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क्या अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप की टैरिफ रद्दीकरण अपील पर सुनवाई की तेज?

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क्या अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप की टैरिफ रद्दीकरण अपील पर सुनवाई की तेज?

सारांश

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ रद्दीकरण अपील पर तेजी से सुनवाई कर रहा है। अदालत ने कहा कि ट्रंप ने संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन किया है। सुप्रीम कोर्ट इस मामले की सुनवाई नवंबर के पहले सप्ताह में करेगा। क्या यह मामला ट्रंप के लिए नई चुनौतियां लाएगा?

मुख्य बातें

सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप की टैरिफ रद्दीकरण अपील पर तेजी से सुनवाई शुरू की।
ट्रंप ने अपने संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन किया है।
यह मामला कांग्रेस के अधिकारों से जुड़ा है।
सुप्रीम कोर्ट ने मौखिक दलीलें नवंबर में सुनने का निर्णय लिया।
ट्रंप प्रशासन की वित्तीय स्थिति पर गंभीर असर पड़ सकता है।

न्यूयॉर्क, 10 सितंबर (राष्ट्र प्रेस)। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उस अपील पर तेजी से सुनवाई कर रहा है, जिसमें उनके टैरिफ को रद्द करने का फैसला सुनाया गया था। अदालत ने कहा था कि डोनाल्ड ट्रंप ने अपने संवैधानिक अधिकारों का अतिक्रमण किया है। मंगलवार को जारी एक अहस्ताक्षरित आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह नवंबर के पहले सप्ताह में इस मामले में मौखिक दलीलें सुनेगा।

वाशिंगटन की फेडरल सर्किट कोर्ट ऑफ अपील्स ने पिछले महीने मई में कोर्ट ऑफ इंटरनेशनल ट्रेड के फैसले को बरकरार रखा था, जिसमें ट्रंप की ओर से शुरू ट्रेड वार में लगाए गए पारस्परिक टैरिफ को अवैध घोषित किया गया था। अपील्स कोर्ट ने अपने फैसले पर 14 अक्टूबर तक रोक लगा दी थी, और अब यह रोक तब तक जारी रहेगी, जब तक सुप्रीम कोर्ट अपील पर सुनवाई कर रहा है।

ट्रंप प्रशासन ने इस मामले को तेजी से सुनने की मांग की थी, क्योंकि उनका कहना था कि अगर सामान्य प्रक्रिया के तहत जून तक इंतजार किया गया और फिर नकारात्मक फैसला आया, तो सरकार की वित्तीय स्थिति पर गंभीर असर पड़ेगा, क्योंकि उसे 750 बिलियन डॉलर से एक ट्रिलियन डॉलर के बीच टैरिफ वापस करने पड़ सकते हैं।

मंगलवार को एक अन्य फैसले में सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जॉन रॉबर्ट्स ने एक फेडरल जज के उस आदेश को स्थगित कर दिया, जिसमें ट्रंप प्रशासन को कांग्रेस की ओर से स्वीकृत 4 अरब डॉलर की विदेशी सहायता को अनफ्रीज करने का आदेश दिया गया था।

ट्रंप एक 'पॉकेट रिसेशन' सिस्टम का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिसके तहत सरकार बजट में आवंटित धन को वित्तीय वर्ष समाप्त होने से पहले खर्च नहीं कर पाती और ऐसे में धन खजाने में वापस चला जाता है। टैरिफ का मामला संविधान के उस प्रावधान पर टिका है, जो कांग्रेस को टैरिफ लगाने का एकमात्र अधिकार देता है।

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इंटरनेशनल इकोनॉमिक इमरजेंसी पावर्स एक्ट (आईईईपीए) का हवाला देते हुए तथाकथित पारस्परिक शुल्कों को एकतरफा लागू कर दिया। उनका दावा था कि व्यापार घाटे ने एक आर्थिक आपातकाल पैदा कर दिया है, जिससे उन्हें टैरिफ निर्धारित करने का अधिकार मिला है।

सुप्रीम कोर्ट दो अलग-अलग टैरिफ मामलों को एक साथ जोड़ रहा है और उसने इस मामले को लाने वाली पार्टियों और सरकार के वकीलों को 19 सितंबर तक लिखित विवरण दाखिल करने, 20 अक्टूबर तक जवाब देने और 30 अक्टूबर तक उनके जवाब देने की समय सीमा तय की है। कोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान मौखिक बहस को भी एक घंटे तक सीमित कर दिया है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि देश की आर्थिक स्थिरता से भी जुड़ा है। सुप्रीम कोर्ट का निर्णय आने वाले समय में अमेरिकी व्यापार नीति को प्रभावित कर सकता है। हमें इस निर्णय का स्वागत करना चाहिए, जो संविधान की रक्षा करेगा।
RashtraPress
17 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ट्रंप की अपील का मुख्य मुद्दा क्या है?
ट्रंप की अपील का मुख्य मुद्दा यह है कि उनके द्वारा लगाए गए टैरिफ को अवैध घोषित किया गया है, जिससे सरकार की वित्तीय स्थिति पर संकट आ सकता है।
सुप्रीम कोर्ट कब इस मामले की सुनवाई करेगा?
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि वह इस मामले में मौखिक दलीलें नवंबर के पहले सप्ताह में सुनेगा।
क्या ट्रंप का टैरिफ लगाने का अधिकार है?
ट्रंप का टैरिफ लगाने का अधिकार कांग्रेस को दिया गया है, और यह मामला इसी प्रावधान पर आधारित है।
राष्ट्र प्रेस
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