क्या संघीय अपील अदालत ने ट्रंप के टैरिफ को भारत के लिए गैरकानूनी करार दिया?

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क्या संघीय अपील अदालत ने ट्रंप के टैरिफ को भारत के लिए गैरकानूनी करार दिया?

सारांश

संघीय अपील अदालत ने ट्रंप के व्यापार शुल्क को गैरकानूनी करार दिया है, जिससे भारत को राहत मिली है। ट्रंप ने इस निर्णय की आलोचना की है और इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की योजना बनाई है। क्या भारत को इस मामले में सफलता मिलेगी?

Key Takeaways

  • ट्रंप के व्यापार शुल्क को संघीय अपील अदालत ने गैरकानूनी करार दिया।
  • अदालत ने टैरिफ को 14 अक्टूबर तक लागू रखने की अनुमति दी।
  • ट्रंप ने इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने का इरादा जताया।
  • भारत को मिल सकती है संभावित राहत यदि वह कानूनी चुनौती से बच जाता है।
  • टैरिफ लगाने का अधिकार मुख्य रूप से कांग्रेस के पास है।

न्यूयॉर्क, 30 अगस्त (राष्ट्र प्रेस)। अमेरिका में एक संघीय अपील अदालत ने भारत को संभावित राहत देते हुए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत पर लगाए गए व्यापार शुल्क (टैरिफ) को गैरकानूनी घोषित किया है। अदालत ने अपने निर्णय में कहा कि ट्रंप के पास ऐसे व्यापक अधिकार नहीं थे कि वे इस तरह के शुल्क लगा सकें।

हालांकि, अदालत ने टैरिफ को 14 अक्टूबर तक लागू रहने की अनुमति दी है, ताकि ट्रंप प्रशासन को सुप्रीम कोर्ट में अपील करने का अवसर मिल सके।

शुक्रवार दोपहर, निर्णय आने के तुरंत बाद, ट्रंप ने इसे "बहुत पक्षपाती" कहते हुए इसकी आलोचना की और कहा कि वे इस निर्णय को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देंगे, जहां उन्हें "मदद मिलने" की उम्मीद है।

ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर लिखा, 'यदि इसे ऐसे ही रहने दिया गया तो यह निर्णय सचमुच संयुक्त राज्य अमेरिका को नष्ट कर देगा।'

व्हाइट हाउस के उप प्रेस सचिव कुश देसाई ने अस्थायी रोक का उल्लेख करते हुए कहा कि राष्ट्रपति द्वारा लगाए गए टैरिफ अभी भी लागू रहेंगे और उन्हें उम्मीद है कि सरकार यह मामला अंत में जीत जाएगी।

यह निर्णय उन टैक्स पर लागू होता है जो अंतरराष्ट्रीय आर्थिक आपातकाल के कानून के तहत लगाए गए थे, न कि सुरक्षा से संबंधित टैक्सों पर।

अगर भारत सुप्रीम कोर्ट में कानूनी चुनौती से बच जाता है, तो उस पर लगाया गया 25 फीसद टैरिफ अवश्य हटा दिया जाएगा। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि रूस से तेल खरीदने पर लगाया गया 25 फीसद दंडात्मक शुल्क भी इस निर्णय में शामिल है या नहीं, क्योंकि होमलैंड सिक्योरिटी सचिव क्रिस्टी नोएम का कहना है कि यह शुल्क रूस से अमेरिका को होने वाले खतरे से निपटने के लिए लगाया गया था।

न्यायालय के निर्णय में उन शुल्कों को शामिल नहीं किया गया है जो राष्ट्रीय सुरक्षा के कारण स्टील, एल्युमीनियम और तांबे पर लगाए गए हैं। इसलिए, ऐसा लगता है कि तेल पर लगने वाला टैरिफ अभी भी जारी रह सकता है।

अमेरिकी कोर्ट ऑफ अपील्स ने 7-4 के बहुमत से यह निर्णय सुनाया है कि टैरिफ लगाने का अधिकार मुख्य रूप से कांग्रेस के पास है, न कि राष्ट्रपति के पास। यह निर्णय ट्रंप के टैरिफ संबंधी निर्णय के खिलाफ है। कोर्ट ने कहा कि संविधान में टैरिफ लगाने की शक्ति विशेष रूप से कांग्रेस को दी गई है।

जब ट्रंप सरकार ने ट्रेड वॉर शुरू किया, तो उन्होंने आईईईपीए कानून का इस्तेमाल करते हुए कहा था कि व्यापार घाटे की वजह से देश में आर्थिक आपातकाल की स्थिति बन गई है। इसी के आधार पर उन्होंने सामानों पर टैरिफ यानी सीमा शुल्क लगा दिया था।

अदालत ने कहा कि कानून में स्पष्ट रूप से टैरिफ या टैक्स लगाने का अधिकार नहीं दिया गया है।

पूर्व कार्यवाहक सॉलिसिटर जनरल नील कटियाल डेमोक्रेटिक राज्यों और छोटे कारोबार के समूह के प्रमुख वकीलों में से थे, जिन्होंने ट्रंप के टैरिफ लगाने के अधिकार को अदालत में चुनौती दी थी।

Point of View

न कि राष्ट्रपति को। यह निर्णय अमेरिका के व्यापार नीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ का संकेत है। भारत के लिए यह राहत की बात है, लेकिन आगे की कानूनी लड़ाई में क्या चुनौतियाँ होंगी, यह देखना महत्वपूर्ण होगा।
NationPress
30/08/2025

Frequently Asked Questions

संघीय अपील अदालत का यह निर्णय क्या है?
संघीय अपील अदालत ने ट्रंप द्वारा लगाए गए व्यापार शुल्क को गैरकानूनी करार दिया है, जिससे भारत को संभावित राहत मिली है।
क्या ट्रंप इस निर्णय को चुनौती देंगे?
जी हां, ट्रंप ने इस निर्णय को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की योजना बनाई है।
इस निर्णय का भारत पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
अगर भारत सुप्रीम कोर्ट में कानूनी चुनौती से बच जाता है, तो उस पर लगाया गया 25 फीसद टैरिफ हटा दिया जाएगा।
क्या यह निर्णय अन्य व्यापार शुल्कों पर भी लागू होगा?
यह निर्णय केवल उन व्यापार शुल्कों पर लागू होता है जो अंतरराष्ट्रीय आर्थिक आपातकाल के कानून के तहत लगाए गए थे।
अदालत ने टैरिफ लगाने का अधिकार किसे दिया है?
अदालत ने स्पष्ट किया है कि टैरिफ लगाने का अधिकार मुख्य रूप से कांग्रेस के पास है।