भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता: धारा 301 कार्यवाही और द्विपक्षीय समझौते पर नई दिल्ली में तीन दिवसीय बैठक
सारांश
मुख्य बातें
वाणिज्य मंत्रालय ने बुधवार, 3 जून 2026 को पुष्टि की कि भारत और अमेरिका के बीच 1974 के अमेरिकी व्यापार अधिनियम की धारा 301 के तहत शुरू की गई कार्यवाही और 2 फरवरी को हुए अंतरिम द्विपक्षीय व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के लिए सघन बातचीत जारी है। दोनों देशों के वरिष्ठ अधिकारी इस समय नई दिल्ली में तीन दिवसीय वार्ता कर रहे हैं, जिससे आगामी शुल्क दरों में राहत मिलने की संभावना जताई जा रही है।
USTR की जाँच और शुल्क प्रस्ताव
मंत्रालय के अनुसार, यूएस ट्रेड रिप्रिजेंटेटिव (USTR) ने भारत सहित 60 अर्थव्यवस्थाओं द्वारा वस्तुओं के आयात को बाधित करने वाले कथित उपायों पर अपनी जाँच पूरी कर ली है। इसी आधार पर USTR ने इन देशों से होने वाले आयात पर अतिरिक्त शुल्क लगाने का प्रस्ताव रखा है।
हालाँकि, धारा 232 के अंतर्गत आने वाले शुल्क और कुछ चुनिंदा उत्पादों को इस प्रस्तावित ढाँचे से बाहर रखा गया है। वस्त्र और परिधान क्षेत्र के लिए एक विशेष व्यवस्था भी प्रस्तावित है, जिसके तहत चुनिंदा अर्थव्यवस्थाओं से एक तय मात्रा तक आयात कम शुल्क दर पर अमेरिकी बाजार में प्रवेश पा सकेगा।
सार्वजनिक सुनवाई की समयरेखा
रिपोर्टों के अनुसार, प्रस्तावित शुल्क अभी अंतिम रूप नहीं ले सके हैं। हितधारक 22 जून 2026 तक सार्वजनिक सुनवाई में भाग लेने के लिए अनुरोध प्रस्तुत कर सकते हैं, जबकि लिखित टिप्पणियाँ 6 जुलाई 2026 तक स्वीकार की जाएँगी। सार्वजनिक सुनवाई 7 जुलाई को निर्धारित है। USTR अंतिम निर्णय लेने से पहले प्राप्त टिप्पणियों और गवाहियों पर विचार करेगा।
अंतरिम समझौते की पृष्ठभूमि
7 फरवरी को जारी भारत-अमेरिका संयुक्त बयान ने पारस्परिक रूप से लाभकारी व्यापार के लिए एक ऐतिहासिक अंतरिम समझौते की रूपरेखा तय की थी, और दोनों पक्षों को व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) की वार्ता के लिए प्रतिबद्ध किया था। गौरतलब है कि यह कदम ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर शुल्क संरक्षणवाद बढ़ रहा है और कई एशियाई अर्थव्यवस्थाएँ अमेरिकी बाजार पहुँच को लेकर बातचीत में जुटी हैं।
राजदूत का बयान और उद्योग की निगाहें
भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने हाल ही में कहा कि अमेरिका भारत के साथ नए द्विपक्षीय व्यापार समझौते के विवरण को अंतिम रूप देने को उत्सुक है — जिससे बाजार पहुँच विस्तारित होगी, गैर-शुल्क बाधाएँ घटेंगी और दोनों ओर के व्यवसायों के लिए अधिक निश्चितता बनेगी। निर्यातक संगठनों की निगाहें अब जुलाई की सुनवाई और दिल्ली वार्ता के परिणामों पर टिकी हैं।