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फोर्स्ड लेबर कार्रवाई में भारत पर अमेरिका का 10% टैरिफ, 60 देशों में सबसे अनुकूल श्रेणी

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फोर्स्ड लेबर कार्रवाई में भारत पर अमेरिका का 10% टैरिफ, 60 देशों में सबसे अनुकूल श्रेणी

सारांश

अमेरिका की सेक्शन 301 कार्रवाई में भारत को राहत — 60 देशों में से केवल 17 को मिली 10% की अनुकूल श्रेणी में भारत शामिल है। जांच के दौरान फोर्स्ड लेबर आयात प्रतिबंध अपनाने की वजह से भारत चीन और ब्राजील जैसे देशों से बेहतर स्थिति में है, जिन पर 12.5% टैरिफ लगा।

मुख्य बातें

अमेरिका ने 24 जुलाई 2026 से सेक्शन 301 के तहत 60 अर्थव्यवस्थाओं पर फोर्स्ड लेबर टैरिफ लागू किया।
भारत पर केवल 10 प्रतिशत टैरिफ — 17 देशों की सबसे अनुकूल श्रेणी में शामिल।
चीन, ब्राजील, यूएई, वियतनाम और दक्षिण अफ्रीका पर 12.5 प्रतिशत का उच्च टैरिफ।
जांच के दौरान भारत द्वारा फोर्स्ड लेबर आयात प्रतिबंध अपनाने के कारण कम टैरिफ श्रेणी मिली।
दवाएँ, सेमीकंडक्टर उपकरण और कुछ कच्चे माल को इस कार्रवाई से छूट दी गई है।
यह कार्रवाई अमेरिकी आयात के 99.4 प्रतिशत हिस्से को कवर करती है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने 24 जुलाई 2026 को सेक्शन 301 के तहत एक बड़ी व्यापार कार्रवाई में 60 अर्थव्यवस्थाओं पर फोर्स्ड लेबर से बने उत्पादों के आयात को लेकर टैरिफ लगाया है। भारत को इस सूची में सबसे अनुकूल श्रेणी में रखा गया है और उस पर केवल 10 प्रतिशत शुल्क लागू होगा — जबकि चीन, ब्राजील और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देशों पर 12.5 प्रतिशत का उच्च टैरिफ लगाया गया है।

भारत को कम टैरिफ क्यों मिला

अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय (यूएसटीआर) ने स्पष्ट किया कि जांच प्रक्रिया के दौरान भारत ने फोर्स्ड लेबर से निर्मित उत्पादों के आयात पर प्रतिबंध लागू किया। जून 2026 में प्रस्तावित कार्रवाई प्रकाशित होने के बाद भारत ने यह कदम उठाया, जिसके चलते उसे कम टैरिफ वाली श्रेणी में स्थान मिला।

भारत के साथ इस 10 प्रतिशत वाली श्रेणी में 17 अर्थव्यवस्थाएँ शामिल हैं — जिनमें बांग्लादेश, कनाडा, इंडोनेशिया, मलेशिया, मेक्सिको, पाकिस्तान, श्रीलंका और यूनाइटेड किंगडम भी हैं। कंबोडिया, ग्वाटेमाला, होंडुरास, श्रीलंका तथा त्रिनिदाद एवं टोबैगो ने भी जांच शुरू होने के बाद ऐसे प्रतिबंध अपनाए।

यूएसटीआर की घोषणा और जांच प्रक्रिया

यूएसटीआर ने 12 मार्च को इन जांचों की शुरुआत की थी। इस प्रक्रिया में दो चरणों में सार्वजनिक सुनवाई हुई, 45 से अधिक सरकारों से परामर्श किया गया, 2,100 से अधिक सार्वजनिक टिप्पणियाँ प्राप्त हुईं और 100 से अधिक गवाहों के बयान दर्ज किए गए।

2 जून को यूएसटीआर ने निष्कर्ष निकाला कि सभी 60 अर्थव्यवस्थाओं की नीतियाँ और व्यवहार 'अनुचित' हैं तथा वे अमेरिकी व्यापार पर प्रतिकूल प्रभाव डालते हैं — जिससे 1974 के ट्रेड एक्ट की धारा 301 के तहत कार्रवाई का आधार बना।

अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि का बयान

अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीर ने कहा, 'राष्ट्रपति ट्रंप मानते हैं कि दशकों की नैतिक अपील के बावजूद वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं से फोर्स्ड लेबर समाप्त नहीं हुआ है। अमेरिका लगभग एक सदी से ऐसे उत्पादों के आयात पर प्रतिबंध लागू कर रहा है और उसका सख्ती से पालन भी कराता है। अब समय आ गया है कि हमारे व्यापारिक साझेदार भी ऐसा करें।'

ग्रीर ने आगे कहा, 'आज की कार्रवाई मानवाधिकारों के उल्लंघन और व्यापार में विकृति दोनों को दूर करने की दिशा में एक कदम है, जिससे दुनिया भर के श्रमिकों का कल्याण बेहतर होगा।'

