30 जून 2026
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गुजरात में इको-मरीन टूरिज्म को ₹20 करोड़ का बूस्ट, 1,600 किमी तटरेखा पर नए पर्यटन केंद्र विकसित होंगे

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गुजरात में इको-मरीन टूरिज्म को ₹20 करोड़ का बूस्ट, 1,600 किमी तटरेखा पर नए पर्यटन केंद्र विकसित होंगे

सारांश

गुजरात सरकार ने ₹20 करोड़ के बजट के साथ 1,600 किमी तटरेखा पर इको-मरीन टूरिज्म और आइलैंड डेवलपमेंट की महत्वाकांक्षी योजना शुरू की है — बेट द्वारका में डॉल्फिन, ओखामढ़ी में कछुए और पिरोटन में मरीन पार्क के साथ गुजरात अब देश का प्रमुख इको-टूरिज्म हब बनने की राह पर है।

मुख्य बातें

गुजरात सरकार ने इको-मरीन टूरिज्म और आइलैंड डेवलपमेंट के लिए लगभग ₹20 करोड़ का बजट आवंटित किया है।
कच्छ से वलसाड तक 1,600 किलोमीटर लंबी तटरेखा पर कच्छ, द्वारका, जामनगर, पोरबंदर और सौराष्ट्र में नए पर्यटन केंद्र विकसित होंगे।
बेट द्वारका में डॉल्फिन इको-टूरिज्म, ओखामढ़ी में टर्टल टूरिज्म और पिरोटन में मरीन इन्फ्रास्ट्रक्चर विकसित किया जाएगा; तट पर लगभग 680 डॉल्फिन पर्यटन आकर्षण बनेंगी।
जामनगर-द्वारका क्षेत्र के 22 द्वीपों को इको-टूरिज्म साइट के रूप में विकसित करने का निर्णय लिया गया है।
पंचमहल के जंबूघोड़ा अभयारण्य और डांग के सापुतारा हिल स्टेशन पर भी पर्यटन गतिविधियाँ तेज़ हो रही हैं, जिससे स्थानीय रोज़गार और व्यापार को प्रोत्साहन मिल रहा है।

मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में गुजरात सरकार ने राज्य की 1,600 किलोमीटर लंबी तटरेखा और समृद्ध जैव विविधता को वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर स्थापित करने के लिए इको-टूरिज्म, मरीन टूरिज्म और आइलैंड डेवलपमेंट को प्राथमिकता देते हुए लगभग ₹20 करोड़ का बजट आवंटित किया है। 30 जून 2026 को गांधीनगर से जारी जानकारी के अनुसार, यह पहल राज्य के तटीय और वन क्षेत्रों को ग्लोबल टूरिज्म हब के रूप में विकसित करने की दिशा में एक निर्णायक कदम है।

मरीन टूरिज्म: कच्छ से वलसाड तक नई संभावनाएँ

कच्छ से वलसाड तक फैली 1,600 किलोमीटर की विशाल तटरेखा गुजरात को मरीन टूरिज्म के लिए असाधारण संभावनाओं से भरपूर बनाती है। पर्यटन विभाग के अनुसार, कच्छ, द्वारका, जामनगर, पोरबंदर और सौराष्ट्र के कई तटीय क्षेत्रों को नए पर्यटन केंद्रों के रूप में विकसित किया जा रहा है। इसके तहत बेट द्वारका में डॉल्फिन इको-टूरिज्म, ओखामढ़ी में टर्टल टूरिज्म, तथा नरारा और पिरोटन में मरीन टूरिज्म इन्फ्रास्ट्रक्चर विकसित किया जाएगा।

वन और पर्यावरण मंत्री अर्जुन मोढवाडिया ने बताया कि जामनगर और द्वारका क्षेत्र में लगभग 22 द्वीप हैं। उन्होंने कहा कि पिरोटन समेत मरीन नेशनल पार्क को इको-टूरिज्म साइट के रूप में विकसित करने का निर्णय लिया गया है। उन्होंने आगे बताया कि इस तट पर लगभग 680 डॉल्फिन हैं, जो पर्यटकों के लिए सबसे बड़ा आकर्षण बन सकती हैं। सौराष्ट्र में तीन स्थानों पर समुद्री कछुओं के लिए मरीन टर्टल ब्रीडिंग सेंटर भी स्थापित किए गए हैं।

