12 अगस्त 2026
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असम में बाढ़-क्षतिग्रस्त तटबंधों की मरम्मत 'मिशन मोड' में, जोरहाट के 4 ब्रेक पॉइंट पूरे: CM हिमंता

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असम में बाढ़-क्षतिग्रस्त तटबंधों की मरम्मत 'मिशन मोड' में, जोरहाट के 4 ब्रेक पॉइंट पूरे: CM हिमंता

सारांश

असम में बाढ़ से टूटे तटबंधों की मरम्मत 'मिशन मोड' में जारी है। CM हिमंता बिस्वा सरमा ने बताया कि जोरहाट के 5 में से 4 ब्रेक पॉइंट पूरे हो चुके हैं। ब्रह्मपुत्र-प्रभावित राज्य में यह कदम लाखों ग्रामीणों को दोबारा जलभराव से बचाने के लिए उठाया जा रहा है।

मुख्य बातें

असम सरकार बाढ़-क्षतिग्रस्त तटबंधों की मरम्मत 'मिशन मोड' में कर रही है।
जोरहाट जिले में 5 में से 4 ब्रेक पॉइंट की मरम्मत पूरी; सलमारा में शेष काम अंतिम चरण में।
मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने 12 अगस्त 2026 को एक्स पर यह जानकारी साझा की।
सरकार ने अधिकारियों को संवेदनशील स्थानों पर मरम्मत तेज़ करने और तटबंधों को भविष्य की बाढ़ के लिए मज़बूत बनाने के निर्देश दिए।
असम प्रतिवर्ष ब्रह्मपुत्र और सहायक नदियों की बाढ़ से घर, खेती और बुनियादी ढाँचे में भारी नुकसान झेलता है।

असम सरकार बाढ़ से टूटे तटबंधों की मरम्मत के लिए 'मिशन मोड' में काम कर रही है। मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने 12 अगस्त 2026 को जानकारी दी कि जोरहाट जिले में कुल पाँच टूटे हुए तटबंधों में से चार की मरम्मत पहले ही पूरी की जा चुकी है, जबकि सलमारा में बचा हुआ काम अंतिम चरण में है।

मुख्य घटनाक्रम

मुख्यमंत्री सरमा ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट कर बताया कि राज्य प्रशासन बाढ़ राहत अभियान के तहत प्राथमिकता के आधार पर तटबंधों की मरम्मत और सुदृढ़ीकरण का काम कर रहा है। उन्होंने लिखा, "जोरहाट में 5 में से 4 ब्रेक पॉइंट का काम पहले ही पूरा हो चुका है, सलमारा में बचा हुआ काम पूरा होने वाला है।"

सरकार ने अधिकारियों और फील्ड एजेंसियों को निर्देश दिए हैं कि संवेदनशील स्थानों पर मरम्मत कार्य में तेज़ी लाई जाए और तटबंधों को भविष्य की बाढ़ के अनुकूल मज़बूत बनाया जाए।

तटबंधों का महत्व और नुकसान की गंभीरता

असम प्रतिवर्ष ब्रह्मपुत्र और उसकी सहायक नदियों की बाढ़ की चपेट में आता है। तटबंध राज्य के बाढ़-प्रभावित गाँवों, खेतों और बुनियादी ढाँचे को बढ़ते पानी से बचाने में निर्णायक भूमिका निभाते हैं। इन संरचनाओं में दरार आने से गाँवों और कृषि भूमि में तेज़ी से जलभराव होता है, जिससे जान-माल दोनों को गंभीर खतरा उत्पन्न होता है।

गौरतलब है कि इस वर्ष बाढ़ ने कई ज़िलों में तटबंधों को व्यापक नुकसान पहुँचाया, जिसके बाद राज्य सरकार ने बाढ़ नियंत्रण ढाँचे को आपातकालीन आधार पर दुरुस्त करने की मुहिम शुरू की।

सरकार की प्रतिक्रिया और रणनीति

मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने स्पष्ट किया कि सरकार केवल तात्कालिक मरम्मत तक सीमित नहीं है, बल्कि दीर्घकालिक रोकथाम के उपायों पर भी ध्यान दे रही है। इसमें संवेदनशील इलाकों में तटबंधों को मज़बूत करना और अगली बाढ़ के मौसम से पहले बेहतर तैयारी सुनिश्चित करना शामिल है।

