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गुजरात के 17 प्रकाश स्तंभ बने पर्यटन केंद्र, समुद्री विरासत से रूबरू होंगे सैलानी

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गुजरात के 17 प्रकाश स्तंभ बने पर्यटन केंद्र, समुद्री विरासत से रूबरू होंगे सैलानी

सारांश

जहाजों को रास्ता दिखाने वाले गुजरात के 17 प्रकाश स्तंभ अब सैलानियों के लिए खुले हैं — कैफेटेरिया, लाइट-साउंड शो और म्यूजियम के साथ। केंद्र सरकार की 75 लाइटहाउस विकास योजना के तहत यह पहल राज्य की 2,340 किमी लंबी तटरेखा को समुद्री विरासत के जीवंत मंच में बदल रही है।

मुख्य बातें

गुजरात के 17 प्रकाश स्तंभों पर कैफेटेरिया, एम्फीथिएटर, लाइट-साउंड शो और लिफ्ट सहित आधुनिक पर्यटन सुविधाएं विकसित की गई हैं।
विकसित स्थलों में मांडवी, ओखा, पोरबंदर, वेरावल, द्वारका सहित 17 तटीय स्थान शामिल हैं।
द्वारका और गोपनाथ में विशेष लाइटहाउस म्यूजियम स्थापित किए गए हैं।
यह पहल 'मरीन एड्स टू नेविगेशन एक्ट, 2021' की धारा 23 के तहत संचालित है।
केंद्र सरकार ने देश भर में 75 लाइटहाउस को पर्यटन स्थलों के रूप में विकसित करने की पहचान की है।
लोथल (अहमदाबाद) में नेशनल मैरीटाइम हेरिटेज कॉम्प्लेक्स (NMHC) का निर्माण भी जारी है।

गुजरात के तटीय क्षेत्र में स्थित 17 ऐतिहासिक प्रकाश स्तंभों को अब आधुनिक पर्यटन सुविधाओं से सुसज्जित किया गया है, जिससे ये परंपरागत नौवहन संरचनाएं राज्य की समुद्री विरासत को जीवंत करने वाले प्रमुख पर्यटन स्थलों में तब्दील हो गई हैं। केंद्र सरकार की व्यापक लाइटहाउस पर्यटन पहल के तहत यह विकास कार्य पूरा किया गया है, जो देश भर के 75 ऐतिहासिक प्रकाश स्तंभों को शैक्षिक और सांस्कृतिक गंतव्यों के रूप में विकसित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

किन स्थानों पर हुआ विकास

गुजरात की 2,340.62 किलोमीटर लंबी तटरेखा — जो देश में सबसे लंबी है — पर स्थित मांडवी, रावलपीर, समियानी, ओखा, कच्छीगढ़, पोरबंदर, मांगरोल, जाफराबाद, जेगरी, अलंग, घोघा, हजीरा, वलसाड खाड़ी, गोपनाथ, वेरावल, द्वारका और उमरगांव के प्रकाश स्तंभों पर पर्यटन सुविधाएं विकसित की गई हैं। इनमें से द्वारका और गोपनाथ में विशेष लाइटहाउस म्यूजियम भी स्थापित किए गए हैं।

इन म्यूजियमों में पर्यटक लाइटहाउस तकनीक के ऐतिहासिक विकास और भारत की समृद्ध समुद्री विरासत के बारे में विस्तृत जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

क्या-क्या सुविधाएं मिलेंगी पर्यटकों को

इन प्रकाश स्तंभ परिसरों में कैफेटेरिया, सुव्यवस्थित बगीचे, गजेबो, बच्चों के खेलने के क्षेत्र, एम्फीथिएटर, लाइट एंड साउंड शो, लिफ्ट और अन्य सार्वजनिक सुविधाएं शामिल की गई हैं। इन सुविधाओं का उद्देश्य पर्यटकों को मनोरंजन के साथ-साथ समुद्री नेविगेशन, इतिहास और लाइटहाउस तकनीक की गहरी समझ देना है।

विशेष रूप से युवा पीढ़ी को समुद्री नेविगेशन के इतिहास और तकनीकी प्रगति से परिचित कराना इस पहल का एक प्रमुख लक्ष्य है।

कानूनी ढाँचा और शर्तें

यह पूरी पहल 'मरीन एड्स टू नेविगेशन एक्ट, 2021' की धारा 23 के तहत संचालित की जा रही है। यह कानून हेरिटेज लाइटहाउस को शैक्षिक, सांस्कृतिक और पर्यटन उद्देश्यों के लिए विकसित करने और उन्हें विरासत का दर्जा देने का प्रावधान करता है।

गौरतलब है कि कानून में यह भी स्पष्ट रूप से अनिवार्य किया गया है कि पर्यटन विकास के दौरान प्रकाश स्तंभों की नौवहन संबंधी कार्यप्रणाली और उनकी मूल वास्तुकला को किसी भी प्रकार की क्षति नहीं पहुँचनी चाहिए।

