ब्रिक्स 2026: ईरानी राजदूत फतहली बोले — एकल शक्ति पर टिकी वैश्विक सुरक्षा व्यवस्था नाकाम
सारांश
मुख्य बातें
भारत में ईरान के राजदूत मोहम्मद फतहली ने 17 मई 2026 को कहा कि 2026 ब्रिक्स शिखर सम्मेलन इस ऐतिहासिक सच्चाई को सामने रखने का अहम मंच है कि किसी एकल महाशक्ति की गारंटी पर खड़ा वैश्विक सुरक्षा ढाँचा, आज की तेज़ी से बदलती और जटिल होती दुनिया में पूरी तरह विफल हो चुका है। यह बयान नई दिल्ली में संपन्न दो दिवसीय ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक के तत्काल बाद आया, जो ईरान-अमेरिका तनाव की पृष्ठभूमि में और भी महत्वपूर्ण हो जाता है।
राजदूत फतहली का बयान और उसका संदर्भ
राजदूत फतहली ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर लिखा, 'भारत में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन इस अहम सच्चाई को उजागर करने का अवसर है कि किसी एक शक्ति, चाहे वह कितनी भी बड़ी क्यों न हो, द्वारा सुरक्षा और समृद्धि की गारंटी पर आधारित मॉडल आज की जटिल और तेज़ी से बदलती दुनिया में विफल साबित हुआ है।' यह बयान तेहरान की उस व्यापक कूटनीतिक सोच को दर्शाता है, जो ब्रिक्स के विस्तारित समूह में शामिल होने के बाद बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था और सामूहिक वैश्विक दृष्टिकोण की पुरज़ोर वकालत करती रही है।
गौरतलब है कि यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब ईरान और अमेरिका के बीच कूटनीतिक तनाव अपने उच्चतम स्तर पर है, और ब्रिक्स जैसे मंच इस तनाव के बीच वैकल्पिक वैश्विक व्यवस्था की आवाज़ बनते जा रहे हैं।
ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक: मुख्य घटनाक्रम
15 और 16 मई 2026 को नई दिल्ली में भारत की अध्यक्षता में आयोजित दो दिवसीय ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक की अध्यक्षता विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने की। इसमें ब्रिक्स सदस्य देशों के साथ-साथ साझेदार देशों के विदेश मंत्रियों और वरिष्ठ प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।
15 मई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय राजधानी में ब्रिक्स देशों के विदेश मंत्रियों और प्रतिनिधिमंडलों के प्रमुखों से मुलाकात की। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत की अध्यक्षता में ब्रिक्स बहुपक्षवाद को मज़बूत करने, सतत विकास को बढ़ावा देने, आर्थिक लचीलापन बढ़ाने और अधिक समावेशी वैश्विक व्यवस्था के निर्माण की दिशा में काम करेगा।
जयशंकर और अराघची की अपील: संयुक्त राष्ट्र सुधार ज़रूरी
विदेश मंत्री जयशंकर ने बैठक के दौरान भरोसा जताया कि सदस्य देशों के बीच संवाद एक अधिक स्थिर, समतापूर्ण और समावेशी अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था बनाने में सहायक होगा। उन्होंने सुधारवादी बहुपक्षवाद के महत्व को रेखांकित करते हुए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी और अस्थायी दोनों श्रेणियों में सुधार की माँग दोहराई।
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने भी इसी मंच से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि ऐसे सुधार महज़ एक विकल्प नहीं, बल्कि संयुक्त राष्ट्र की प्रासंगिकता बनाए रखने के लिए अनिवार्य हैं। अराघची ने तर्क दिया कि ईरान एक ऐसी सुरक्षा परिषद चाहता है जो दुनिया के सभी महाद्वीपों और क्षेत्रों का वास्तविक प्रतिनिधित्व करे।
एकध्रुवीयता पर ईरान का कड़ा रुख
अराघची ने मौजूदा वैश्विक शासन व्यवस्था पर तीखी टिप्पणी करते हुए कहा, 'आज हम कुछ अंतरराष्ट्रीय संस्थानों में जो देख रहे हैं, वह बहुपक्षीय नहीं है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय कानून की आड़ में एकध्रुवीयता को बनाए रखने की कोशिश है। अंतरराष्ट्रीय कानून का चयनात्मक उपयोग, एकतरफा प्रतिबंध और राष्ट्रीय संप्रभुता की अनदेखी — ये सब मौजूदा वैश्विक शासन ढाँचे में बढ़ते संकट को उजागर करते हैं।'
यह ऐसे समय में आया है जब ब्रिक्स के विस्तार के बाद समूह की सामूहिक आवाज़ और भी वज़नदार हो गई है, और पश्चिमी नेतृत्व वाली संस्थाओं के प्रति वैकल्पिक दृष्टिकोण को वैश्विक दक्षिण में व्यापक समर्थन मिल रहा है।
आगे की राह
नई दिल्ली में संपन्न यह बैठक 2026 ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की तैयारियों की कड़ी में एक महत्वपूर्ण कदम है। विशेषज्ञों के अनुसार, ईरान जैसे नए सदस्यों की सक्रिय भागीदारी ब्रिक्स के एजेंडे को और अधिक भू-राजनीतिक रंग दे रही है। भारत की अध्यक्षता में यह संतुलन साधना — पश्चिमी साझेदारों को नाराज़ किए बिना बहुध्रुवीय आवाज़ों को जगह देना — नई दिल्ली की कूटनीतिक परीक्षा बनी रहेगी।