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अमेरिकी सेक्शन 301 टैरिफ के खिलाफ भारत की पलटवार, 8 जुलाई को USTR सुनवाई में CII-FICCI देंगे गवाही

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अमेरिकी सेक्शन 301 टैरिफ के खिलाफ भारत की पलटवार, 8 जुलाई को USTR सुनवाई में CII-FICCI देंगे गवाही

सारांश

भारत ने अमेरिकी सेक्शन 301 के तहत प्रस्तावित 12.5% अतिरिक्त टैरिफ को बेबुनियाद बताते हुए चुनौती दी है। CII, FICCI, वाणिज्य मंत्रालय और ACMA 8-9 जुलाई को USTR के सामने संयुक्त मोर्चा खोलेंगे — यह भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों की एक निर्णायक परीक्षा है।

मुख्य बातें

USTR ने सेक्शन 301 जाँच के तहत भारतीय निर्यात पर 12.5% अतिरिक्त शुल्क का प्रस्ताव रखा है, जो जबरन श्रम संबंधी आरोपों पर आधारित है।
CII की शुचिता सोनालिका और FICCI की पूर्णिमा शेनॉय 8 जुलाई को USTR पैनल 8 में गवाही देंगी; ACMA के विनी मेहता 9 जुलाई को।
भारत ने 2021-2025 के दौरान 1.537 अरब डॉलर का अमेरिकी कॉटन आयात किया — चीन से लगभग दोगुना — जो CII के अनुसार अमेरिकी व्यापार पर अनुचित बोझ के दावे को खारिज करता है।
भारत का तर्क है कि संविधान के अनुच्छेद 23 , बॉन्डेड लेबर उन्मूलन अधिनियम और 2019-2020 के चार श्रम संहिताएँ पहले से ही पर्याप्त सुरक्षा प्रदान करती हैं।
USTR की यह जाँच 60 अर्थव्यवस्थाओं को कवर करती है; अंतिम निर्णय से पहले प्रस्ताव सार्वजनिक टिप्पणियों के लिए खुला है।

भारत सरकार और प्रमुख उद्योग संगठनों ने अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय (USTR) के उस प्रस्ताव के खिलाफ एकजुट मोर्चा खोल दिया है, जिसमें सेक्शन 301 की जांच के तहत भारतीय निर्यात पर 12.5 प्रतिशत की अतिरिक्त आयात शुल्क लगाने की बात कही गई है। सरकारी अधिकारियों और उद्योग जगत का कहना है कि जबरन श्रम (फोर्स्ड लेबर) को लेकर वाशिंगटन के निष्कर्ष कानूनी रूप से कमज़ोर हैं, पर्याप्त साक्ष्यों पर आधारित नहीं हैं, और इनसे दुनिया की सबसे बड़ी तथा पाँचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच जुड़ी आपूर्ति श्रृंखलाएँ प्रभावित हो सकती हैं।

8 और 9 जुलाई की सुनवाई: कौन देगा गवाही

8 जुलाई 2026 को USTR की सेक्शन 301 कमेटी के सामने पैनल 8 में फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (FICCI) की पूर्णिमा शेनॉय और कन्फेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री (CII) की शुचिता सोनालिका गवाही देंगी। पैनल 9 में वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के डॉ. बृज मोहन और कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) के शुभम अरोड़ा भारत का पक्ष रखेंगे। ऑटोमोटिव कंपोनेंट मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (ACMA) के महानिदेशक विनी मेहता 9 जुलाई को गवाही देंगे।

भारत सरकार की आधिकारिक आपत्ति

वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय ने USTR के निष्कर्षों को सिरे से खारिज किया है। मंत्रालय का कहना है कि भारत में एक सुदृढ़ घरेलू कानूनी ढाँचा मौजूद है, जिसमें कानूनी प्रतिबंध, संस्थागत प्रणालियाँ और जबरन श्रम की कमज़ोरियों को दूर करने के लिए जारी नीतिगत उपाय शामिल हैं। भारत का यह भी तर्क है कि इस बात के पर्याप्त और ठोस साक्ष्य नहीं हैं कि भारत की आयात व्यवस्था अमेरिकी व्यापार पर कोई अनुचित बोझ डालती है — जबकि सेक्शन 301 के तहत कार्रवाई के लिए ऐसे प्रमाण अनिवार्य हैं।

CII और FICCI का कानूनी एवं आर्थिक तर्क

CII ने प्रस्तावित कार्रवाई के खिलाफ विस्तृत कानूनी और आर्थिक दलीलें तैयार की हैं। संगठन का कहना है कि भारत का नीतिगत ढाँचा US ट्रेड एक्ट के सेक्शन 301 के तहत गलत या भेदभावपूर्ण नहीं है। भारत के संवैधानिक सुरक्षा उपाय आर्टिकल 23 में निहित हैं और बॉन्डेड लेबर सिस्टम (उन्मूलन) अधिनियम, बाल श्रम (निषेध एवं विनियमन) संशोधन अधिनियम तथा 2019-2020 के बीच लागू चार श्रम संहिताओं से और मज़बूत हुए हैं।

CII ने USTR की रिपोर्ट में दिए गए उदाहरणों पर भी आपत्ति जताई है। संगठन के अनुसार, भारत ने 2021-2025 की समीक्षा अवधि के दौरान म्यांमार से कोई चावल और मलावी से कोई तंबाकू आयात नहीं किया। साथ ही, भारत ने इसी अवधि में 1.537 अरब अमेरिकी डॉलर का अमेरिकी कॉटन आयात किया — जो चीन से उसके आयात का लगभग दोगुना है। CII का तर्क है कि इससे साफ होता है कि भारत की नीतियाँ अमेरिकी व्यापार पर अनुचित बोझ नहीं डालतीं।