सरकार की सौराष्ट्र के माधवपुर, नवदरा, घोघा और जाफराबाद जैसे तटीय इलाकों को भी पर्यटन मानचित्र पर लाने की तैयारी है। द्वारका के होटल व्यवसायी निर्मल सामानी ने बताया कि कोविड के बाद धार्मिक पर्यटन में द्वारका ने उल्लेखनीय प्रगति की है। उन्होंने कहा कि ओखा के तटीय क्षेत्र में डॉल्फिन दर्शन, पोषितारा में समुद्री जीवन और वॉटर स्पोर्ट्स आधारित एडवेंचर टूरिज्म से रोज़गार के नए अवसर सामने आ रहे हैं।

इको-टूरिज्म: जंगल, जनजाति और प्रकृति का संगम

मरीन टूरिज्म के साथ-साथ गुजरात सरकार इको-टूरिज्म के विस्तार में भी सक्रिय है। पंचमहल जिले के जंबूघोड़ा अभयारण्य में स्थित भाट और धनपुरी इको-टूरिज्म सेंटर इसके प्रमुख उदाहरण हैं। घने जंगलों, ट्रेकिंग, जंगल सफारी और स्थानीय आदिवासी संस्कृति से जुड़े ये केंद्र पर्यटकों को विशिष्ट अनुभव प्रदान कर रहे हैं।

वडोदरा से भाट आई पर्यटक मीना शाह ने कहा कि यहाँ का वातावरण बेहद अच्छा है और यह स्थान प्रकृति-प्रेमियों के लिए आदर्श है। एक अन्य पर्यटक प्रदीप शाह ने कहा कि शहर के निकट होने के बावजूद यहाँ प्रकृति के साथ रहने की पूरी व्यवस्था है।

इसके अतिरिक्त, गिर अभयारण्य — जो एशियाई शेरों का प्राथमिक निवास है — और उनके द्वितीयक निवास बरडा वन्य अभयारण्य को भी इको-टूरिज्म सर्किट में जोड़ा जा रहा है।

सापुतारा: पहाड़ों पर उत्सव और रोज़गार

डांग जिले में स्थित राज्य का एकमात्र हिल स्टेशन सापुतारा भी सरकारी नीतियों के फलस्वरूप पर्यटन का बड़ा केंद्र बन रहा है। पर्यटन विभाग द्वारा आयोजित फेस्टिवल, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और पर्यटन गतिविधियों से यहाँ पर्यटकों की संख्या निरंतर बढ़ रही है।

सापुतारा होटल एसोसिएशन के सचिव तुकाराम कर्डीले ने बताया कि गुजरात टूरिज्म द्वारा आयोजित मानसून फेस्टिवल से हर वर्ष पर्यटकों की संख्या में वृद्धि हो रही है। स्थानीय महिला उद्यमी नीलाक्षी पटेल ने कहा कि सापुतारा के अनुकूल मौसम और वर्षभर होने वाले उत्सवों के कारण छोटे-बड़े व्यापारियों को रोज़गार के भरपूर अवसर मिल रहे हैं।

स्थानीय अर्थव्यवस्था और रोज़गार पर असर

मरीन टूरिज्म और इको-टूरिज्म से जुड़ी परियोजनाएँ राज्य में न केवल पर्यटन को बढ़ावा दे रही हैं, बल्कि स्थानीय युवाओं, हस्तशिल्पियों, होटल उद्योग, रेस्टोरेंट संचालकों और छोटे व्यापारियों के लिए आजीविका के नए द्वार भी खोल रही हैं। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य सरकार पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक विकास के बीच संतुलन साधने की कोशिश कर रही है।

