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अमेरिकी सेक्शन 301 शुल्क में भारत को राहत: 10% ड्यूटी, 45% निर्यात बाहर; BTA पर प्रतिबद्धता

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अमेरिकी सेक्शन 301 शुल्क में भारत को राहत: 10% ड्यूटी, 45% निर्यात बाहर; BTA पर प्रतिबद्धता

सारांश

अमेरिका के सेक्शन 301 के अंतिम फैसले में भारत को राहत मिली है — प्रस्तावित 12.5% की जगह सिर्फ 10% अतिरिक्त ड्यूटी, और कुल निर्यात का 45% इस दायरे से बाहर। USTR के साथ सक्रिय कूटनीतिक संवाद का यह नतीजा है, और BTA वार्ता अब निर्णायक मोड़ पर है।

मुख्य बातें

USTR ने 23 जुलाई 2026 को सेक्शन 301 के अंतिम उपाय घोषित किए; भारत पर 10% अतिरिक्त एड वैलोरम ड्यूटी तय की गई।
यह दर 2 जून 2026 को प्रस्तावित 12.5% शुल्क से कम है — भारत की कूटनीतिक सक्रियता का परिणाम।
जेनेरिक फार्मास्यूटिकल्स, स्मार्टफोन, स्टील, एल्युमीनियम और ऑटो पार्ट्स सहित कुल निर्यात का लगभग 45% इस अतिरिक्त ड्यूटी के दायरे से बाहर।
शेष 55% निर्यात पर 10% अतिरिक्त शुल्क लागू होगा, लेकिन अधिकांश अन्य अर्थव्यवस्थाओं से तुलनात्मक बोझ कम।
टेक्सटाइल-विशिष्ट व्यवस्था अभी लागू होनी बाकी; भारत-अमेरिका BTA वार्ताओं में इस पर चर्चा जारी।

केंद्र सरकार ने 25 जुलाई 2026 को स्पष्ट किया कि अमेरिकी व्यापार अधिनियम, 1974 के सेक्शन 301 के तहत लागू किए गए अंतिम उपायों में भारत को अतिरिक्त टैरिफ की निचली श्रेणी में रखा गया है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अनुसार, यह परिणाम जांच के दौरान अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) के साथ निरंतर और सक्रिय संवाद का प्रतिफल है। सरकार ने साथ ही भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) को शीघ्र अंतिम रूप देने की प्रतिबद्धता भी दोहराई है।

सेक्शन 301 जांच की पृष्ठभूमि

USTR ने 23 जुलाई 2026 को सेक्शन 301 के अंतर्गत अंतिम उपायों की घोषणा की। यह जांच 60 अर्थव्यवस्थाओं की उन नीतियों और प्रक्रियाओं की समीक्षा के बाद की गई, जो फोर्स्ड लेबर (बंधुआ मज़दूरी) से तैयार वस्तुओं के आयात पर प्रतिबंध लगाने और उसे लागू करने से संबंधित हैं। भारत भी इन 60 अर्थव्यवस्थाओं में शामिल था।

गौरतलब है कि 2 जून 2026 को USTR ने भारत पर 12.5 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क का प्रस्ताव रखा था। अंतिम निर्णय में यह दर घटाकर 10 प्रतिशत एड वैलोरम ड्यूटी कर दी गई — जो भारत की सक्रिय कूटनीतिक भागीदारी का ठोस परिणाम माना जा रहा है।

भारत की कूटनीतिक रणनीति

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने अपने आधिकारिक बयान में कहा, "भारत सरकार ने जांच के दौरान USTR के साथ लगातार विस्तृत लिखित प्रस्तुतियां, व्यक्तिगत स्तर पर विचार-विमर्श और सार्वजनिक सुनवाई में भागीदारी के माध्यम से सक्रिय संवाद बनाए रखा। इन निरंतर प्रयासों के परिणामस्वरूप भारत को अंतिम उपायों में अतिरिक्त टैरिफ की निचली श्रेणी में रखा गया है, जिससे प्रमुख क्षेत्रों में भारतीय निर्यात को तुलनात्मक लाभ मिलेगा।"

किन उत्पादों को मिली छूट

सरकार के अनुसार, अमेरिका को भारत के निर्यात का एक बड़ा हिस्सा इस 10 प्रतिशत अतिरिक्त ड्यूटी के दायरे से बाहर रहेगा। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:

