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अमेरिका का बड़ा कदम: भारत समेत 60 देशों पर 12.5% अतिरिक्त टैरिफ का प्रस्ताव, जबरन श्रम पर सख्ती

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अमेरिका का बड़ा कदम: भारत समेत 60 देशों पर 12.5% अतिरिक्त टैरिफ का प्रस्ताव, जबरन श्रम पर सख्ती

सारांश

अमेरिका ने जबरन श्रम के आधार पर भारत समेत 60 देशों पर 12.5% अतिरिक्त टैरिफ का प्रस्ताव रखा है। धारा 301 के तहत यह कदम भारतीय कपड़ा, चमड़ा और हस्तशिल्प निर्यातकों के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है। अंतिम फैसला 7 जुलाई 2026 की सार्वजनिक सुनवाई के बाद होगा।

मुख्य बातें

USTR ने 1974 ट्रेड एक्ट की धारा 301 के तहत 60 देशों पर अतिरिक्त टैरिफ का प्रस्ताव रखा।
भारत सहित कई देशों पर 12.5% और आंशिक अनुपालन वाले देशों पर 10% शुल्क प्रस्तावित।
आधार: जबरन श्रम से बने उत्पादों के आयात को रोकने में कथित विफलता।
USTR प्रमुख जैमीसन ग्रीर ने ‘असमान प्रतिस्पर्धा’ को असहनीय बताया।
कपड़ा क्षेत्र के लिए विशेष टेक्सटाइल मैकेनिज्म के तहत कम-दर कोटा प्रस्तावित।
सार्वजनिक सुनवाई 7 जुलाई 2026 को निर्धारित।

अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय (USTR) ने 3 जून को भारत सहित 60 देशों और अर्थव्यवस्थाओं पर 12.5 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लगाने का प्रस्ताव रखा है। यह कार्रवाई 1974 के ट्रेड एक्ट की धारा 301 के तहत प्रस्तावित की गई है, जिसका आधार यह आरोप है कि ये देश जबरन श्रम (फोर्स्ड लेबर) से बने उत्पादों के आयात को रोकने में विफल रहे हैं।

प्रस्ताव की मुख्य बातें

USTR ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि चिन्हित 60 देशों ने जबरन श्रम से तैयार सामानों के आयात पर प्रतिबंध लगाने और उसे प्रभावी ढंग से लागू करने में विफलता दिखाई है। एजेंसी के अनुसार, धारा 301 की जाँच में पाया गया कि इन देशों की नीतियाँ और व्यवहार अमेरिकी व्यापार पर अनुचित बोझ डालते हैं तथा उसे सीमित करते हैं, जिसके चलते जवाबी कार्रवाई उचित ठहरती है।

दो-स्तरीय टैरिफ ढाँचा

प्रस्ताव में दो श्रेणियाँ बनाई गई हैं। जिन देशों ने जबरन श्रम से बने सामानों के आयात पर प्रतिबंध लगाया है, ऐसा करने का वादा किया है, या आंशिक व्यवस्था लागू की है, उन पर 10 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क का प्रस्ताव है। शेष सभी देशों और अर्थव्यवस्थाओं पर 12.5 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क लगाने की सिफारिश है — और इसी दूसरी श्रेणी में भारत को रखा गया है।

USTR प्रमुख का बयान

अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि राजदूत जैमीसन ग्रीर ने कहा कि प्रमुख व्यापारिक साझेदारों द्वारा जबरन श्रम से बने सामानों के आयात को रोकने में विफल रहना स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने कहा कि इससे अमेरिकी श्रमिकों को वैश्विक बाज़ार में असमान प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ता है।

ग्रीर ने जोड़ा, ‘हम अब इस असमानता को बर्दाश्त नहीं करेंगे। कुछ व्यापारिक साझेदार देशों ने जबरन श्रम से बने उत्पादों के आयात को रोकने के लिए शुरुआती कदम उठाए हैं, जिनमें USMCA और पारस्परिक व्यापार समझौतों के तहत की गईं प्रतिबद्धताएँ शामिल हैं। हालाँकि, हमारे सभी व्यापारिक साझेदारों को यह सुनिश्चित करने के लिए और अधिक प्रयास करने होंगे कि वैश्विक व्यापार किसी भी तरह से जबरन श्रम को बढ़ावा न दे।’

