गुजरात बना वेलनेस टूरिज्म हब: आयुर्वेद, पंचकर्म और 'लोक आयुर्वेद' से हेल्थ टूरिज्म को मिल रही नई रफ्तार
सारांश
मुख्य बातें
गुजरात अब केवल औद्योगिक और धार्मिक पर्यटन का केंद्र नहीं रहा — राज्य तेज़ी से देश के प्रमुख वेलनेस टूरिज्म हब के रूप में उभर रहा है, जहाँ आयुर्वेद, पंचकर्म, नेचुरोपैथी और 'लोक आयुर्वेद' जैसे पारंपरिक स्वास्थ्य मॉडल देश-विदेश के पर्यटकों को आकर्षित कर रहे हैं। 20 अगस्त 2026 को उपलब्ध जानकारी के अनुसार, राज्य सरकार इस क्षेत्र में इन्फ्रास्ट्रक्चर को लगातार मज़बूत कर रही है।
नवजीवन नेचर क्योर सेंटर: गांधी के विचारों पर आधारित उपचार
कच्छ के पुनाडी पटिया गाँव के निकट 40 हेक्टेयर भूमि पर फैला नवजीवन नेचर क्योर सेंटर महात्मा गांधी के 'नेचर क्योर' दर्शन पर स्थापित है। यहाँ आयुर्वेदिक एवं हर्बल उपचार, पंचकर्म, एक्यूपंक्चर, मेडिटेशन और योग के माध्यम से विभिन्न रोगों का उपचार किया जाता है।
केंद्र के चिकित्सक गवनी शाह के अनुसार, 'जिस प्रकार की ज़रूरत मरीज़ को होती है, उसके अनुसार आयुर्वेदिक फिजियोथेरेपी का उपचार दिया जाता है। सुबह से शाम तक का पूरा शेड्यूल तय किया जाता है — क्या खाना है, क्या पीना है, किस प्रकार का योग करना है और कौन-सा उपचार लेना है। मरीज़ों के स्वास्थ्य से लेकर आहार तक का पूरा ध्यान रखा जाता है।'
वेदगर्भ विहार: 'लोक आयुर्वेद' का अनूठा मॉडल
आयुर्वेद शिक्षा और शोध के लिए विख्यात जामनगर के लखवाड़ा क्षेत्र में लगभग दो एकड़ में स्थापित वेदगर्भ विहार वेलनेस रिसॉर्ट और इको विलेज 'लोक आयुर्वेद' मॉडल पर संचालित है। यह केंद्र 5,000 साल पुरानी निवारक और संवर्धक स्वास्थ्य परंपरा को पुनर्जीवित करने का प्रयास कर रहा है।
रिसॉर्ट के संस्थापक हितेश जानी ने बताया, 'इस सेंटर का उद्देश्य है कि जन्म लेने वाला बच्चा सुंदर, तेजस्वी, बुद्धिमान और उच्च बौद्धिक क्षमता वाला हो। गर्भ संस्कार की इस प्राचीन विधा को हमने हज़ारों वर्षों के इतिहास से पुनः जीवंत किया है।'
जामनगर निवासी मरीज़ पूजा डेर ने अपना अनुभव साझा करते हुए कहा, 'गर्भावस्था के दौरान मुझे कई जटिलताएँ थीं और बच्चे के स्वास्थ्य व संस्कारों को लेकर चिंता थी। वेदगर्भ विहार से उपचार लेने के बाद मेरी नॉर्मल डिलीवरी हुई और बच्चा पूर्णतः स्वस्थ है।'
गुजरात सरकार की भूमिका और हेल्थ टूरिज्म नीति
गुजरात सरकार राज्य में पंचकर्म, आयुर्वेद और नेचुरोपैथी को प्रोत्साहन देकर हेल्थ-टूरिज्म इन्फ्रास्ट्रक्चर को सुदृढ़ करने में जुटी है। आधुनिक जीवनशैली की भागदौड़ में प्राकृतिक परिवेश में स्वास्थ्य लाभ और मानसिक शांति की चाह रखने वाले पर्यटकों की संख्या लगातार बढ़ रही है।
यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर वेलनेस टूरिज्म उद्योग तेज़ी से विस्तार कर रहा है और भारत की पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों की माँग अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में भी बढ़ रही है।
ऑर्गेनिक जीवन पद्धति और प्राकृतिक उपचार की प्रासंगिकता
विशेषज्ञों के अनुसार, कई असाध्य रोगों के उपचार में जैविक जीवनशैली अपनाना और जड़ी-बूटियों तथा पंचगव्य पर आधारित प्राकृतिक चिकित्सा अत्यंत प्रभावी सिद्ध होती है। गौरतलब है कि आयुर्वेद और नेचुरोपैथी को मुख्यधारा की स्वास्थ्य सेवाओं के पूरक के रूप में तेज़ी से मान्यता मिल रही है।
गुजरात के ये वेलनेस केंद्र न केवल घरेलू पर्यटकों को, बल्कि विदेशी स्वास्थ्य-पर्यटकों को भी आकर्षित कर रहे हैं — और राज्य की इस नई पहचान के साथ हेल्थ टूरिज्म सेक्टर में आने वाले वर्षों में और विस्तार की संभावना है।