क्या उच्च अमेरिकी टैरिफ के बाद भी भारत का कॉरपोरेट बॉंड बाजार मजबूत बना रहेगा?

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क्या उच्च अमेरिकी टैरिफ के बाद भी भारत का कॉरपोरेट बॉंड बाजार मजबूत बना रहेगा?

सारांश

भारत का कॉरपोरेट बॉंड बाजार उच्च अमेरिकी टैरिफ के बावजूद स्थिर रहने की उम्मीद है। जानिए इसकी वजहें और भविष्य की संभावनाएँ।

Key Takeaways

  • भारतीय कॉरपोरेट्स की स्थिति मजबूत है।
  • अमेरिकी टैरिफ की दर 50 प्रतिशत हो गई है।
  • स्मार्टफोन और फार्मास्युटिकल उत्पादों को छूट मिली है।
  • निर्यात में गिरावट का प्रभाव सीमित रहेगा।

नई दिल्ली, 27 अगस्त (राष्ट्र प्रेस)। अमेरिका द्वारा हाल में टैरिफ में वृद्धि के बावजूद, भारत का कॉरपोरेट बॉन्ड बाजार स्थिर रहने की उम्मीद है। इसका मुख्य कारण कॉरपोरेट्स की मजबूत स्थिति और घरेलू फंडिंग तक आसान पहुंच है। यह जानकारी बुधवार को जारी की गई एक रिपोर्ट में सामने आई है।

बार्कलेज रिसर्च ने एक नोट में कहा कि अमेरिकी टैरिफ की वृद्धि से भारतीय निर्यात पर कुछ प्रभाव देखने को मिल सकता है, लेकिन भारतीय कॉरपोरेट क्रेडिट की स्थिति मजबूत बनी रहेगी।

रिसर्च फर्म ने बताया कि बुधवार से भारत पर अमेरिकी टैरिफ की दर बढ़कर 50 प्रतिशत हो गई है, जिससे भारतीय निर्यात पर यूएस ट्रेड-वेटेड टैरिफ रेट बढ़कर 35.7 प्रतिशत हो गया है, जो पहले 20.6 प्रतिशत था।

भारत का अमेरिकी उत्पादों पर औसत टैरिफ 9.4 प्रतिशत है।

बार्कलेज रिसर्च ने यह भी कहा कि स्मार्टफोन, पेट्रोलियम और फार्मास्युटिकल प्रोडक्ट्स को टैरिफ से छूट दी गई है। जबकि जेम एंड ज्वेलरी, कपड़ा, इलेक्ट्रिकल मशीनरी और इंजीनियरिंग गुड्स पर इसका असर होगा।

नोट में उल्लेख किया गया है कि निर्यात में कमी के बावजूद, कॉरपोरेट क्रेडिट पर प्रभाव सीमित रहने का अनुमान है।

इससे पहले, विदेश विभाग ने कहा कि अमेरिका और भारत के वरिष्ठ अधिकारियों ने वर्चुअल बैठक की है, जिसमें उन्होंने द्विपक्षीय पहलों को आगे बढ़ाने और टैरिफ एवं मध्यस्थता के दावों पर व्यापार पर चर्चा की।

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप, उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और अन्य अधिकारियों द्वारा की गई टिप्पणियों के विपरीत, सोमवार को आयोजित वर्चुअल अमेरिका-भारत 2+2 वार्ता में भारत-अमेरिका संबंधों के भविष्य के लिए सकारात्मक रुख दिखाया गया।

विदेश मंत्रालय ने भी एक रीडआउट में अमेरिकी बयान को दोहराया।

इन बयानों में अधिकारियों ने दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों की मजबूती के लिए अपनी इच्छा व्यक्त की, जिससे अमेरिका और भारत के लोगों को लाभ हो सके।

रीडआउट में शामिल मुद्दों में महत्वपूर्ण खनिज अन्वेषण, व्यापार और निवेश, ऊर्जा सुरक्षा, असैन्य-परमाणु सहयोग, मादक पदार्थों की रोकथाम और आतंकवाद के खिलाफ सहयोग शामिल थे।

Point of View

हमारा मानना है कि भारत का कॉरपोरेट बॉंड बाजार अमेरिकी टैरिफ के बावजूद अपनी स्थिरता बनाए रखेगा। यह स्थिति देश की आर्थिक मजबूती और फंडिंग के आसान विकल्पों पर निर्भर करती है। हमें निर्यात में गिरावट का सामना करना पड़ सकता है, लेकिन कॉरपोरेट क्रेडिट की मजबूती हमें संतोषजनक स्थिति में रखेगी।
NationPress
30/08/2025

Frequently Asked Questions

क्या भारत का कॉरपोरेट बॉंड बाजार अमेरिकी टैरिफ से प्रभावित होगा?
हालांकि अमेरिकी टैरिफ बढ़े हैं, कॉरपोरेट बॉंड बाजार में स्थिरता की उम्मीद है क्योंकि कॉरपोरेट्स की स्थिति मजबूत है।
भारत पर अमेरिकी टैरिफ की दर क्या है?
भारत पर अमेरिकी टैरिफ की दर अब 50 प्रतिशत हो गई है।
कौन-से उत्पाद अमेरिकी टैरिफ से प्रभावित नहीं होंगे?
स्मार्टफोन, पेट्रोलियम और फार्मास्युटिकल प्रोडक्ट्स को अमेरिकी टैरिफ से छूट मिली है।
क्या निर्यात में गिरावट का कॉरपोरेट क्रेडिट पर असर पड़ेगा?
रिपोर्ट के अनुसार, निर्यात में कमी के बावजूद कॉरपोरेट क्रेडिट पर प्रभाव सीमित रहने की संभावना है।