गुजरात में 12 वर्षों में 5 नए म्यूजियम, 16 लाख से अधिक आगंतुक; 'विकास भी, विरासत भी' विजन साकार
सारांश
मुख्य बातें
गुजरात में पिछले 12 वर्षों के दौरान 5 नए अत्याधुनिक संग्रहालय स्थापित किए गए हैं और पिछले दो वर्षों में राज्य के विभिन्न संग्रहालयों में 16 लाख से अधिक आगंतुक पहुँचे हैं। गुजरात सरकार के पुरातत्व और संग्रहालय निदेशालय के निदेशक डॉ. पंकज शर्मा के अनुसार, डिजिटल तकनीक के समन्वय से ये संग्रहालय अब कलाकृतियों के भंडार नहीं, बल्कि संस्कृति के जीवंत केंद्र बन चुके हैं।
मुख्य संग्रहालय और उनकी विशेषताएँ
स्मृतिवन भूकंप स्मारक एवं म्यूजियम, भुज के भुजिया डुंगर पर स्थित है और 2001 के विनाशकारी भूकंप में जीवन गँवाने वाले लोगों की स्मृति में समर्पित है। यहाँ आगंतुक सिम्युलेटर के ज़रिए भूकंप का जीवंत अनुभव कर सकते हैं। पर्यटकों के अनुसार, इस म्यूजियम का थियेटर और डिजिटल माध्यम उन्हें उस विभीषिका और उससे उबरने की प्रेरक गाथा से सीधे जोड़ता है।
दांडी कुटीर म्यूजियम, गांधीनगर में 2015 में बना यह 41 मीटर ऊँचा शंकु आकार का गुंबद 1930 के नमक सत्याग्रह का प्रतीक है। प्रकाश, ध्वनि, एनिमेशन और मल्टीमीडिया प्रेजेंटेशन के माध्यम से यहाँ स्वतंत्रता आंदोलन की गाथा को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया गया है।
वडनगर पुरातत्व अनुभवात्मक संग्रहालय, 2025 में निर्मित यह म्यूजियम वडनगर के हज़ारों वर्ष प्राचीन इतिहास और उत्खनन के दौरान मिले अवशेषों को संजोता है। यह भारत का पहला ऐसा संग्रहालय है जो उत्खनन स्थल के अनुभव को सीधे दर्शाता है और 2,500 वर्षों के सात सांस्कृतिक चरणों का कालक्रमिक विकास प्रस्तुत करता है।
स्टैच्यू ऑफ यूनिटी संग्रहालय दुनिया की सबसे ऊँची प्रतिमा के साथ सरदार वल्लभभाई पटेल के जीवन और रियासतों के विलय के इतिहास को आधुनिक तकनीक से प्रस्तुत करता है।
निर्माणाधीन परियोजना: लोथल राष्ट्रीय समुद्री विरासत परिसर
लोथल में निर्माणाधीन राष्ट्रीय समुद्री विरासत परिसर को दुनिया का सबसे बड़ा मैरीटाइम म्यूजियम बनाने की योजना है। यह परिसर सिंधु घाटी सभ्यता के प्रमुख बंदरगाह शहर लोथल की प्राचीन समुद्री विरासत और भारत की वैश्विक व्यापार परंपरा को प्रदर्शित करेगा। अत्याधुनिक इमर्सिव गैलरियों, वर्चुअल प्रेजेंटेशन और इंटरैक्टिव प्रदर्शनी के ज़रिए आगंतुक प्राचीन भारत के नौकायन कौशल को निकट से समझ सकेंगे।
तकनीक से बदला म्यूजियम का स्वरूप
गुजरात के संग्रहालयों में अब ऑगमेंटेड रियलिटी (AR), वर्चुअल रियलिटी (VR), 3D प्रोजेक्शन मैपिंग, होलोग्राम और इंटरैक्टिव टच स्क्रीन जैसी अत्याधुनिक तकनीक का उपयोग किया जा रहा है। डॉ. पंकज शर्मा ने कहा कि इसका उद्देश्य युवा पीढ़ी को विरासत को केवल देखने नहीं, बल्कि अनुभव करने का अवसर देना है।
गौरतलब है कि परंपरागत म्यूजियमों में जहाँ केवल वस्तुओं का प्रदर्शन होता था, वहीं इन नए संग्रहालयों में इमर्सिव अनुभव को केंद्र में रखा गया है — यह बदलाव देश के अन्य राज्यों के लिए भी एक मॉडल बनता जा रहा है।
सरकार की प्रतिबद्धता
मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व और उप मुख्यमंत्री हर्ष संघवी के मार्गदर्शन में गुजरात सरकार ने आर्थिक विकास के साथ-साथ ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण को प्राथमिकता दी है। सरकार ने संकेत दिया है कि आने वाले समय में भी राज्य की अस्मिता और संस्कृति को वैश्विक फलक पर ले जाने के लिए ऐसे आधुनिक प्रकल्पों का निर्माण जारी रहेगा।