अमेरिका का बड़ा कदम: भारत समेत 60 देशों पर 12.5% अतिरिक्त टैरिफ का प्रस्ताव, जबरन श्रम पर सख्ती
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय (USTR) ने 3 जून को भारत सहित 60 देशों और अर्थव्यवस्थाओं पर 12.5 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लगाने का प्रस्ताव रखा है। यह कार्रवाई 1974 के ट्रेड एक्ट की धारा 301 के तहत प्रस्तावित की गई है, जिसका आधार यह आरोप है कि ये देश जबरन श्रम (फोर्स्ड लेबर) से बने उत्पादों के आयात को रोकने में विफल रहे हैं।
प्रस्ताव की मुख्य बातें
USTR ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि चिन्हित 60 देशों ने जबरन श्रम से तैयार सामानों के आयात पर प्रतिबंध लगाने और उसे प्रभावी ढंग से लागू करने में विफलता दिखाई है। एजेंसी के अनुसार, धारा 301 की जाँच में पाया गया कि इन देशों की नीतियाँ और व्यवहार अमेरिकी व्यापार पर अनुचित बोझ डालते हैं तथा उसे सीमित करते हैं, जिसके चलते जवाबी कार्रवाई उचित ठहरती है।
दो-स्तरीय टैरिफ ढाँचा
प्रस्ताव में दो श्रेणियाँ बनाई गई हैं। जिन देशों ने जबरन श्रम से बने सामानों के आयात पर प्रतिबंध लगाया है, ऐसा करने का वादा किया है, या आंशिक व्यवस्था लागू की है, उन पर 10 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क का प्रस्ताव है। शेष सभी देशों और अर्थव्यवस्थाओं पर 12.5 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क लगाने की सिफारिश है — और इसी दूसरी श्रेणी में भारत को रखा गया है।
USTR प्रमुख का बयान
अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि राजदूत जैमीसन ग्रीर ने कहा कि प्रमुख व्यापारिक साझेदारों द्वारा जबरन श्रम से बने सामानों के आयात को रोकने में विफल रहना स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने कहा कि इससे अमेरिकी श्रमिकों को वैश्विक बाज़ार में असमान प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ता है।
ग्रीर ने जोड़ा, ‘हम अब इस असमानता को बर्दाश्त नहीं करेंगे। कुछ व्यापारिक साझेदार देशों ने जबरन श्रम से बने उत्पादों के आयात को रोकने के लिए शुरुआती कदम उठाए हैं, जिनमें USMCA और पारस्परिक व्यापार समझौतों के तहत की गईं प्रतिबद्धताएँ शामिल हैं। हालाँकि, हमारे सभी व्यापारिक साझेदारों को यह सुनिश्चित करने के लिए और अधिक प्रयास करने होंगे कि वैश्विक व्यापार किसी भी तरह से जबरन श्रम को बढ़ावा न दे।’
कपड़ा क्षेत्र के लिए विशेष तंत्र
बयान के अनुसार, USTR ने एक विशेष टेक्सटाइल मैकेनिज्म का भी प्रस्ताव किया है, जिसके तहत कुछ देशों से आने वाले कपड़ा और परिधान उत्पादों की एक निर्धारित मात्रा को कम धारा-301 टैरिफ दर पर अमेरिका में प्रवेश की अनुमति दी जा सकती है। यह छूट भारत जैसे बड़े कपड़ा निर्यातकों के लिए संभावित राहत-बिंदु हो सकती है, हालाँकि पात्रता शर्तें अभी स्पष्ट नहीं हैं।
भारत पर संभावित असर
गौरतलब है कि अमेरिका भारत के सबसे बड़े निर्यात गंतव्यों में से एक है, और कपड़ा, परिधान, चमड़ा तथा हस्तशिल्प जैसे श्रम-गहन क्षेत्र इस प्रस्तावित अतिरिक्त शुल्क की मार सबसे पहले झेल सकते हैं। यह कदम ऐसे समय में आया है जब वॉशिंगटन ने वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं में श्रम मानकों पर निगरानी तेज़ की है।
आगे क्या
USTR ने स्पष्ट किया है कि प्रस्तावित कदमों पर 7 जुलाई 2026 को सार्वजनिक सुनवाई आयोजित की जाएगी। इसके बाद प्राप्त सुझावों और प्रतिक्रियाओं के आधार पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।