जोरहाट में चार ब्रेक पॉइंट पूरे होने से प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा का स्तर बढ़ेगा। सलमारा में शेष कार्य को भी प्राथमिकता के आधार पर जल्द से जल्द पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं।

आम जनता पर असर

असम के कई ज़िलों में बाढ़ से घर, कृषि भूमि, सड़कें और सार्वजनिक संपत्तियाँ प्रभावित हुई हैं। तटबंधों की समय पर मरम्मत से न केवल इन क्षेत्रों में दोबारा जलभराव का खतरा कम होगा, बल्कि किसानों और ग्रामीण समुदायों को भी राहत मिलेगी।

क्या होगा आगे

मुख्यमंत्री सरमा ने आश्वासन दिया है कि सरकार मिशन मोड में काम जारी रखेगी और बाढ़ प्रबंधन तथा कमज़ोर समुदायों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी। राज्य के व्यापक बाढ़ राहत प्रयासों के तहत अन्य ज़िलों में भी क्षतिग्रस्त तटबंधों की स्थिति की समीक्षा जारी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या ये मरम्मत कार्य दीर्घकालिक इंजीनियरिंग मानकों पर आधारित हैं या महज़ मानसून के बाद की तात्कालिक पैचवर्क है। ब्रह्मपुत्र बेसिन में बाढ़ प्रबंधन के लिए केंद्र और राज्य दोनों स्तरों पर वर्षों से धन आवंटित होता रहा है, फिर भी हर मानसून में तटबंध टूटने की खबरें आती हैं। जब तक स्वतंत्र तकनीकी ऑडिट और मरम्मत की गुणवत्ता की जवाबदेही सुनिश्चित नहीं होती, 'मिशन मोड' एक राजनीतिक संदेश से अधिक कुछ नहीं बन पाएगा।
RashtraPress
12 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

असम में बाढ़-क्षतिग्रस्त तटबंधों की मरम्मत की स्थिति क्या है?
असम सरकार 'मिशन मोड' में तटबंधों की मरम्मत कर रही है। जोरहाट जिले में 5 में से 4 ब्रेक पॉइंट की मरम्मत पूरी हो चुकी है और सलमारा में बचा हुआ काम अंतिम चरण में है।
CM हिमंता बिस्वा सरमा ने तटबंध मरम्मत के बारे में क्या कहा?
मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने 12 अगस्त 2026 को एक्स पर पोस्ट कर बताया कि जोरहाट में 5 में से 4 ब्रेक पॉइंट का काम पूरा हो चुका है। उन्होंने कहा कि सरकार बाढ़ प्रबंधन और कमज़ोर समुदायों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है।
असम में तटबंध टूटने से क्या नुकसान होता है?
तटबंध में दरार आने से गाँवों, खेतों और बुनियादी ढाँचे में तेज़ी से पानी भर जाता है। इससे घर, कृषि भूमि, सड़कें और सार्वजनिक संपत्तियाँ प्रभावित होती हैं और लाखों ग्रामीणों को विस्थापन का सामना करना पड़ता है।
असम में बाढ़ इतनी बड़ी समस्या क्यों है?
असम में ब्रह्मपुत्र और उसकी सहायक नदियों का विशाल जाल है, जिसके कारण राज्य प्रतिवर्ष मानसून में बाढ़ की चपेट में आता है। यह भौगोलिक स्थिति राज्य को भारत के सबसे बाढ़-संवेदनशील क्षेत्रों में से एक बनाती है।
सरकार भविष्य की बाढ़ से बचाव के लिए क्या कदम उठा रही है?
सरकार केवल तात्कालिक मरम्मत तक सीमित नहीं है — संवेदनशील इलाकों में तटबंधों को दीर्घकालिक रूप से मज़बूत करना और अगले बाढ़ मौसम से पहले बेहतर तैयारी सुनिश्चित करना भी इस अभियान का हिस्सा है।
राष्ट्र प्रेस
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