राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस 2026: PM मोदी ने एक्स पर साझा किया संस्कृत श्लोक, बताया स्वस्थ जीवनशैली का माध्यम
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 23 सितंबर 2026 को राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस के अवसर पर देशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक प्रसिद्ध संस्कृत श्लोक साझा किया और कहा कि आयुर्वेद केवल उपचार की पद्धति नहीं, बल्कि स्वस्थ एवं संतुलित जीवनशैली का सशक्त माध्यम है। इस अवसर पर केंद्र सरकार के कई वरिष्ठ मंत्रियों ने भी एक्स पर पोस्ट करते हुए आयुर्वेद को अपनाने का आह्वान किया।
PM मोदी का संदेश और संस्कृत श्लोक
प्रधानमंत्री मोदी ने एक्स पर संस्कृत श्लोक — 'हिताहितं सुखं दुःखमायुस्तस्य हिताहितम्। मानं च तच्च यत्रोक्तमायुर्वेदः स उच्यते।।' — साझा किया। इस श्लोक का भावार्थ स्पष्ट करते हुए उन्होंने लिखा कि जिस शास्त्र में मनुष्य के लिए हितकारी और अहितकारी जीवनशैली, सुखमय और दुःखमय जीवन के बीच का अंतर, तथा दीर्घ एवं स्वस्थ जीवन के लिए अपनाने और त्यागने योग्य बातों का विस्तृत विवेचन किया गया हो — उसे आयुर्वेद कहते हैं।
मोदी ने देशवासियों का आह्वान किया, 'आइए, अपनी इस समृद्ध विरासत को अपनाने का संकल्प और अधिक मजबूत करें।' उन्होंने आयुर्वेद को भारत की प्राचीन ऋषि परंपरा की अनमोल धरोहर बताया।
केंद्रीय मंत्रियों की प्रतिक्रिया
केंद्रीय राज्य आयुष मंत्री प्रतापराव जाधव ने एक्स पर लिखा कि अमेरिका और यूरोप के बाज़ारों में भारतीय आयुर्वेदिक एवं हर्बल उत्पादों की बढ़ती माँग इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण है कि वैश्विक समुदाय 'वसुधैव कुटुम्बकम्' की भावना पर भरोसा कर रहा है। उन्होंने कहा, 'यह बढ़त 'आत्मनिर्भर भारत' के सामर्थ्य को दर्शाती है।'
केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि समग्र स्वास्थ्य, रोगों की रोकथाम और स्वस्थ जीवनशैली पर आधारित आयुर्वेद की पद्धति आज भी पूर्णतः प्रासंगिक है। उन्होंने नागरिकों से आह्वान किया कि इस अमूल्य विरासत को अपनाकर स्वस्थ भारत के संकल्प को सशक्त करें।
केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने प्रधानमंत्री के संकल्प को दोहराते हुए कहा, 'आयुर्वेद भारत की प्राचीन ऋषि परंपरा की वह दिव्य धरोहर है, जो केवल रोगों की औषधि नहीं, बल्कि जीवन जीने की समग्र विद्या है।' उन्होंने इस दिवस पर आयुर्वेद को जीवनशैली में शामिल करने की अपील की।
केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने भी शुभकामनाएं देते हुए कहा कि आयुर्वेद प्राचीन एवं समृद्ध चिकित्सा परंपरा के साथ-साथ स्वस्थ जीवनशैली का आधार भी है। उन्होंने नागरिकों से आयुर्वेद के सिद्धांतों को दैनिक जीवन में अपनाकर निरोगी और संतुलित जीवन की ओर बढ़ने का आग्रह किया।
आयुर्वेद का वैश्विक विस्तार
गौरतलब है कि भारत सरकार पिछले कुछ वर्षों से आयुर्वेद को वैश्विक स्तर पर स्थापित करने के लिए सक्रिय रूप से प्रयास कर रही है। आयुष मंत्रालय के अंतर्गत अंतर्राष्ट्रीय साझेदारियाँ बढ़ी हैं और अमेरिका, यूरोप तथा दक्षिण-पूर्व एशिया में भारतीय हर्बल उत्पादों की माँग में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज हुई है। यह प्रवृत्ति ऐसे समय में और महत्वपूर्ण हो जाती है जब वैश्विक स्वास्थ्य समुदाय समग्र और निवारक चिकित्सा की ओर रुझान दिखा रहा है।
आम जनता पर असर और आगे की राह
राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस प्रतिवर्ष धन्वंतरि जयंती पर मनाया जाता है और इसका उद्देश्य आयुर्वेद की जनस्वीकृति बढ़ाना तथा इसे आधुनिक स्वास्थ्य प्रणाली के पूरक के रूप में प्रोत्साहित करना है। सरकार की यह सक्रियता संकेत देती है कि आने वाले समय में आयुर्वेदिक अनुसंधान और उत्पाद निर्यात नीति में और बड़े कदम उठाए जा सकते हैं।