लोथल में बन रहा राष्ट्रीय समुद्री विरासत परिसर

यह लाइटहाउस पर्यटन पहल गुजरात की समुद्री विरासत को उजागर करने की एक बड़ी रणनीति का हिस्सा है। अहमदाबाद जिले के लोथल में 'नेशनल मैरीटाइम हेरिटेज कॉम्प्लेक्स' (NMHC) का निर्माण किया जा रहा है। केंद्रीय बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्रालय इस परियोजना को एक वृहद समुद्री विरासत परिसर के रूप में विकसित कर रहा है, जिसमें म्यूजियम, इंटरैक्टिव प्रदर्शनियाँ और अन्य सुविधाएं शामिल होंगी।

यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र सरकार तटीय पर्यटन को एक संगठित और टिकाऊ क्षेत्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में काम कर रही है। गुजरात के 17 प्रकाश स्तंभों का यह रूपांतरण राज्य के तटीय पर्यटन सर्किट में नए और विशिष्ट गंतव्यों को जोड़ने का काम करेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या इन 17 स्थलों पर पर्यटक वास्तव में पहुँच पाएंगे — जिनमें से कई सुदूर तटीय इलाकों में हैं जहाँ सड़क और परिवहन संपर्क अभी भी सीमित है। केंद्र सरकार ने 75 लाइटहाउस की पहचान की है, लेकिन रखरखाव, स्थानीय रोजगार सृजन और पर्यटक संख्या के कोई स्पष्ट लक्ष्य सार्वजनिक नहीं किए गए हैं। लोथल में NMHC जैसी बड़ी परियोजनाओं के साथ समन्वय की कमी इस पहल की दीर्घकालिक सफलता पर सवाल खड़ा करती है।
RashtraPress
15 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गुजरात के किन 17 प्रकाश स्तंभों पर पर्यटन सुविधाएं विकसित की गई हैं?
मांडवी, रावलपीर, समियानी, ओखा, कच्छीगढ़, पोरबंदर, मांगरोल, जाफराबाद, जेगरी, अलंग, घोघा, हजीरा, वलसाड खाड़ी, गोपनाथ, वेरावल, द्वारका और उमरगांव — इन 17 स्थानों पर पर्यटन सुविधाएं विकसित की गई हैं। इनमें से द्वारका और गोपनाथ में लाइटहाउस म्यूजियम भी बनाए गए हैं।
इन प्रकाश स्तंभों पर पर्यटकों के लिए क्या-क्या सुविधाएं उपलब्ध हैं?
इन परिसरों में कैफेटेरिया, सुव्यवस्थित बगीचे, गजेबो, बच्चों के खेलने के क्षेत्र, एम्फीथिएटर, लाइट एंड साउंड शो, लिफ्ट और अन्य सार्वजनिक सुविधाएं शामिल हैं। साथ ही समुद्री नेविगेशन और लाइटहाउस तकनीक की जानकारी देने वाली प्रदर्शनियाँ भी लगाई गई हैं।
यह पहल किस कानून के तहत की जा रही है?
'मरीन एड्स टू नेविगेशन एक्ट, 2021' की धारा 23 के तहत यह विकास कार्य किया जा रहा है। यह कानून हेरिटेज लाइटहाउस को शैक्षिक, सांस्कृतिक और पर्यटन उद्देश्यों के लिए विकसित करने का प्रावधान करता है, साथ ही यह सुनिश्चित करता है कि उनकी नौवहन कार्यप्रणाली और मूल वास्तुकला अप्रभावित रहे।
केंद्र सरकार की राष्ट्रीय लाइटहाउस पर्यटन योजना क्या है?
केंद्र सरकार ने देश भर में 75 ऐतिहासिक और वास्तुशिल्प की दृष्टि से महत्वपूर्ण लाइटहाउस की पहचान की है, जिन्हें पर्यटन सुविधाओं के साथ विकसित किया जाना है। गुजरात के 17 प्रकाश स्तंभ इसी राष्ट्रीय योजना का हिस्सा हैं।
लोथल में बन रहा नेशनल मैरीटाइम हेरिटेज कॉम्प्लेक्स क्या है?
अहमदाबाद जिले के लोथल में 'नेशनल मैरीटाइम हेरिटेज कॉम्प्लेक्स' (NMHC) का निर्माण किया जा रहा है, जिसे केंद्रीय बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्रालय विकसित कर रहा है। इसमें म्यूजियम, इंटरैक्टिव प्रदर्शनियाँ और अन्य सुविधाओं के जरिए भारत के समुद्री इतिहास को प्रस्तुत किया जाएगा।
राष्ट्र प्रेस
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