किन देशों पर कितना टैरिफ और छूट की व्यवस्था

चीन, ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, वियतनाम और दक्षिण अफ्रीका सहित अधिकांश अन्य अर्थव्यवस्थाओं पर 12.5 प्रतिशत का टैरिफ लागू होगा। यूरोपीय संघ, जापान, दक्षिण कोरिया, स्विट्जरलैंड और ताइवान के लिए मौजूदा मोस्ट-फेवर्ड-नेशन (एमएफएन) दरों को समायोजित कर टैरिफ तय किया जाएगा।

यूएसटीआर ने कुछ उत्पादों को इस कार्रवाई से छूट दी है — जिनमें चुनिंदा कच्चा माल, घरेलू आपूर्ति श्रृंखला के लिए महत्वपूर्ण वस्तुएँ, दवाएँ और सेमीकंडक्टर निर्माण उपकरण शामिल हैं। बांग्लादेश, कंबोडिया, इंडोनेशिया और मलेशिया के लिए अतिरिक्त टैरिफ-रेट कोटा विकसित किए जाएँगे, ताकि अमेरिकी कपास और वस्त्र सामग्री से बने उत्पादों के आयात को प्रोत्साहन मिले।

आगे क्या होगा

ये सभी नए शुल्क 24 जुलाई 2026 से प्रभावी हो गए हैं। यह कार्रवाई अमेरिका के शीर्ष 60 व्यापारिक साझेदारों पर लागू है, जो अमेरिकी आयात का 99.4 प्रतिशत हिस्सा हैं। जॉर्डन ने अमेरिका के साथ पारस्परिक व्यापार समझौते के तहत फोर्स्ड लेबर प्रतिबंध अपनाने की प्रतिबद्धता जताई है। गौरतलब है कि सेक्शन 301 का इस्तेमाल पहले मुख्यतः चीन के साथ व्यापारिक विवादों में होता था — वर्तमान प्रशासन ने इसे श्रम संबंधी व्यापारिक मामलों तक विस्तारित कर एक नई मिसाल कायम की है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह उपलब्धि दबाव में उठाया गया कदम है — न कि स्वेच्छा से अपनाई गई नीति। गौरतलब है कि भारत ने फोर्स्ड लेबर प्रतिबंध तभी लागू किया जब यूएसटीआर की प्रस्तावित कार्रवाई सामने आई, जो दर्शाता है कि यह व्यापारिक दबाव का परिणाम है। असली सवाल यह है कि क्या यह प्रतिबंध केवल टैरिफ बचाने तक सीमित रहेगा या इसे घरेलू स्तर पर भी प्रभावी ढंग से लागू किया जाएगा। सेक्शन 301 का श्रम मामलों में विस्तार एक नई मिसाल है जो आने वाले वर्षों में भारत सहित कई देशों की व्यापार नीतियों को नए सिरे से आकार दे सकती है।
RashtraPress
24 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अमेरिका ने भारत पर फोर्स्ड लेबर को लेकर कितना टैरिफ लगाया है?
अमेरिका ने सेक्शन 301 कार्रवाई के तहत भारत पर 10 प्रतिशत टैरिफ लगाया है, जो 24 जुलाई 2026 से प्रभावी है। यह 60 अर्थव्यवस्थाओं में सबसे कम टैरिफ वाली श्रेणी है।
भारत को कम टैरिफ श्रेणी में क्यों रखा गया?
यूएसटीआर के अनुसार, जांच के दौरान भारत ने फोर्स्ड लेबर से बने उत्पादों के आयात पर प्रतिबंध लागू किया। इसी वजह से उसे उन देशों की तुलना में अनुकूल श्रेणी में रखा गया जिन्होंने ऐसा नहीं किया।
किन देशों पर 12.5 प्रतिशत का उच्च टैरिफ लगाया गया है?
चीन, ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, वियतनाम और दक्षिण अफ्रीका सहित अधिकांश अन्य अर्थव्यवस्थाओं पर 12.5 प्रतिशत टैरिफ लागू होगा। यूरोपीय संघ, जापान, दक्षिण कोरिया और ताइवान के लिए एमएफएन दरों के आधार पर अलग व्यवस्था होगी।
सेक्शन 301 क्या है और इसका इस्तेमाल यहाँ कैसे हुआ?
सेक्शन 301, 1974 के अमेरिकी ट्रेड एक्ट का प्रावधान है जो यूएसटीआर को विदेशी सरकारों की अनुचित व्यापार नीतियों के खिलाफ कार्रवाई का अधिकार देता है। इस बार इसे फोर्स्ड लेबर आयात प्रतिबंध न अपनाने वाले देशों के खिलाफ लागू किया गया — जो इस प्रावधान का श्रम मामलों में पहला बड़े पैमाने पर उपयोग है।
इस कार्रवाई से कौन-से उत्पाद छूट में हैं?
यूएसटीआर ने दवाएँ, सेमीकंडक्टर निर्माण उपकरण, कुछ कच्चे माल और घरेलू आपूर्ति श्रृंखला के लिए महत्वपूर्ण वस्तुओं को इस टैरिफ से छूट दी है। वे उत्पाद भी छूट में हैं जिन पर टैरिफ से आर्थिक व्यवधान की आशंका हो।
राष्ट्र प्रेस
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