गौरतलब है कि गुजरात पहले से ही धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन में अग्रणी राज्यों में शुमार है। अब इको-मरीन टूरिज्म की दिशा में यह विस्तार राज्य को देश के सबसे विविध पर्यटन गंतव्यों में स्थापित करने की ओर एक महत्त्वपूर्ण कदम है। आने वाले समय में इन परियोजनाओं के क्रियान्वयन की गति और स्थानीय समुदायों की भागीदारी यह तय करेगी कि यह पहल कितनी टिकाऊ और प्रभावशाली साबित होती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा क्रियान्वयन में है — विशेषकर तब जब 22 द्वीपों और 1,600 किमी तटरेखा के विकास में पर्यावरणीय संवेदनशीलता बनाए रखना अनिवार्य है। मरीन नेशनल पार्क जैसे संरक्षित क्षेत्रों में पर्यटन बुनियादी ढाँचे का विस्तार यदि सावधानी से नहीं किया गया, तो वही जैव विविधता खतरे में पड़ सकती है जो इस पहल की नींव है। स्थानीय समुदायों — मछुआरों, आदिवासियों और छोटे व्यापारियों — की वास्तविक भागीदारी सुनिश्चित किए बिना यह पहल महज़ पर्यटन अवसंरचना परियोजना बनकर रह जाएगी। सरकार को रोज़गार सृजन के दावों को सत्यापन-योग्य आँकड़ों से जोड़ना होगा, अन्यथा यह घोषणा भी उन कई पर्यटन योजनाओं की कतार में खड़ी हो जाएगी जो कागज़ों पर तो चमकदार थीं, ज़मीन पर कम।
RashtraPress
30 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गुजरात सरकार की इको-मरीन टूरिज्म योजना क्या है?
मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में गुजरात सरकार ने ₹20 करोड़ के बजट के साथ राज्य की 1,600 किलोमीटर तटरेखा पर इको-टूरिज्म, मरीन टूरिज्म और आइलैंड डेवलपमेंट को बढ़ावा देने की योजना बनाई है। इसमें बेट द्वारका में डॉल्फिन इको-टूरिज्म, ओखामढ़ी में टर्टल टूरिज्म और पिरोटन में मरीन नेशनल पार्क का विकास शामिल है।
गुजरात में कौन-कौन से नए पर्यटन केंद्र विकसित किए जा रहे हैं?
कच्छ, द्वारका, जामनगर, पोरबंदर और सौराष्ट्र के तटीय क्षेत्रों के अलावा माधवपुर, नवदरा, घोघा और जाफराबाद को पर्यटन मानचित्र पर लाने की तैयारी है। पंचमहल के जंबूघोड़ा अभयारण्य में भाट और धनपुरी इको-टूरिज्म सेंटर तथा डांग का सापुतारा हिल स्टेशन भी इस विस्तार का हिस्सा हैं।
पिरोटन मरीन नेशनल पार्क को इको-टूरिज्म साइट के रूप में क्यों चुना गया?
पिरोटन मरीन नेशनल पार्क जामनगर-द्वारका क्षेत्र के लगभग 22 द्वीपों के बीच स्थित है और यहाँ समृद्ध समुद्री जीवन मौजूद है। वन और पर्यावरण मंत्री अर्जुन मोढवाडिया के अनुसार, इस तट पर लगभग 680 डॉल्फिन हैं जो पर्यटकों के लिए प्रमुख आकर्षण बन सकती हैं।
इस पहल से स्थानीय रोज़गार पर क्या असर पड़ेगा?
मरीन और इको-टूरिज्म परियोजनाओं से स्थानीय युवाओं, हस्तशिल्पियों, होटल संचालकों और छोटे व्यापारियों के लिए रोज़गार के नए अवसर सृजित होने की उम्मीद है। द्वारका के होटल व्यवसायी निर्मल सामानी और सापुतारा की उद्यमी नीलाक्षी पटेल जैसे स्थानीय लोगों ने पहले से ही पर्यटन में वृद्धि और रोज़गार के बढ़ते अवसरों की पुष्टि की है।
सापुतारा में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं?
डांग जिले के सापुतारा हिल स्टेशन पर गुजरात टूरिज्म द्वारा मानसून फेस्टिवल सहित वर्षभर सांस्कृतिक कार्यक्रम और पर्यटन गतिविधियाँ आयोजित की जाती हैं। होटल एसोसिएशन के सचिव तुकाराम कर्डीले के अनुसार, इन आयोजनों से हर वर्ष पर्यटकों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हो रही है।
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