1 सितंबर 2026
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आयुर्वेद दिवस 2026 से पहले एआईआईए ने लॉन्च की 'आयुर्वार्ता' डिजिटल श्रृंखला, 23 सितंबर की तारीख का महत्व समझाया

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आयुर्वेद दिवस 2026 से पहले एआईआईए ने लॉन्च की 'आयुर्वार्ता' डिजिटल श्रृंखला, 23 सितंबर की तारीख का महत्व समझाया

सारांश

आयुर्वेद दिवस से ठीक पहले एआईआईए ने 'आयुर्वार्ता' डिजिटल मंच की शुरुआत की — जहाँ पहली ही कड़ी में 23 सितंबर और शरद विषुव के बीच के गहरे संबंध को उजागर किया गया। यह पहल आयुर्वेद को वैश्विक स्वास्थ्य विमर्श में स्थापित करने की दिशा में एक ठोस डिजिटल कदम है।

मुख्य बातें

अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (एआईआईए) ने 1 सितंबर 2026 को 'आयुर्वार्ता' डिजिटल संवाद श्रृंखला का शुभारंभ किया।
यह पहल आयुर्वेद दिवस (23 सितंबर) से पहले आयुर्वेद के प्रामाणिक ज्ञान को व्यापक जनसमुदाय तक पहुँचाने के लिए शुरू की गई है।
(वैद्य) पीके प्रजापति और प्रो.
महेश व्यास ने 23 सितंबर और शरद विषुव के बीच संबंध पर चर्चा की।
एपिसोड यूट्यूब, फेसबुक, एक्स और इंस्टाग्राम पर उपलब्ध होंगे।
आगामी कड़ियों में आयुर्वेद का वैज्ञानिक आधार, सार्वजनिक स्वास्थ्य, नवाचार और अंतरराष्ट्रीय विस्तार जैसे विषय शामिल होंगे।

अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (एआईआईए), नई दिल्ली ने 1 सितंबर 2026 को 'आयुर्वार्ता' नामक एक विशेष डिजिटल संवाद श्रृंखला का शुभारंभ किया। आयुष मंत्रालय के अधीन इस स्वायत्त संस्थान की यह पहल 23 सितंबर को मनाए जाने वाले आयुर्वेद दिवस से पहले आयुर्वेद के प्रामाणिक ज्ञान और वैज्ञानिक दृष्टिकोण को देश-विदेश के व्यापक दर्शकों तक पहुँचाने के उद्देश्य से शुरू की गई है।

पहली कड़ी: आयुर्वेद दिवस की तारीख का रहस्य

'आयुर्वार्ता' की उद्घाटन कड़ी में एआईआईए के निदेशक प्रोफेसर (वैद्य) पीके प्रजापति और डीन एवं पीएच.डी. प्रोफेसर डॉ. महेश व्यास के बीच विशेष संवाद प्रस्तुत किया गया। इस कड़ी का केंद्रीय विषय था — 'आयुर्वेद दिवस 23 सितंबर को ही क्यों?'

चर्चा में आयुर्वेद दिवस के इतिहास, पूर्व में धन्वंतरि जयंती के अवसर पर इसके आयोजन और भारत सरकार द्वारा एक निश्चित तिथि निर्धारित किए जाने के निर्णय पर विस्तार से प्रकाश डाला गया।

23 सितंबर और शरद विषुव का संबंध

प्रोफेसर डॉ. महेश व्यास ने बताया कि 23 सितंबर की तिथि शरद विषुव के आसपास आती है — वह खगोलीय क्षण जब दिन और रात की अवधि लगभग समान होती है। उन्होंने रेखांकित किया कि संतुलन और सामंजस्य आयुर्वेद की स्वास्थ्य अवधारणा के मूल आधार हैं, और इस दृष्टि से यह तिथि आयुर्वेद के समत्व के दर्शन से गहराई से जुड़ती है।

संस्थान का व्यापक दृष्टिकोण

प्रोफेसर (वैद्य) पीके प्रजापति ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आयुर्वेद को एक महत्वपूर्ण ज्ञान एवं स्वास्थ्य प्रणाली के रूप में सुदृढ़ करने के निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं, जिसकी वैश्विक स्वास्थ्य परिदृश्य में प्रासंगिकता लगातार बढ़ रही है। उन्होंने यह भी कहा कि एक निश्चित तिथि के निर्धारण से आयुर्वेद दिवस के वार्षिक आयोजन को अधिक निरंतरता और राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक सुदृढ़ पहचान मिलेगी।

प्रजापति ने 'आयुर्वार्ता' को इसी व्यापक दृष्टिकोण का डिजिटल विस्तार बताते हुए कहा कि इसके ज़रिए लोगों को आयुर्वेद के प्रामाणिक ज्ञान और विशेषज्ञों के विचारों तक सरल एवं प्रभावी पहुँच उपलब्ध कराई जाएगी।