जेनेरिक फार्मास्यूटिकल्स, स्मार्टफोन और कुछ अन्य निर्दिष्ट उत्पाद — जिन पर पहले से कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लगता। इसके अलावा, सेक्शन 232 के तहत पहले से शामिल स्टील, एल्युमीनियम और ऑटो पार्ट्स पर भी यह अतिरिक्त 10 प्रतिशत ड्यूटी लागू नहीं होगी।

इन छूटों के कारण अमेरिका को भारत के कुल निर्यात का लगभग 45 प्रतिशत हिस्सा सेक्शन 301 की अतिरिक्त ड्यूटी से मुक्त रहेगा। शेष 55 प्रतिशत निर्यात पर 10 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क लागू होगा।

टेक्सटाइल और BTA वार्ता

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि अंतिम उपायों में उल्लिखित टेक्सटाइल-विशिष्ट व्यवस्था अभी स्थापित और लागू होनी बाकी है। इस मुद्दे पर भारत, चल रही भारत-अमेरिका BTA वार्ताओं के दौरान अमेरिका के साथ निरंतर संवाद में है।

यह ऐसे समय में आया है जब दोनों देशों के बीच व्यापार संबंधों को नई गति देने की कोशिशें जारी हैं। जांच के दायरे में शामिल अधिकांश अन्य अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में भारत पर कुल टैरिफ बोझ अपेक्षाकृत कम रहेगा, जो भारतीय निर्यातकों के लिए प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त का काम करेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली तस्वीर उतनी सरल नहीं। 55% निर्यात पर अतिरिक्त शुल्क लागू होगा और टेक्सटाइल व्यवस्था अभी अधर में है — जो भारत के सबसे बड़े श्रम-गहन निर्यात क्षेत्रों में से एक है। BTA को 'जल्द' पूरा करने की प्रतिबद्धता पहले भी दोहराई जाती रही है, लेकिन ठोस समयसीमा अभी भी गायब है। असली कसौटी यह होगी कि BTA वार्ता में भारत टेक्सटाइल और श्रम मानकों पर किस हद तक अपनी शर्तें मनवा पाता है।
RashtraPress
25 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अमेरिका का सेक्शन 301 क्या है और इसका भारत पर क्या असर पड़ा?
सेक्शन 301 अमेरिकी व्यापार अधिनियम, 1974 का वह प्रावधान है जो USTR को अनुचित व्यापार प्रथाओं पर जांच और शुल्क लगाने का अधिकार देता है। इस बार जांच फोर्स्ड लेबर से जुड़ी नीतियों पर हुई और भारत पर 10% अतिरिक्त एड वैलोरम ड्यूटी लगाई गई है।
भारत पर कितना अतिरिक्त शुल्क लगाया गया और पहले क्या प्रस्तावित था?
USTR ने भारत पर 10% अतिरिक्त एड वैलोरम ड्यूटी लगाने का अंतिम निर्णय किया है। 2 जून 2026 को यह दर 12.5% प्रस्तावित की गई थी, जिसे भारत की सक्रिय भागीदारी के बाद घटाया गया।
भारत के किन निर्यात उत्पादों को इस 10% ड्यूटी से छूट मिली है?
जेनेरिक फार्मास्यूटिकल्स, स्मार्टफोन और कुछ अन्य निर्दिष्ट उत्पाद इस अतिरिक्त ड्यूटी के दायरे से बाहर हैं। सेक्शन 232 के तहत पहले से शामिल स्टील, एल्युमीनियम और ऑटो पार्ट्स पर भी यह 10% अतिरिक्त शुल्क नहीं लगेगा। कुल मिलाकर भारत के अमेरिका को कुल निर्यात का लगभग 45% इस ड्यूटी से मुक्त रहेगा।
भारत-अमेरिका BTA वार्ता की स्थिति क्या है?
केंद्र सरकार ने भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) को शीघ्र अंतिम रूप देने की प्रतिबद्धता दोहराई है। टेक्सटाइल-विशिष्ट व्यवस्था समेत कई मुद्दों पर BTA वार्ताओं के दौरान अमेरिका के साथ बातचीत जारी है।
अन्य देशों की तुलना में भारत की स्थिति कैसी है?
जांच के दायरे में शामिल 60 अर्थव्यवस्थाओं में से अधिकांश की तुलना में भारत पर कुल टैरिफ बोझ अपेक्षाकृत कम रहेगा। इससे प्रमुख निर्यात क्षेत्रों में भारतीय उत्पादों को प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त मिलने की उम्मीद है।
राष्ट्र प्रेस
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