असम बाढ़: CM हिमंता बिस्वा सरमा ने सोनारी दौरे में तबाही को 'अभूतपूर्व' बताया, 31 मौतें, 7.27 लाख प्रभावित
सारांश
मुख्य बातें
असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने 22 जुलाई को ऊपरी असम के सोनारी उपमंडल का दौरा किया और भीषण बाढ़ से उत्पन्न स्थिति का प्रत्यक्ष जायजा लिया। उन्होंने इस आपदा को 'अभूतपूर्व' करार देते हुए कहा कि तबाही का पैमाना शुरुआती अनुमान से कहीं अधिक निकला है। राज्य सरकार के आँकड़ों के अनुसार, 29 अप्रैल से 21 जुलाई के बीच बाढ़ की चपेट में आए 25 जिलों में 7,27,506 लोग प्रभावित हुए हैं और अब तक 31 लोगों की जान जा चुकी है।
मुख्यमंत्री का ज़मीनी दौरा
मुख्यमंत्री सरमा ने जलमग्न गाँवों का भ्रमण किया और 95 राहत शिविरों में आश्रय ले रहे विस्थापित परिवारों से मुलाकात की। उन्होंने बचाव, राहत और पुनर्वास कार्यों की प्रगति पर जिला अधिकारियों के साथ विस्तृत चर्चा की। दूरस्थ और दुर्गम क्षेत्रों में फँसे निवासियों तक पहुँचने में बचाव एजेंसियों के सामने आ रही रसद संबंधी चुनौतियों की भी उन्होंने समीक्षा की।
मुख्यमंत्री के बयान
पत्रकारों से बात करते हुए सरमा ने कहा, 'हालात अभूतपूर्व हैं। बड़ी संख्या में लोगों को राहत शिविरों में शरण लेनी पड़ी है, जबकि कई अन्य अभी भी बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में फँसे हुए हैं। हमने कई मौतें देखी हैं और राहत कार्य अभी भी जारी हैं।' उन्होंने स्पष्ट किया कि नुकसान का पूरा आकलन अभी बाकी है।
बचाव अभियान में लगी एजेंसियाँ
मुख्यमंत्री ने बताया कि राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF), राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF), भारतीय सेना, असम पुलिस और जिला प्रशासन के कर्मी फँसे हुए लोगों को बचाने और प्रभावित परिवारों तक राहत पहुँचाने के लिए चौबीसों घंटे काम कर रहे हैं। 95 राहत शिविरों में अब तक 18,574 विस्थापित लोगों को आश्रय दिया जा चुका है।
केंद्र सरकार की भूमिका और वित्तीय सहायता
आपदा प्रबंधन में केंद्र की भूमिका पर सरमा ने कहा कि राज्य सरकार के पास उपलब्ध संपूर्ण आपदा राहत कोष केंद्र सरकार द्वारा प्रदान किया जाता है। उन्होंने कहा, 'केंद्र बचाव और राहत गतिविधियों का खर्च वहन करता है, और यदि अतिरिक्त संसाधनों की आवश्यकता होती है, तो हम आगे की सहायता के लिए प्रधानमंत्री से संपर्क करेंगे।' उन्होंने यह भी बताया कि केंद्र सरकार आपदा प्रबंधन के लिए अग्रिम निधि जारी करती है और स्थिति की गंभीरता के आधार पर अतिरिक्त आवंटन की माँग की जा सकती है।
आगे की स्थिति
यह दौरा ऐसे समय में हुआ है जब असम में बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है और कई लोग अभी भी जलमग्न क्षेत्रों में फँसे हैं। गौरतलब है कि असम हर वर्ष मानसून के दौरान भीषण बाढ़ का सामना करता है, किंतु अधिकारियों के अनुसार इस बार की आपदा का पैमाना असाधारण है। राहत और पुनर्वास कार्यों के साथ-साथ नुकसान के पूर्ण आकलन की प्रक्रिया जारी है।