फोर्स्ड लेबर कार्रवाई में भारत पर अमेरिका का 10% टैरिफ, 60 देशों में सबसे अनुकूल श्रेणी
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने 24 जुलाई 2026 को सेक्शन 301 के तहत एक बड़ी व्यापार कार्रवाई में 60 अर्थव्यवस्थाओं पर फोर्स्ड लेबर से बने उत्पादों के आयात को लेकर टैरिफ लगाया है। भारत को इस सूची में सबसे अनुकूल श्रेणी में रखा गया है और उस पर केवल 10 प्रतिशत शुल्क लागू होगा — जबकि चीन, ब्राजील और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देशों पर 12.5 प्रतिशत का उच्च टैरिफ लगाया गया है।
भारत को कम टैरिफ क्यों मिला
अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय (यूएसटीआर) ने स्पष्ट किया कि जांच प्रक्रिया के दौरान भारत ने फोर्स्ड लेबर से निर्मित उत्पादों के आयात पर प्रतिबंध लागू किया। जून 2026 में प्रस्तावित कार्रवाई प्रकाशित होने के बाद भारत ने यह कदम उठाया, जिसके चलते उसे कम टैरिफ वाली श्रेणी में स्थान मिला।
भारत के साथ इस 10 प्रतिशत वाली श्रेणी में 17 अर्थव्यवस्थाएँ शामिल हैं — जिनमें बांग्लादेश, कनाडा, इंडोनेशिया, मलेशिया, मेक्सिको, पाकिस्तान, श्रीलंका और यूनाइटेड किंगडम भी हैं। कंबोडिया, ग्वाटेमाला, होंडुरास, श्रीलंका तथा त्रिनिदाद एवं टोबैगो ने भी जांच शुरू होने के बाद ऐसे प्रतिबंध अपनाए।
यूएसटीआर की घोषणा और जांच प्रक्रिया
यूएसटीआर ने 12 मार्च को इन जांचों की शुरुआत की थी। इस प्रक्रिया में दो चरणों में सार्वजनिक सुनवाई हुई, 45 से अधिक सरकारों से परामर्श किया गया, 2,100 से अधिक सार्वजनिक टिप्पणियाँ प्राप्त हुईं और 100 से अधिक गवाहों के बयान दर्ज किए गए।
2 जून को यूएसटीआर ने निष्कर्ष निकाला कि सभी 60 अर्थव्यवस्थाओं की नीतियाँ और व्यवहार 'अनुचित' हैं तथा वे अमेरिकी व्यापार पर प्रतिकूल प्रभाव डालते हैं — जिससे 1974 के ट्रेड एक्ट की धारा 301 के तहत कार्रवाई का आधार बना।
अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि का बयान
अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीर ने कहा, 'राष्ट्रपति ट्रंप मानते हैं कि दशकों की नैतिक अपील के बावजूद वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं से फोर्स्ड लेबर समाप्त नहीं हुआ है। अमेरिका लगभग एक सदी से ऐसे उत्पादों के आयात पर प्रतिबंध लागू कर रहा है और उसका सख्ती से पालन भी कराता है। अब समय आ गया है कि हमारे व्यापारिक साझेदार भी ऐसा करें।'
ग्रीर ने आगे कहा, 'आज की कार्रवाई मानवाधिकारों के उल्लंघन और व्यापार में विकृति दोनों को दूर करने की दिशा में एक कदम है, जिससे दुनिया भर के श्रमिकों का कल्याण बेहतर होगा।'
किन देशों पर कितना टैरिफ और छूट की व्यवस्था
चीन, ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, वियतनाम और दक्षिण अफ्रीका सहित अधिकांश अन्य अर्थव्यवस्थाओं पर 12.5 प्रतिशत का टैरिफ लागू होगा। यूरोपीय संघ, जापान, दक्षिण कोरिया, स्विट्जरलैंड और ताइवान के लिए मौजूदा मोस्ट-फेवर्ड-नेशन (एमएफएन) दरों को समायोजित कर टैरिफ तय किया जाएगा।
यूएसटीआर ने कुछ उत्पादों को इस कार्रवाई से छूट दी है — जिनमें चुनिंदा कच्चा माल, घरेलू आपूर्ति श्रृंखला के लिए महत्वपूर्ण वस्तुएँ, दवाएँ और सेमीकंडक्टर निर्माण उपकरण शामिल हैं। बांग्लादेश, कंबोडिया, इंडोनेशिया और मलेशिया के लिए अतिरिक्त टैरिफ-रेट कोटा विकसित किए जाएँगे, ताकि अमेरिकी कपास और वस्त्र सामग्री से बने उत्पादों के आयात को प्रोत्साहन मिले।
आगे क्या होगा
ये सभी नए शुल्क 24 जुलाई 2026 से प्रभावी हो गए हैं। यह कार्रवाई अमेरिका के शीर्ष 60 व्यापारिक साझेदारों पर लागू है, जो अमेरिकी आयात का 99.4 प्रतिशत हिस्सा हैं। जॉर्डन ने अमेरिका के साथ पारस्परिक व्यापार समझौते के तहत फोर्स्ड लेबर प्रतिबंध अपनाने की प्रतिबद्धता जताई है। गौरतलब है कि सेक्शन 301 का इस्तेमाल पहले मुख्यतः चीन के साथ व्यापारिक विवादों में होता था — वर्तमान प्रशासन ने इसे श्रम संबंधी व्यापारिक मामलों तक विस्तारित कर एक नई मिसाल कायम की है।