।

असम राइफल्स से समन्वय पर भी बैठक

इसी दिन असम के मुख्य सचिव रवि कोटा ने असम राइफल्स (पूर्व) के महानिरीक्षक मेजर जनरल इंदरजीत सिंह भिंडर से मुलाकात की। दोनों के बीच राज्य और समूचे पूर्वोत्तर क्षेत्र की सुरक्षा तथा विकास से जुड़े मुद्दों पर विचार-विमर्श हुआ।

रवि कोटा के अनुसार, बैठक में नागरिक प्रशासन और सुरक्षा बलों के बीच बेहतर समन्वय — विशेष रूप से सुरक्षा, सीमा प्रबंधन और विकास कार्यों को लेकर — पर ध्यान केंद्रित किया गया। मुख्य सचिव ने पूर्वोत्तर में शांति और स्थिरता बनाए रखने में असम राइफल्स की भूमिका की सराहना की।

आगे क्या होगा

सरमा के निर्देशों के बाद पुलिस विभाग से अपेक्षा है कि वह जांच प्रक्रिया में तेजी लाने, चार्जशीट दर बढ़ाने और थानास्तरीय सुधारों के लिए एक कार्ययोजना प्रस्तुत करे। राज्य में बाल विवाह और बहुविवाह के खिलाफ अभियान को भी नई गति मिलने की उम्मीद है। असम की कानून-व्यवस्था की अगली समीक्षा बैठक में इन निर्देशों पर की गई कार्रवाई की रिपोर्ट माँगी जा सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन जमीनी बदलाव के प्रमाण सीमित रहे हैं। असली कसौटी यह होगी कि क्या इस बार जांच तंत्र में सुधार के लिए मापने योग्य लक्ष्य और जवाबदेही तय की जाती है, या यह भी महज एक और निर्देश बनकर रह जाता है।
RashtraPress
17 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

असम CM हिमंत बिस्वा सरमा ने पुलिस अधिकारियों को क्या निर्देश दिए?
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने 17 अगस्त 2026 को गुवाहाटी में DGP हरमीत सिंह और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक में पुलिस को आधुनिक, संवेदनशील और जनकेंद्रित बनाने का निर्देश दिया। उन्होंने आपराधिक मामलों की समयबद्ध जांच और दोषसिद्धि दर में सुधार पर विशेष जोर दिया।
असम में चार्जशीट दर इतनी कम क्यों है?
राज्य सरकार ने 6 जुलाई को विधानसभा में बताया कि 2016 से दर्ज लगभग 10 लाख मामलों में से केवल करीब 54% में ही चार्जशीट दाखिल हो पाई है। जांच में देरी, संसाधनों की कमी और थानों पर काम के बोझ को इसके प्रमुख कारण माना जाता है।
असम में पुलिस सुधार के तहत किन विषयों पर चर्चा हुई?
बैठक में बाल विवाह और बहुविवाह की रोकथाम, अपराध नियंत्रण रणनीतियाँ, होमगार्ड और ग्राम रक्षा दल सुधार, डायल-112 आपातकालीन सेवा, पुलिस आवास और थाना क्षेत्र पुनर्गठन जैसे अहम विषय शामिल थे।
असम राइफल्स और राज्य सरकार के बीच किस बात पर चर्चा हुई?
मुख्य सचिव रवि कोटा ने असम राइफल्स (पूर्व) के IGP मेजर जनरल इंदरजीत सिंह भिंडर से मुलाकात की, जिसमें सुरक्षा, सीमा प्रबंधन और विकास कार्यों में नागरिक प्रशासन व सुरक्षा बलों के बीच बेहतर समन्वय पर चर्चा हुई। मुख्य सचिव ने पूर्वोत्तर में शांति बनाए रखने में असम राइफल्स की भूमिका की सराहना की।
असम में पुलिस सुधार के बाद आगे क्या होने की उम्मीद है?
मुख्यमंत्री के निर्देशों के बाद पुलिस विभाग से चार्जशीट दर बढ़ाने और जांच प्रक्रिया में तेजी लाने की कार्ययोजना प्रस्तुत करने की अपेक्षा है। बाल विवाह और बहुविवाह विरोधी अभियान को भी नई गति मिलने की संभावना है।
राष्ट्र प्रेस
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