अमेरिका ने 60 देशों में जबरन मजदूरी पर जांच का किया आगाज
सारांश
Key Takeaways
- अमेरिका ने 60 देशों में जबरन मजदूरी पर जांच शुरू की है।
- जांच का उद्देश्य अमेरिकी कामगारों के हितों की सुरक्षा करना है।
- जांच में शामिल देशों की नीतियों की समीक्षा की जाएगी।
- अमेरिकी कानून के तहत जबरन मजदूरी पर प्रतिबंध है।
- वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में जबरन मजदूरी का मुद्दा गंभीर है।
वॉशिंगटन, 13 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। अमेरिका ने यूरोपीय संघ, भारत, जापान और चीन सहित 60 अर्थव्यवस्थाओं के खिलाफ जांच की प्रक्रिया शुरू की है। इसका उद्देश्य यह निर्धारित करना है कि क्या जबरन मजदूरी से निर्मित उत्पादों के आयात पर प्रतिबंध लगाने में इनकी विफलता अमेरिकी श्रमिकों और व्यवसायों को अनुचित रूप से नुकसान पहुंचा रही है।
यह महत्वपूर्ण जांच गुरुवार को अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (यूएसटीआर) के कार्यालय द्वारा ट्रेड एक्ट 1974 की धारा 301(बी) के तहत प्रारंभ की गई। इसमें वॉशिंगटन के कुछ प्रमुख व्यापारिक साझेदारों पर ध्यान केंद्रित किया गया है।
जांच में यह मूल्यांकन किया जाएगा कि क्या जबरन मजदूरी से बने उत्पादों के आयात पर प्रतिबंध लगाने की नीतियां और कार्यवाहियां इन अर्थव्यवस्थाओं में अनुचित या भेदभावपूर्ण हैं और क्या ये अमेरिकी व्यापार पर कोई बोझ डालती हैं।
अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि राजदूत जेमिसन ग्रीर ने कहा, “हालांकि जबरन मजदूरी के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय सहमति है, लेकिन कई सरकारें ऐसे उत्पादों पर प्रभावी प्रतिबंध लागू करने में असफल रही हैं।”
उन्होंने यह भी कहा कि “कई वर्षों से अमेरिकी कामगारों और कंपनियों को ऐसे विदेशी उत्पादकों के साथ प्रतिस्पर्धा करनी पड़ रही है, जिन्हें जबरन मजदूरी जैसी समस्याओं के कारण कृत्रिम लागत लाभ मिल सकता है।”
इन जांचों का लक्ष्य यह निर्धारित करना है कि क्या सरकारों ने जबरन मजदूरी से बने सामान के आयात को प्रतिबंधित करने के लिए पर्याप्त कदम उठाए हैं और इस तरह की प्रथाओं की विफलता का अमेरिकी श्रमिकों और व्यवसायों पर क्या प्रभाव पड़ता है।
जांच में शामिल देशों में भारत, चीन, यूरोपीय संघ, जापान, यूनाइटेड किंगडम, बांग्लादेश, वियतनाम, पाकिस्तान, ब्राज़ील, मेक्सिको और कई अन्य व्यापारिक साझेदार शामिल हैं।
अमेरिकी कानून की धारा 301 वॉशिंगटन को उन विदेशी सरकारी नीतियों और प्रथाओं के खिलाफ कार्रवाई करने का अधिकार देती है, जिन्हें अनुचित, भेदभावपूर्ण या अमेरिकी व्यापार के लिए बाधक माना जाता है।
यूएसटीआर अपने अधिकार के तहत ऐसे जांचें आरंभ कर सकता है और यह तय कर सकता है कि क्या विदेशी देशों की नीतियां संभावित व्यापारिक कार्रवाई के लिए कानूनी मानकों को पूरा करती हैं।
इस प्रक्रिया के तहत अमेरिका ने जांच के दायरे में आने वाली अर्थव्यवस्थाओं की सरकारों के साथ परामर्श की भी मांग की है।
जांच में यह भी मूल्यांकन किया जाएगा कि जबरन मजदूरी से बने उत्पादों पर प्रभावी प्रतिबंधों की अनुपस्थिति कंपनियों को अनुचित श्रम प्रथाओं से लाभ उठाने का अवसर प्रदान कर रही है, जिससे वैश्विक प्रतिस्पर्धा प्रभावित हो रही है।
यूएसटीआर के दस्तावेजों के अनुसार, लंबे समय से चले आ रहे अंतरराष्ट्रीय समझौतों के बावजूद वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में जबरन मजदूरी का मुद्दा अभी भी गंभीर है।
एजेंसी ने कहा कि इस प्रकार का शोषण वैध उत्पादकों को नुकसान पहुंचा सकता है और कम श्रम लागत पर बने उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय व्यापार में प्रवेश देकर बाजार को विकृत कर सकता है।
अमेरिकी कानून लगभग एक शताब्दी से उन वस्तुओं के आयात पर प्रतिबंध लगाता आया है जो पूरी तरह या आंशिक रूप से जबरन मजदूरी से निर्मित होती हैं। यह प्रतिबंध मानवीय चिंताओं और घरेलू उद्योगों पर पड़ने वाले आर्थिक प्रभाव को ध्यान में रखकर लगाया गया है।
अंतरराष्ट्रीय आकलन के अनुसार, यह समस्या अब भी व्यापक रूप से फैली हुई है। अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन के अनुसार, 2021 तक दुनिया भर में 2.8 करोड़ लोग जबरन मजदूरी की स्थिति में थे, जिससे वैश्विक निजी अर्थव्यवस्था में प्रति वर्ष लगभग 63.9 अरब डॉलर का लाभ होता है।