FICCI का कहना है कि अमेरिकी बाज़ार की सेवा करने वाली भारतीय निर्यात आपूर्ति श्रृंखलाएँ पहले से ही ट्रेसेबिलिटी, सप्लायर ड्यू डिलिजेंस, स्वतंत्र ऑडिट और ज़िम्मेदार सोर्सिंग पर आधारित सुगठित अनुपालन ढाँचों के भीतर काम करती हैं। संगठन ने चेताया है कि बड़े पैमाने पर टैरिफ से अमेरिकी व्यवसायों और उपभोक्ताओं की लागत बढ़ेगी और हाल के वर्षों में मज़बूत हुई आपूर्ति श्रृंखलाओं में अनावश्यक बाधा आएगी।

क्षेत्रवार असर: कृषि से ऑटो कंपोनेंट तक

APEDA समिति के सामने भारत के कृषि निर्यात का पक्ष रखने की तैयारी में है। FICCI का कहना है कि भारत का चावल क्षेत्र जबरन श्रम का उपयोग नहीं करता और न ही ऐसे इनपुट आयात करता है। ACMA ने ऑटोमोटिव कंपोनेंट उद्योग को छूट देने की माँग की है, यह तर्क देते हुए कि फोर्जिंग, फाउंड्री और कृषि मशीनरी जैसे क्षेत्र पूँजी-गहन, कौशल-आधारित और वैश्विक रूप से एकीकृत हैं — जहाँ जबरन श्रम का तर्क लागू नहीं होता। संगठन के अनुसार, अतिरिक्त शुल्क से एकीकृत आपूर्ति श्रृंखलाओं में बाधा आएगी और अमेरिकी ऑटोमोटिव उद्योग के लिए सोर्सिंग में अनिश्चितता पैदा होगी।

आगे क्या होगा

USTR की सेक्शन 301 जाँच 60 अर्थव्यवस्थाओं को कवर करती है और इस बात पर केंद्रित है कि क्या देशों ने जबरन श्रम से बने आयात पर प्रभावी कानूनी रोक लगाई है। यह प्रस्ताव अभी सार्वजनिक टिप्पणियों के लिए खुला है और अंतिम निर्णय बाद में लिया जाएगा। CII ने USTR से अपील की है कि वह दंडात्मक टैरिफ की जगह स्थापित भारत-अमेरिका व्यापार नीति मंच के ज़रिए अनुपालन-आधारित सहयोग को प्राथमिकता दे। यह सुनवाई ऐसे समय में हो रही है जब भारत-अमेरिका व्यापार संबंध नए समझौतों की दिशा में बढ़ रहे हैं, और इसका परिणाम दोनों देशों की आपूर्ति श्रृंखलाओं की दिशा तय कर सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

श्रम संहिताएँ और ESG अनुपालन ढाँचे वास्तव में मौजूद हैं। लेकिन असली सवाल यह है कि क्या ये ढाँचे ज़मीन पर उतने ही प्रभावी हैं जितने कागज़ पर दिखते हैं — और इसका जवाब भारत सरकार ने USTR को नहीं, बल्कि खुद को देना है। यदि यह टैरिफ लागू होता है, तो ऑटो कंपोनेंट, कृषि और वस्त्र क्षेत्र सबसे पहले प्रभावित होंगे — और इन क्षेत्रों में रोज़गार की संख्या करोड़ों में है।
RashtraPress
2 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अमेरिका का सेक्शन 301 टैरिफ प्रस्ताव भारत के लिए क्या है?
USTR ने सेक्शन 301 जाँच के तहत भारतीय निर्यात पर 12.5% अतिरिक्त आयात शुल्क लगाने का प्रस्ताव रखा है। यह जाँच इस बात पर केंद्रित है कि क्या भारत जबरन श्रम से बने सामान के आयात पर प्रभावी रोक लगाता है और उसे लागू करता है।
भारत इस टैरिफ प्रस्ताव को कैसे चुनौती दे रहा है?
भारत सरकार और CII, FICCI, ACMA जैसे प्रमुख उद्योग संगठन 8-9 जुलाई 2026 को USTR की सुनवाई में संयुक्त रूप से गवाही देंगे। वे तर्क दे रहे हैं कि भारत का कानूनी और संस्थागत ढाँचा पहले से ही जबरन श्रम के खिलाफ पर्याप्त सुरक्षा प्रदान करता है।
CII ने USTR के किन उदाहरणों पर आपत्ति जताई है?
CII ने कहा है कि भारत ने 2021-2025 के दौरान म्यांमार से कोई चावल और मलावी से कोई तंबाकू आयात नहीं किया — जो USTR रिपोर्ट में उद्धृत उदाहरण हैं। इसके अलावा, भारत ने इसी अवधि में 1.537 अरब डॉलर का अमेरिकी कॉटन आयात किया, जो चीन से लगभग दोगुना है।
इस टैरिफ से कौन-से भारतीय क्षेत्र सबसे अधिक प्रभावित होंगे?
कृषि (विशेषकर चावल निर्यात), ऑटोमोटिव कंपोनेंट, फोर्जिंग और फाउंड्री क्षेत्र सबसे अधिक प्रभावित होंगे। ACMA ने ऑटोमोटिव कंपोनेंट्स को छूट देने की माँग की है, जबकि APEDA कृषि निर्यात का बचाव करेगा।
इस मामले में अंतिम फैसला कब आएगा?
यह प्रस्ताव अभी सार्वजनिक टिप्पणियों के लिए खुला है और 8-9 जुलाई की सुनवाई के बाद USTR अंतिम निर्णय लेगा। USTR की सेक्शन 301 जाँच 60 अर्थव्यवस्थाओं को कवर करती है और अंतिम तारीख की अभी आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।
राष्ट्र प्रेस
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