आयुर्वेद दिवस 2026: NIA वाइस चांसलर डॉ. संजीव शर्मा बोले — प्रामाणिक जानकारी जनता तक पहुँचाना असली लक्ष्य
सारांश
मुख्य बातें
नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेद (NIA) के वाइस चांसलर प्रोफेसर डॉ. संजीव शर्मा ने 22 सितंबर 2026 को नागपुर में कहा कि आयुर्वेद दिवस का वास्तविक उद्देश्य महज उत्सव मनाना नहीं, बल्कि आयुर्वेद से जुड़ी प्रामाणिक और सटीक जानकारी को आम जनता तक पहुँचाना है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि आयुर्वेद केवल भारतीय ज्ञान परंपरा का हिस्सा नहीं, बल्कि एक वैज्ञानिक चिकित्सा पद्धति भी है जो व्यक्ति, राष्ट्र और विश्व के स्वास्थ्य सुधार में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
आयुर्वेद दिवस का संदेश और उद्देश्य
23 सितंबर को मनाए जाने वाले आयुर्वेद दिवस की पूर्व संध्या पर डॉ. शर्मा ने कहा कि इस आयोजन का प्रमुख लक्ष्य आम लोगों को सीधे विशेषज्ञों से आयुर्वेद की प्रामाणिक जानकारी उपलब्ध कराना है, ताकि भ्रामक सूचनाओं का स्थान सही ज्ञान ले सके। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि इस संदेश को केवल शहरी क्षेत्रों तक सीमित रखने के बजाय ग्रासरूट स्तर तक पहुँचाना ज़रूरी है।
उनके अनुसार, आयुर्वेद की विधाओं और उपयोग के बारे में जन-जागरूकता फैलाना इस दिवस की केंद्रीय भावना है। गौरतलब है कि देश में वैकल्पिक चिकित्सा पद्धतियों को लेकर जनमानस में कई बार भ्रांतियाँ रही हैं, और ऐसे में विशेषज्ञों की प्रत्यक्ष भागीदारी को डॉ. शर्मा ने अनिवार्य बताया।
आयुष मंत्रालय की वैश्विक महत्त्वाकांक्षाएँ
डॉ. शर्मा ने बताया कि केंद्र सरकार का आयुष मंत्रालय आयुर्वेद को वैश्विक मंच पर स्थापित करने के लिए व्यापक योजनाओं पर सक्रिय रूप से कार्य कर रहा है। उनके अनुसार पिछले एक दशक में आयुर्वेद की वैश्विक स्वीकार्यता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। आयुर्वेदिक उत्पादों के निर्यात और घरेलू बाज़ार के आकार में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है, साथ ही इस पद्धति से उपचार लेने वाले मरीज़ों की संख्या भी बढ़ी है।
यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर पारंपरिक और समग्र स्वास्थ्य चिकित्सा पद्धतियों में रुचि बढ़ रही है, और विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) भी पारंपरिक चिकित्सा को मुख्यधारा में लाने की दिशा में नीतियाँ बना रहा है।
स्वास्थ्य का वास्तविक पैमाना
डॉ. शर्मा ने कहा कि आयुर्वेद की सफलता केवल बाज़ार के आकार या मरीज़ों की संख्या से नहीं मापी जानी चाहिए — असली कसौटी है एक स्वस्थ समाज का निर्माण। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि स्वास्थ्य का अर्थ सिर्फ बीमारी का उपचार नहीं, बल्कि व्यक्ति को दीर्घकाल तक स्वस्थ बनाए रखना भी होना चाहिए — जो कि आयुर्वेद की मूल अवधारणा है।
युवाओं और करियर पर बदलता रुझान
डॉ. शर्मा ने बताया कि अब तक स्कूली शिक्षा के दौरान बच्चों को आयुर्वेद को करियर विकल्प के रूप में पर्याप्त जानकारी नहीं मिल पाती थी। हालाँकि, जागरूकता बढ़ने के साथ युवाओं का इस पद्धति की ओर रुझान तेज़ी से बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि अब नीट (NEET) के माध्यम से आयुर्वेद पाठ्यक्रमों में भी प्रवेश संभव है।
उन्होंने स्वीकार किया कि फिलहाल एमबीबीएस की ओर छात्रों का झुकाव अधिक है, लेकिन यह परिदृश्य बदल रहा है। डॉ. शर्मा और सरकार का साझा लक्ष्य है कि आयुर्वेद को युवाओं के लिए 'दूसरे विकल्प' की छवि से निकालकर 'पहली पसंद' के रूप में स्थापित किया जाए। इसके लिए व्यापक जन-जागरूकता और सही सूचना का प्रसार अनिवार्य है।
आने वाले समय में यदि आयुष मंत्रालय की योजनाएँ ज़मीनी स्तर पर प्रभावी रूप से लागू होती हैं, तो भारत में आयुर्वेद की भूमिका स्वास्थ्य तंत्र में और अधिक केंद्रीय हो सकती है।