आगामी कड़ियों में क्या होगा

श्रृंखला की आने वाली कड़ियों में भारत और विदेशों के प्रमुख आयुर्वेद विशेषज्ञों, चिकित्सकों, शिक्षाविदों, वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और नीति विशेषज्ञों के साथ संवाद प्रस्तुत किए जाएंगे। प्रमुख विषयों में शामिल हैं — आयुर्वेद का वैज्ञानिक आधार और आधुनिक अनुसंधान, आयुर्वेद शिक्षा एवं नई पीढ़ी की भूमिका, सार्वजनिक स्वास्थ्य, नवाचार और तकनीक, आधुनिक चिकित्सा विज्ञान के साथ समन्वय, औषधीय पौधे एवं प्राकृतिक संसाधन, तथा आयुर्वेद के अंतरराष्ट्रीय विस्तार की संभावनाएँ।

डिजिटल पहुँच और लक्षित दर्शक

'आयुर्वार्ता' के एपिसोड एआईआईए के आधिकारिक यूट्यूब, फेसबुक, एक्स और इंस्टाग्राम चैनलों पर उपलब्ध कराए जाएंगे। यह श्रृंखला विद्यार्थियों, युवाओं, चिकित्सकों, शोधकर्ताओं, शिक्षाविदों और आम जनता — सभी के लिए आयुर्वेद से जुड़ी प्रामाणिक एवं वैज्ञानिक जानकारी का एक सुलभ मंच बनने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी इसकी निरंतरता और वैज्ञानिक गहराई होगी। आयुर्वेद को लेकर डिजिटल सामग्री की कमी नहीं है — कमी है प्रमाण-आधारित, समीक्षित और संस्थागत रूप से जवाबदेह संवाद की। यह श्रृंखला यदि केवल प्रचार-प्रसार तक सीमित रही और आधुनिक चिकित्सा विज्ञान के साथ आयुर्वेद के तनावपूर्ण सवालों — जैसे नैदानिक परीक्षण, मानकीकरण और दुष्प्रभावों की पारदर्शिता — को नहीं छुआ, तो यह एक और सरकारी मंच बनकर रह जाएगी। वैश्विक स्वास्थ्य परिदृश्य में आयुर्वेद की साख तभी बढ़ेगी जब संवाद में आलोचनात्मक दृष्टि भी शामिल हो।
RashtraPress
1 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'आयुर्वार्ता' डिजिटल श्रृंखला क्या है?
'आयुर्वार्ता' अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (एआईआईए) द्वारा शुरू की गई एक डिजिटल संवाद श्रृंखला है, जिसमें आयुर्वेद विशेषज्ञों, शोधकर्ताओं और नीति विशेषज्ञों के साथ संवाद प्रस्तुत किए जाएंगे। इसका उद्देश्य आयुर्वेद के प्रामाणिक और वैज्ञानिक ज्ञान को देश-विदेश के व्यापक दर्शकों तक पहुँचाना है।
आयुर्वेद दिवस 23 सितंबर को ही क्यों मनाया जाता है?
प्रोफेसर डॉ. महेश व्यास के अनुसार, 23 सितंबर की तिथि शरद विषुव के आसपास आती है, जब दिन और रात की अवधि लगभग समान होती है। यह संतुलन आयुर्वेद के समत्व और सामंजस्य के मूल दर्शन से मेल खाता है। इससे पहले आयुर्वेद दिवस धन्वंतरि जयंती पर मनाया जाता था, लेकिन भारत सरकार ने बाद में एक निश्चित तिथि निर्धारित की।
एआईआईए कौन सा संस्थान है?
अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (एआईआईए) नई दिल्ली स्थित एक स्वायत्त संस्थान है, जो आयुष मंत्रालय के अधीन कार्य करता है। यह आयुर्वेद शिक्षा, अनुसंधान और चिकित्सा के क्षेत्र में भारत का प्रमुख संस्थान है।
'आयुर्वार्ता' के एपिसोड कहाँ देखे जा सकते हैं?
'आयुर्वार्ता' के एपिसोड एआईआईए के आधिकारिक यूट्यूब, फेसबुक, एक्स और इंस्टाग्राम चैनलों पर उपलब्ध कराए जाएंगे। यह श्रृंखला विद्यार्थियों, चिकित्सकों, शोधकर्ताओं और आम जनता सभी के लिए निःशुल्क उपलब्ध होगी।
'आयुर्वार्ता' में आगे किन विषयों पर चर्चा होगी?
आगामी कड़ियों में आयुर्वेद का वैज्ञानिक आधार, आधुनिक अनुसंधान, शिक्षा में नई पीढ़ी की भूमिका, सार्वजनिक स्वास्थ्य, नवाचार और तकनीक, औषधीय पौधे, तथा आयुर्वेद के अंतरराष्ट्रीय विस्तार की संभावनाएँ जैसे महत्वपूर्ण विषय शामिल होंगे। भारत और विदेशों के विशेषज्ञ इन कड़ियों में भाग लेंगे।
राष्ट्र प्रेस
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