अमेरिका के नए टैरिफ से भारत का निर्यात प्रभावित होने की आशंका
सारांश
Key Takeaways
- अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने टैरिफ पर निर्णय दिया है।
- नए टैरिफ का प्रभाव भारत के निर्यात पर पड़ सकता है।
- सेक्शन 232 के तहत राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर शुल्क लगाए जा सकते हैं।
- अमेरिका के ट्रेड पॉलिसी पर लगातार जांच हो रही है।
- अमेरिका ने ग्लोबल 15 फीसदी टैरिफ का प्रस्ताव दिया है।
वॉशिंगटन, 24 फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के हालिया निर्णय के बाद, अमेरिका कुछ नए उत्पादों पर कठोर टैरिफ (आयात शुल्क) लागू करने का विचार कर रहा है। इन उत्पादों में बड़ी बैटरियां, कास्ट आयरन, प्लास्टिक पाइप, औद्योगिक रसायन, पावर ग्रिड और टेलीकॉम उपकरण जैसे क्षेत्र शामिल हो सकते हैं।
अगर अमेरिका नए “राष्ट्रीय सुरक्षा” टैरिफ लागू करता है, तो इसका प्रभाव भारत जैसे देशों पर पड़ सकता है, विशेष रूप से धातुओं, रसायनों, और औद्योगिक पुर्जों के निर्यात पर, क्योंकि ये उत्पाद वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला का हिस्सा हैं।
वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक रिपोर्ट के अनुसार, ये टैरिफ 1962 के व्यापार कानून के सेक्शन 232 के तहत लगाए जा सकते हैं। यह प्रावधान राष्ट्रपति को “राष्ट्रीय सुरक्षा” के नाम पर आयात पर शुल्क लगाने की अनुमति देता है।
फाइनेंशियल डेली ने बताया कि ये नए टैरिफ, ग्लोबल 15 फीसदी टैरिफ के विपरीत होंगे, जिसे ट्रंप ने पांच महीने तक बनाए रखने का प्रस्ताव दिया है।
सेक्शन 232 का उपयोग पहले स्टील, एल्युमिनियम, कॉपर, कार और ऑटो पार्ट्स पर टैरिफ लगाने के लिए किया जा चुका है। हालांकि, यह अभी स्पष्ट नहीं है कि नई जांच कब शुरू होगी और टैरिफ कब लागू होंगे।
सेक्शन 232 के तहत लंबी जांच की आवश्यकता होती है, लेकिन एक बार टैरिफ लागू होने के बाद, ड्यूटी को एकतरफा रूप से बदला जा सकता है।
व्हाइट हाउस के प्रवक्ता कुश देसाई ने कहा, “अमेरिका की राष्ट्रीय और आर्थिक सुरक्षा की रक्षा राष्ट्रपति ट्रंप के लिए सर्वोच्च प्राथमिकता है और प्रशासन इसे पूरा करने के लिए हर कानूनी उपाय करने के लिए प्रतिबद्ध है।”
हाल ही में, सुप्रीम कोर्ट ने इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट के तहत ट्रंप के दूसरे कार्यकाल के अधिकांश टैरिफ को 6-3 से समाप्त करने का फैसला सुनाया। मीडिया के अनुसार, फैसले में सेक्शन 232 टैरिफ पर कोई चर्चा नहीं की गई है।
ट्रंप प्रशासन की व्यापार नीति पर अमेरिकी अदालत और व्यापारिक साझेदार बार-बार जांच कर रहे हैं। स्टील और एल्युमिनियम पर उनके पूर्व के टैरिफ ने भारत समेत कई देशों से प्रतिशोधात्मक कार्रवाई शुरू कर दी थी।