कपड़ा क्षेत्र के लिए विशेष तंत्र

बयान के अनुसार, USTR ने एक विशेष टेक्सटाइल मैकेनिज्म का भी प्रस्ताव किया है, जिसके तहत कुछ देशों से आने वाले कपड़ा और परिधान उत्पादों की एक निर्धारित मात्रा को कम धारा-301 टैरिफ दर पर अमेरिका में प्रवेश की अनुमति दी जा सकती है। यह छूट भारत जैसे बड़े कपड़ा निर्यातकों के लिए संभावित राहत-बिंदु हो सकती है, हालाँकि पात्रता शर्तें अभी स्पष्ट नहीं हैं।

भारत पर संभावित असर

गौरतलब है कि अमेरिका भारत के सबसे बड़े निर्यात गंतव्यों में से एक है, और कपड़ा, परिधान, चमड़ा तथा हस्तशिल्प जैसे श्रम-गहन क्षेत्र इस प्रस्तावित अतिरिक्त शुल्क की मार सबसे पहले झेल सकते हैं। यह कदम ऐसे समय में आया है जब वॉशिंगटन ने वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं में श्रम मानकों पर निगरानी तेज़ की है।

आगे क्या

USTR ने स्पष्ट किया है कि प्रस्तावित कदमों पर 7 जुलाई 2026 को सार्वजनिक सुनवाई आयोजित की जाएगी। इसके बाद प्राप्त सुझावों और प्रतिक्रियाओं के आधार पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि श्रम-मानकों का औज़ार बना रहा है — और इसका सीधा बोझ भारत के श्रम-गहन निर्यात क्षेत्रों पर पड़ेगा। दिलचस्प यह है कि भारत को उस श्रेणी में रखा गया है जहाँ ‘कोई आंशिक व्यवस्था भी नहीं’ मानी गई, जबकि भारत के पास बाल और बंधुआ मज़दूरी के विरुद्ध अपने कानूनी ढाँचे हैं। नई दिल्ली के लिए असली परीक्षा कूटनीतिक नहीं, दस्तावेज़ी होगी — सत्यापन-योग्य प्रवर्तन डेटा USTR के सामने रखना। अन्यथा कपड़ा और चमड़ा उद्योग को बांग्लादेश और वियतनाम के मुकाबले प्रतिस्पर्धी नुकसान उठाना पड़ सकता है।
RashtraPress
20 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अमेरिका ने भारत पर 12.5% अतिरिक्त टैरिफ क्यों प्रस्तावित किया है?
USTR ने 1974 ट्रेड एक्ट की धारा 301 के तहत यह प्रस्ताव रखा है, यह कहते हुए कि भारत समेत 60 देश जबरन श्रम से बने उत्पादों के आयात को रोकने में विफल रहे हैं। एजेंसी के अनुसार इन देशों की नीतियाँ अमेरिकी व्यापार पर अनुचित बोझ डालती हैं।
10% और 12.5% टैरिफ श्रेणियों में क्या फर्क है?
जिन देशों ने जबरन श्रम से बने सामानों पर प्रतिबंध लगाया है, या ऐसा करने की प्रतिबद्धता जताई है, या आंशिक व्यवस्था लागू की है, उन पर 10% अतिरिक्त शुल्क प्रस्तावित है। शेष देशों — जिनमें भारत भी शामिल है — पर 12.5% अतिरिक्त शुल्क का प्रस्ताव है।
इस टैरिफ का भारत के किन क्षेत्रों पर सबसे ज़्यादा असर होगा?
कपड़ा, परिधान, चमड़ा और हस्तशिल्प जैसे श्रम-गहन निर्यात क्षेत्र सबसे ज़्यादा प्रभावित हो सकते हैं, क्योंकि अमेरिका इनका एक प्रमुख खरीदार है। हालाँकि, USTR के प्रस्तावित टेक्सटाइल मैकेनिज्म के तहत कुछ कपड़ा उत्पादों को कम दर पर प्रवेश की अनुमति मिल सकती है।
यह प्रस्ताव कब लागू हो सकता है?
USTR ने 7 जुलाई 2026 को सार्वजनिक सुनवाई निर्धारित की है। सुनवाई में प्राप्त सुझावों और प्रतिक्रियाओं के आधार पर अमेरिकी प्रशासन अंतिम निर्णय लेगा, उसके बाद ही अतिरिक्त शुल्क प्रभावी होंगे।
USTR प्रमुख जैमीसन ग्रीर ने क्या कहा?
ग्रीर ने कहा कि प्रमुख व्यापारिक साझेदारों द्वारा जबरन श्रम से बने सामानों के आयात को रोकने में विफल रहना ‘स्वीकार्य नहीं’ है और इससे अमेरिकी श्रमिकों को असमान प्रतिस्पर्धा झेलनी पड़ती है। उन्होंने सभी साझेदारों से और अधिक प्रयास करने का आह्वान किया।
राष्ट्र प्रेस
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