4 अगस्त 2026
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अमेरिका के 25 राज्यों ने ट्रंप के सेक्शन 301 टैरिफ को यूएस कोर्ट में दी कानूनी चुनौती

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अमेरिका के 25 राज्यों ने ट्रंप के सेक्शन 301 टैरिफ को यूएस कोर्ट में दी कानूनी चुनौती

सारांश

अमेरिका के 25 राज्यों ने ट्रंप प्रशासन के सेक्शन 301 टैरिफ को यूएस कोर्ट ऑफ इंटरनेशनल ट्रेड में चुनौती दी है। राज्यों का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा पहले खारिज किए जा चुके टैरिफ को नए कानूनी आवरण में फिर से लाया जा रहा है, जो 99.4% अमेरिकी आयात को प्रभावित करता है।

मुख्य बातें

25 अमेरिकी राज्यों ने 4 अगस्त 2025 को यूएस कोर्ट ऑफ इंटरनेशनल ट्रेड में ट्रंप प्रशासन के विरुद्ध मुकदमा दायर किया।
मुकदमा सेक्शन 301 के तहत लगाए गए टैरिफ को चुनौती देता है, जो 60 व्यापारिक साझेदार देशों से आयात पर 10-12.5% अतिरिक्त शुल्क लगाता है।
प्रभावित देश मिलकर अमेरिका के कुल आयात का 99.4% प्रतिनिधित्व करते हैं।
राज्यों का आरोप है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा फरवरी में खारिज किए जा चुके टैरिफ को नए कानूनी आधार पर फिर से लागू किया जा रहा है।
गठबंधन ने अदालत से टैरिफ पर रोक, उन्हें गैर-कानूनी घोषित करने और पहले चुकाई गई ड्यूटी का रिफंड देने की माँग की है।
व्हाइट हाउस ने दलीलें खारिज करते हुए सेक्शन 301 टैरिफ को कानूनी रूप से वैध बताया।

अमेरिका के 25 राज्यों के एक बहु-राज्यीय गठबंधन ने 4 अगस्त 2025 को यूएस कोर्ट ऑफ इंटरनेशनल ट्रेड में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन के विरुद्ध मुकदमा दायर किया है। कोर्ट दस्तावेज़ों के अनुसार, इन राज्यों का आरोप है कि ट्रंप ने 60 व्यापारिक साझेदार देशों के आयात पर भारी नए टैरिफ लगाकर अपने कानूनी अधिकार का दुरुपयोग किया है। प्रभावित देश मिलकर अमेरिका के कुल आयात का 99.4 फीसदी हिस्सा प्रतिनिधित्व करते हैं।

मुकदमे में क्या माँगा गया है

गठबंधन ने अदालत से तीन प्रमुख राहतों की माँग की है — नए टैरिफ पर तत्काल रोक, उन्हें गैर-कानूनी घोषित करना, और पहले चुकाई जा चुकी ड्यूटी का रिफंड। प्रभावित देशों से आयात होने वाले अधिकांश सामानों पर 10 फीसदी या 12.5 फीसदी का अतिरिक्त शुल्क लगाया गया है।

राज्यों की कानूनी दलील

राज्यों का तर्क है कि संघीय अधिकारियों ने 1974 के ट्रेड एक्ट के सेक्शन 301 और जबरन मज़दूरी संबंधी चिंताओं को महज एक बहाने के रूप में इस्तेमाल किया — ताकि लगभग उन्हीं वैश्विक शुल्कों को नए रूप में फिर से लागू किया जा सके, जिन्हें सुप्रीम कोर्ट ने फरवरी में पहले ही खारिज कर दिया था। यह मुकदमा उन नई ड्यूटीज़ के विरुद्ध कम-से-कम दूसरी बड़ी कानूनी चुनौती है — इससे पहले छोटे व्यवसायों के एक समूह ने भी इसी आधार पर सरकार पर मुकदमा किया था।

राज्यों के नेताओं की प्रतिक्रिया

न्यूयॉर्क की गवर्नर कैथी होचुल ने कहा, "राष्ट्रपति ट्रंप के गैर-कानूनी टैरिफ मेहनती परिवारों पर टैक्स के अलावा और कुछ नहीं हैं। इससे किराने का सामान, घर की जरूरी चीज़ें, बिल्डिंग मटीरियल और रोज़मर्रा की अनगिनत चीज़ों की कीमतें बढ़ रही हैं, जिन पर न्यूयॉर्क के लोग निर्भर हैं।"

