ईरान का भारत को होर्मुज स्ट्रेट से सुरक्षित मार्ग का आश्वासन: राजदूत फतहली
सारांश
Key Takeaways
- ईरान ने भारतीय जहाजों को होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने की अनुमति दी है।
- भारत और ईरान के बीच साझा हित हैं।
- सुरक्षा उपायों को मजबूत किया जा रहा है।
नई दिल्ली, १३ मार्च (राष्ट्र प्रेस)। भारत में ईरान के राजदूत मोहम्मद फतहली ने शुक्रवार को यह संकेत दिया कि मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच होर्मुज स्ट्रेट से भारतीय जहाजों को शीघ्र ही सुरक्षित आवाजाही की अनुमति दी जा सकती है।
राजदूत फतहली ने स्पष्ट किया कि भारत और ईरान के बीच क्षेत्र में साझा हित हैं। उन्होंने कहा, “भारत हमारा मित्र देश है। आप इसे दो-तीन घंटों के भीतर देखेंगे। हमारे अनुसार, ईरान और भारत की भलाई के लिए समान हित हैं।”
इसके अतिरिक्त, उन्होंने कहा कि युद्ध के बाद मौजूदा स्थितियों में भारत सरकार ने कई क्षेत्रों में ईरान की सहायता की है।
राजदूत का यह बयान उस समय आया है जब एक दिन पहले ईरान के उप विदेश मंत्री मजीद तख्त-रवांची ने पुष्टि की थी कि तेहरान ने कुछ देशों के जहाजों को होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने की अनुमति दी है।
तख्त-रवांची ने यह भी कहा कि ईरान पर जलडमरूमध्य में बारूदी सुरंगें बिछाने के आरोप गलत हैं। उन्होंने कहा कि युद्ध के दौरान यह मार्ग बंद था।
उन्होंने यह भी कहा कि ईरान दुश्मन देशों को इस स्ट्रेट का उपयोग नहीं करने देगा। उनके अनुसार, जो देश ईरान के खिलाफ आक्रामक कार्रवाई में शामिल रहे हैं, उन्हें इस मार्ग से सुरक्षित आवाजाही का लाभ नहीं दिया जाएगा।
यह ध्यान देने योग्य है कि होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक तेल और गैस निर्यात का लगभग २० प्रतिशत गुजरता है।
इसी बीच, भारत के पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय ने बताया कि फारस की खाड़ी क्षेत्र में भारतीय झंडे वाले जहाजों की संख्या २८ बनी हुई है, और सभी जहाजों तथा उनके चालक दल की सुरक्षा पर ध्यान दिया जा रहा है।
इनमें से २४ जहाज होर्मुज स्ट्रेट के पश्चिम में हैं, जिन पर ६७७ भारतीय नाविक सवार हैं, जबकि चार जहाज जलडमरूमध्य के पूर्व में हैं, जिन पर १०१ भारतीय नाविक मौजूद हैं।
मंत्रालय के अनुसार, संबंधित प्राधिकरण, जहाज प्रबंधक और भर्ती एजेंसियां भारतीय दूतावासों और स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर जहाजों और नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित कर रहे हैं, और आवश्यकता पड़ने पर चिकित्सा सहायता भी उपलब्ध कराई जा रही है।
साथ ही, डायरेक्टर जनरल ऑफ शिपिंग द्वारा २८ फरवरी २०२६ को जारी सुरक्षा संबंधी सलाह अभी भी लागू है। मंत्रालय ने कहा कि फारस की खाड़ी क्षेत्र की समुद्री स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है और परिस्थितियों के अनुसार निगरानी और तैयारी के उपाय मजबूत किए गए हैं।