11वें आयुर्वेद दिवस पर देशभर के नेताओं ने दी शुभकामनाएं, रेखा गुप्ता से केशव प्रसाद मौर्य तक बोले — 'स्वस्थ भारत का आधार'
सारांश
मुख्य बातें
23 सितंबर 2026 को मनाए जा रहे 11वें राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस पर देशभर के वरिष्ठ नेताओं ने आयुर्वेद की प्राचीन ज्ञान परंपरा को नमन करते हुए शुभकामनाएं दीं। दिल्ली से लेकर उत्तर प्रदेश, राजस्थान और उत्तराखंड तक, मुख्यमंत्रियों और उपमुख्यमंत्रियों ने एक्स पर पोस्ट साझा कर आयुर्वेद को केवल चिकित्सा प्रणाली नहीं, बल्कि स्वस्थ जीवनशैली और भारतीय जीवनदृष्टि का आधार बताया। इस वर्ष के आयुर्वेद दिवस की थीम 'स्वास्थ्यवर्धक भविष्य के लिए आयुर्वेद' रही।
दिल्ली सीएम रेखा गुप्ता का संदेश
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने एक्स पर लिखा, 'आयुर्वेद भारत की हजारों वर्ष पुरानी ज्ञान परंपरा है, जिसे आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में विश्व में नई पहचान और नया विस्तार मिला है।' उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि दिल्ली सरकार आयुर्वेद और आयुष सेवाओं को सुदृढ़ कर इस ज्ञान को जन-जन के स्वास्थ्य से जोड़ने के लिए संकल्पित है।
गुप्ता ने आगे कहा कि 11वें आयुर्वेद दिवस का संकल्प भारतीय विरासत को आधुनिक स्वास्थ्य व्यवस्था का सशक्त आधार बनाने की प्रेरणा देता है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब केंद्र सरकार आयुष सेवाओं के विस्तार पर विशेष ज़ोर दे रही है।
उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के नेताओं की प्रतिक्रिया
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेशवासियों को बधाई देते हुए कहा, 'आयुर्वेद हमारी प्राचीन चिकित्सा परंपरा ही नहीं, बल्कि निरोगी जीवन, प्रकृति के साथ संतुलन और समग्र स्वास्थ्य की भारतीय जीवनदृष्टि है।' धामी ने केंद्र सरकार के आयुष्मान आरोग्य मंदिर, राष्ट्रीय आयुष मिशन और 'देश का प्रकृति परीक्षण अभियान' जैसे प्रयासों का उल्लेख किया।
उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत की आयुर्वेदिक ज्ञान परंपरा को वैश्विक पहचान मिल रही है। उन्होंने अनुसंधान, शिक्षा और नवाचार को बढ़ावा देते हुए 'स्वस्थ भारत' के संकल्प को साकार करने का आह्वान किया।
राजस्थान के नेताओं के संदेश
राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि आयुर्वेद स्वस्थ जीवनशैली, संतुलित दिनचर्या और प्रकृति के साथ सामंजस्य का मार्ग प्रशस्त करता है। उन्होंने नागरिकों से आयुर्वेद के सिद्धांतों को दैनिक जीवन में अपनाने और स्वस्थ समाज के निर्माण के संकल्प को सशक्त करने का अनुरोध किया।
राजस्थान की उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी ने लिखा कि आयुर्वेद प्राचीन एवं समृद्ध चिकित्सा परंपरा के साथ-साथ स्वस्थ जीवनशैली का आधार भी है। वहीं, उपमुख्यमंत्री डॉ. प्रेम चंद बैरवा ने एक संस्कृत श्लोक — 'हिताहितं सुखं दुःखमायुस्तस्य हिताहितम्। मानं च तच्च यत्रोक्तमायुर्वेदः स उच्यते॥' — साझा कर आयुर्वेद के मूल दर्शन को रेखांकित किया।
आयुर्वेद दिवस का महत्व और सरकारी प्रयास
गौरतलब है कि राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस हर वर्ष धन्वंतरि जयंती पर मनाया जाता है। इस वर्ष यह 11वीं बार आयोजित हुआ। केंद्र सरकार के आयुष मंत्रालय के अंतर्गत आयुर्वेद शिक्षा एवं अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
यह आयोजन ऐसे समय में विशेष महत्व रखता है जब वैश्विक स्तर पर पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों के प्रति रुचि बढ़ रही है और विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) भी पारंपरिक चिकित्सा को मान्यता देने के प्रयास कर रहा है। आगे के वर्षों में आयुर्वेद को आधुनिक स्वास्थ्य ढाँचे में एकीकृत करने की दिशा में सरकार के प्रयास जारी रहने की उम्मीद है।