ओरेगन के अटॉर्नी जनरल डैन रेफील्ड ने एक्स पर लिखा, "आज, हम ट्रंप के गैर-कानूनी टैरिफ के खिलाफ अपना तीसरा केस फाइल कर रहे हैं। ट्रंप एक बार फिर ओरेगन के परिवारों और छोटे बिज़नेस के लिए रोज़मर्रा के सामान की कीमतें बढ़ा रहे हैं और एक बार फिर, हम उन्हें रोकने के लिए एक मल्टीस्टेट कोएलिशन को लीड कर रहे हैं।"

न्यूयॉर्क की अटॉर्नी जनरल लेटिटिया जेम्स ने कहा, "सुप्रीम कोर्ट में हारने के बाद, सरकार एक बार फिर टैरिफ के नए राउंड के साथ परिवारों और बिज़नेस पर गैर-कानूनी तरीके से टैक्स बढ़ाने की कोशिश कर रही है।"

व्हाइट हाउस का पक्ष

व्हाइट हाउस ने गठबंधन की दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि सेक्शन 301 टैरिफ राष्ट्रपति के पहले कार्यकाल से ही कानूनी रूप से टिकाऊ उपकरण साबित हुए हैं और मौजूदा प्रशासन में भी उनकी वैधानिक स्थिति बरकरार है।

मुकदमे में शामिल राज्य

इस मुकदमे में न्यूयॉर्क के साथ एरिजोना, कैलिफोर्निया, कोलोराडो, कनेक्टिकट, डेलावेयर, हवाई, इलिनोइस, केंटकी, मैसाचुसेट्स, मैरीलैंड, मेन, मिशिगन, मिनेसोटा, नेवादा, न्यू जर्सी, न्यू मैक्सिको, नॉर्थ कैरोलिना, ओरेगन, पेंसिल्वेनिया, रोड आइलैंड, वर्जीनिया, वरमोंट, वाशिंगटन और विस्कॉन्सिन शामिल हैं। यह ऐसे समय में आया है जब ट्रंप प्रशासन की व्यापार नीतियों को अदालतों में बार-बार चुनौती मिल रही है और आने वाले हफ्तों में इस मामले की सुनवाई पर सबकी नज़रें टिकी रहेंगी।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अमेरिका के 25 राज्यों ने ट्रंप प्रशासन पर किस आधार पर मुकदमा किया है?
राज्यों का आरोप है कि राष्ट्रपति ट्रंप ने 1974 के ट्रेड एक्ट के सेक्शन 301 का दुरुपयोग करते हुए 60 व्यापारिक साझेदार देशों पर 10-12.5% अतिरिक्त टैरिफ लगाए, जो अमेरिका के 99.4% आयात को प्रभावित करते हैं। मुकदमा यूएस कोर्ट ऑफ इंटरनेशनल ट्रेड में 4 अगस्त 2025 को दायर किया गया।
सेक्शन 301 टैरिफ क्या होते हैं?
सेक्शन 301, अमेरिका के 1974 के ट्रेड एक्ट का वह प्रावधान है जो राष्ट्रपति को अनुचित विदेशी व्यापार प्रथाओं के जवाब में शुल्क लगाने का अधिकार देता है। ट्रंप प्रशासन ने इसी आधार पर 60 देशों के आयात पर नए टैरिफ लागू किए हैं, जिन्हें राज्य गठबंधन ने अदालत में चुनौती दी है।
सुप्रीम कोर्ट ने पहले के टैरिफ क्यों खारिज किए थे?
सुप्रीम कोर्ट ने फरवरी में ट्रंप प्रशासन के पहले के दो टैरिफ संस्करणों को अलग-अलग वैधानिक ढाँचों के तहत अमान्य ठहराया था। राज्यों का तर्क है कि मौजूदा सेक्शन 301 टैरिफ उन्हीं खारिज किए गए शुल्कों को नए कानूनी रूप में फिर से लागू करने का प्रयास है।
इस मुकदमे से आम अमेरिकी नागरिकों पर क्या असर पड़ेगा?
न्यूयॉर्क की गवर्नर कैथी होचुल के अनुसार, ये टैरिफ किराने का सामान, घरेलू ज़रूरी वस्तुएँ, बिल्डिंग मटीरियल और रोज़मर्रा की चीज़ों की कीमतें बढ़ा रहे हैं। यदि अदालत टैरिफ पर रोक लगाती है, तो उपभोक्ताओं को राहत मिल सकती है और पहले चुकाई गई ड्यूटी का रिफंड भी संभव हो सकता है।
व्हाइट हाउस ने इस मुकदमे पर क्या कहा है?
व्हाइट हाउस ने गठबंधन की दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि सेक्शन 301 टैरिफ राष्ट्रपति के पहले कार्यकाल से ही कानूनी रूप से वैध और टिकाऊ उपकरण साबित हुए हैं और मौजूदा प्रशासन में भी उनकी वैधानिक स्थिति बरकरार है।
राष्ट्र प्रेस
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