अमेरिकी फेडरल कोर्ट ने ट्रंप के 10% ग्लोबल टैरिफ को रद्द किया, 1974 के व्यापार कानून का हवाला
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिका की फेडरल ट्रेड कोर्ट ने 8 मई को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के 10 प्रतिशत ग्लोबल टैरिफ की घोषणा को गैरकानूनी करार देते हुए रद्द कर दिया। कोर्ट ने 2-1 के बहुमत से फैसला सुनाते हुए कहा कि ट्रंप प्रशासन ने 1974 के व्यापार अधिनियम के तहत अपनी अधिकार सीमा का उल्लंघन किया है। यह फैसला ट्रंप की व्यापार नीति के लिए एक बड़ा कानूनी झटका है।
फैसले का मुख्य आधार
जज मार्क ए. बार्नेट और जज क्लेयर आर. केली ने अपने बहुमत के फैसले में स्पष्ट किया कि 1974 के व्यापार अधिनियम की धारा 122 का उपयोग व्यापक व्यापार घाटे और चालू खाते के घाटे को आधार बनाकर टैरिफ लगाने के लिए नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने कहा कि यह प्रावधान विशेष रूप से 1970 के दशक की अंतरराष्ट्रीय मौद्रिक प्रणाली से जुड़े 'भुगतान-संतुलन' संकटों से निपटने के लिए बनाया गया था। आधुनिक व्यापार घाटे की स्थिति इस कानून के दायरे में नहीं आती।
ट्रंप प्रशासन की दलीलें और कोर्ट की आपत्ति
ट्रंप प्रशासन ने फरवरी में यह टैरिफ लागू किए थे और धारा 122 का हवाला दिया था, जो 150 दिनों तक 15 प्रतिशत तक का अस्थायी आयात अधिभार लगाने की अनुमति देती है। अदालत ने कहा कि प्रशासन ने 'भुगतान-संतुलन घाटे' की बजाय चालू खाते के घाटे और व्यापार घाटे का हवाला दिया, जो कानून की मूल मंशा से अलग है। जजों ने चेतावनी दी कि इस तरह की व्यापक व्याख्या को स्वीकार करने से राष्ट्रपति को प्रभावी रूप से असीमित टैरिफ लगाने का अधिकार मिल जाएगा।
असहमति का स्वर
जज टिमोथी स्टैंसियू ने अल्पमत में रहते हुए ट्रंप की घोषणा का समर्थन किया। उनका तर्क था कि कोर्ट को राष्ट्रपति के आर्थिक निर्णयों पर सवाल नहीं उठाना चाहिए और 'भुगतान-संतुलन घाटे' को संकीर्ण रूप से परिभाषित नहीं किया जाना चाहिए।
पहले भी हुई थी कानूनी चुनौती
गौरतलब है कि इसी वर्ष की शुरुआत में सुप्रीम कोर्ट ने भी राष्ट्रपति ट्रंप की पिछली टैरिफ व्यवस्था को रद्द कर दिया था। यह ऐसे समय में आया है जब ट्रंप की व्यापार नीतियाँ लगातार न्यायिक जाँच के दायरे में आ रही हैं। यह कम से कम दूसरी बड़ी न्यायिक चुनौती है जो ट्रंप के टैरिफ एजेंडे को रोकने में सफल रही है।
आगे क्या होगा
फेडरल ट्रेड कोर्ट के इस फैसले के खिलाफ संयुक्त राज्य अमेरिका की फेडरल सर्किट अपीलीय कोर्ट में अपील की जा सकती है। कानूनी जानकारों के अनुसार, यह मामला अंततः फिर से सुप्रीम कोर्ट तक पहुँच सकता है। ट्रंप प्रशासन की अगली कानूनी रणनीति पर सभी की नज़रें टिकी हैं।